रेहड़ी पटरी वालों को उजाड़ने के खिलाफ उतरी कांग्रेस, उपराज्यपाल से लगाई गुहार

कांग्रेस ने एक बार फिर रेहड़ी पटरी वालों के हक में उतर कर उनकी आवाज बुलंद करना शुरू कर दिया है

Update: 2017-07-14 23:48 GMT

नई दिल्ली। कांग्रेस ने एक बार फिर रेहड़ी पटरी वालों के हक में उतर कर उनकी आवाज बुलंद करना शुरू कर दिया है। रेहड़ी पटरी संगठनों के प्रतिनिधियों तथा कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने आज दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल से मुलाकात करके जून 2017 में दिल्ली की अलग-अलग 17 जगहों से उजाड़े गए लगभग 15 हजार रेहड़ी पटरी वालों को दोबारा स्थापित करने तथा सरकारी एजेन्सियों के द्वारा और अन्य रेहड़ी पटरी वालों को न उजाड़े जाने का अनुरोध किया।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन ने कहा कि दिल्ली की सरकारी एजेन्सियां दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश की आड़ में गरीब रेहड़ी पटरीवालों को परेशान कर रही हैं, जिसमें रेहड़ी पटरीवालों का नाम तक नहीं है। माकन के अलावा प्रतिनिधिमंडल में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा, पूर्व विधायक जयकिशन, पूर्व पार्षद खविन्द्र सिंह कैप्टन, दिल्ली के रेहड़ी पटरी संगठनों के प्रतिनिधि विजय सिंह सहित कई नेता शामिल हुए।

अजय माकन ने मुलाकात का ब्यौरा देते कहा कि कांग्रेस की सोच थी कि भारतवर्ष में असंगठित रेहड़ी पटरी वालों की समस्याओं का निवारण किया जाए जिसके लिए कांग्रेस की यूपीए सरकार ने मार्च 2014 में द स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट 2014 तमाम विरोधों के बावजूद भी संसद से पास कराया।

उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत छह माह में एक योजना बनाकर टाउन वेन्डिंग कमेटियों का गठन करना था व एक साल के अंदर टाउन वेन्डिंग कमेटी से सम्बन्धित नियम बनाए जाने थे। टाउन वेन्डिंग कमेटी में 40 प्रतिशत रेहड़ी पटरी के चुने हुए प्रतिनिधियों को शामिल करना था व 60 प्रतिशत में आरडब्लूए के प्रतिनिधि, व्यापारियों के प्रतिनिधि, यातायात पुलिस के प्रतिनिधि, निगमों के प्रतिनिधि तथा इंजीनियर्स को शामिल करना था।

रेहड़ी पटरी कानून की धारा 3 में यह साफ तौर पर कहा गया है कि किसी भी रेहड़ी पटरीवाले को तब तक नही हटाया जायेगा जब तक उनका सर्वे कराकर उन्हें प्रमाण पत्र न दिये जाऐ। इसी प्रकार इस कानून की धारा 22 यह कहती है कि एक टाउन वेडिंग कमेटी बनाई जाऐगी जो कि काम कर रहे रेहड़ी पटरी वालों का सर्वे करेगी तथा वेडिंग जोन को भी चिन्हित करेगी। इस कानून के तहत शहर की कुल आबादी के 2.5 प्रतिशत रेहड़ी पटरी वालों को लाइसेंस दिए जाने का प्रावधान है। लेकिन कोई काम नहीं होने से आज रेहड़ी पटरी वालों को उजाड़ा जा रहा है।

 

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