बिना दस्तावेज के बनाए जा रहे हैं स्मार्ट कार्ड

बिलासपुर ! जिला चिकित्सालय में बिना दस्तावेज के स्मार्ट कार्ड बनाए जा रहे हैं। अस्पताल पंजीयन कक्ष में बिना आधार कार्ड, वोटर आईडी के ही कंपनी के कर्मचारियों के द्वारा लोगों के स्मार्ट कार्ड बनाये जा;

Update: 2017-02-20 22:38 GMT

बिलासपुर !   जिला चिकित्सालय में बिना दस्तावेज के स्मार्ट कार्ड बनाए जा रहे हैं। अस्पताल पंजीयन कक्ष में बिना आधार कार्ड, वोटर आईडी के ही कंपनी के कर्मचारियों के द्वारा लोगों के स्मार्ट कार्ड बनाये जा रहे हैं जिसमें एक आपरेटर द्वारा बिना दस्तावेज के लोगों के नाम पता पूछकर स्मार्ट कार्ड बनाये जा रहे हैं। हाल ही में फर्जी स्मार्ट कार्ड के कई मामले भी सामने आये हैं।
जिला अस्पताल में रविवार के छुट्टी का दिन होना व चोरी छिपे स्मार्ट कार्ड बनाना वो भी किसी प्रकार की सूचना के बगैर जो कि एक संदेह लग रहा है। जबकि स्मार्ट कार्ड के शिविर के लिए पहले ही अस्पताल परिसर में नोटिस लगाई जाती है। जिससे जिनका स्मार्ट कार्ड नहीं बना है वह अपना कार्ड बनवा सकते हैं। इसके पूर्व में भी जिला अस्पताल के केडिया भवन में स्मार्ट कार्ड का शिविर लगाया गया था जिसके लिए बैनर, पोस्टर व नोटिस अस्पताल के परिसर लगाये गये थे जिससे सबको लाभ मिल सकें। लेकिन स्मार्ट कार्ड बनाने वाली कंपनी व कुछ स्टाफ कर्मियों की सांठगांठ से गुपचुप तरीके से ज्यादा रकम लेकर हितग्राहियों का स्मार्ट कार्ड बनाया जा रहा है।
शहर में कई जगहों पर कंपनी के कर्मचारियों के द्वारा साठगांठ से अवैध रूपये लेकर लोगों के स्मार्ट कार्ड बनाये जा रहे हैं। लेकिन प्रशासन की नजर इन पर नहीं पड़ रही है जिससे कुछ लोगों द्वारा बिना सूचना के एक कमरे व सामुदायिक भवनों में लैपटाप के माध्यम से स्मार्ट कार्ड बनाये जा रहे हैं। वहीं कई परिवार के लोगों के दो-दो स्मार्ट कार्ड बन चुके हैं। शहर में इन दिनों स्मार्ट कार्ड बनाने का काम जोरों से चल रहा है। जबकि नियम यह है कि शिविर लगाने से पहले सबको सूचित किया जाता है तब शिविर लगाया जाता है। जिला अस्पताल के सिविल सर्जन से इस संबंध पर बात करनी चाही मगर उनसे संपर्क नहीं हो सका।
सिम्स के नेत्रवार्ड में महिला पुरुषों का हो रहा उपचार
सिम्स के नेत्रवार्ड में महिला व पुरुष का उपचार एक साथ किया जा रहा है। जबकि सिम्स के पुरुष नेत्रवार्ड में ताला लगा हुआ है। महिला वार्ड में ही दोनों मरीजों को भर्ती कर उपचार किया जा रहा है। जबकि सिम्स में किचन सेंटर के सामने नेत्रवार्ड अलग-अलग है जिसमें 20-20 बिस्तरों का महिला व पुरुष का वार्ड है उसके बाद भी पुरुष वार्उ को बंद कर एक ही वार्ड में नेत्र का इलाज कराने आये लोगों को एक साथ ठूंसा जा रहा है। जिससे एक ही वार्ड में पुरुष महिला मरीजों के भर्ती होने से इन्हें भारी परेशानी हो रही है। ज्ञात हो कि सिम्स में हर दिन आंख के आपरेशन, मोतियाबिंद अन्य इलाज के लिए मरीज ज्यादा संख्या में पहुंचते हैं।

 

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