ढोलकल की गणेश प्रतिमा गिराने से नक्सलियों का इंकार

दंतेवाड़ा ! ढोलकल की ऐतिहासिक गणेश प्रतिमा को गिराने की वारदात के लगभग पखवाड़े भर बाद नक्सलियों ने अपनी सफाई दी है और कहा कि प्रतिमा गिराने में उनका कोई हाथ नहीं है।;

Update: 2017-02-13 22:36 GMT

दंतेवाड़ा !  ढोलकल की ऐतिहासिक गणेश प्रतिमा को गिराने की वारदात के लगभग पखवाड़े भर बाद नक्सलियों ने अपनी सफाई दी है और कहा कि प्रतिमा गिराने में उनका कोई हाथ नहीं है। यह पुलिस का दुष्प्रचार है, जबकि पुलिस अभी भी ढोलकल मामले में नक्सलियों का ही हाथ बता रही है।
    नक्सल नेता गणेश उइके की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि नक्सलियों को बदनाम करने के लिए पुलिस ही दुष्प्रचार कर रही है। गणेश उइके नक्सल संगठन के दक्षिण बस्तर सब जोनल ब्यूरो के सचिव हैं। विज्ञप्ति में कहा गया है कि जब से गणेश प्रतिमा गिरी है, तब से प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में तरह-तरह की कहानियां प्रचारित की जा रही हैं। पुरातत्व विभाग ने भी प्रतिमा गिरने की पीछे की कारणों को नजरअंदाज करते हुए घटना में नक्सलियों का हाथ होने का झूठा दावा किया है। प्रतिमा को गिराने में नक्सल संगठन का कोई ताल्लूक नहीं है। जनता की व्यक्तिगत धार्मिक विश्वासों को सम्मान करने वाली नक्सलवादी पार्टी ने ऐसी घिनौनी काम कभी नहीं किया है और न आगे करेगी। जनवादी अधिकारों की रक्षा के लिए काम करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता बेला भाटिया के घर सरकार प्रायोजित संगठन अग्रि द्वारा हमला किया गया था। इस मामले के तुरंत बाद नक्सलियों ने गणेश प्रतिमा गिरायी, ऐसा दुष्प्रचार कर दिया गया। यह सरकार की साजिश है। ग्रीन हण्ट अभियान के नाम से केन्द्र और राज्य सरकार जनता पर दमन कर रही है। पुलिस और अद्र्धसैनिक बलों का हमला जारी है, जो जन हित के लिए काम करते हैं उन्हें नक्सल समर्थक बताकर प्रताडि़त किया जाता है। यह भी एक साजिश है। पुलिस ने मुख्य मुद्दे से ध्यान हटाने गणेश प्रतिमा मामले में नक्सल हाथ होने का दुष्प्रचार किया।
उल्लेखनीय है कि अब से करीब पखवाड़े भर पहले ऐतिहासिक ढोलकल की गणेश प्रतिमा गायब होने की खबर सोशल मीडिया में वायरल हुई। यह 27 जनवरी की बात थी। कलेक्टर सौरभ कुमार और एसपी कमलोचन कश्यप के नेतृत्व में समूचा पुलिस और प्रशासन पहाड़ी पर जा डटा। प्रतिमा पहाड़ी के नीचे खाई में मिली और 65 टूकड़ों में खण्डित हो गयी थी। पुलिस ने इसी दिन गणेश प्रतिमा गिराने के लिए नक्सलियों को जिम्मेदार ठहराया और पंचायत सचिव की सूचना पर फरसपाल थाने में अज्ञात नक्सलियों के खिलाफ मामला भी दर्ज कर लिया गया। हालांकि बाद में पंचायत सचिव ने गणेश प्रतिमा के मामले में प्रशासन को कोई सूचना देने अथवा मामला दर्ज कराने से भी इंकार कर दिया। पुरातत्व विभाग की टीम फरसपाल और ग्राम सभा में ग्रामीणों की सहमति के बाद खण्डित प्रतिमा का पुनर्निर्माण कर तीन दिन में ही पहले की तरह पहाड़ी के शिखर पर स्थापित कर दिया।
अब गणेश प्रतिमा गिराने के मामले में नक्सलियों के इंकार किये जाने के बाद पुलिस के दावों पर ही सवाल उठने लगे हैं। तत्कालीन आईजी एसआरपी कल्लूरी ने तो घटना के तुरंत बाद ही पूरे मामले को नक्सलियों से जोड़ दिया था और 27 जनवरी की शाम ही दंतेवाड़ा पहुंचकर पुलिस अधीक्षक व अन्य अधिकारियों की बैठक ली और नक्सलियों की तलाश में सर्चिंग अभियान चलाने कहा था। इधर आज नक्सलियों के इंकार किये जाने के बाद भी पुलिस अपने दावे पर कायम है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नक्सल आपरेशन जीएन बघेल ने कहा है कि गणेश प्रतिमा नक्सलियों ने ही गिरायी है। जन विरोध बढ़ता देख नक्सली सफाई देने में लगे हैं। यह नक्सलियों की पुरानी रणनीति है। किसी घटना को अंजाम देने के बाद पहले वे माहौल का अध्ययन करते हैं और उनको लगता है कि माहौल उनके खिलाफ बन रहा है तो वे गलत तर्कों का सहारा लेकर घटना पर अपनी सफाई देने लगते हैं। ढोलकल मामले में भी नक्सली यही कर रहे हैं।

 

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