हैदराबाद में डिजिटल अरेस्ट के जरिए 29 लाख रुपये से अधिक की ठगी, दो आरोपी गिरफ्तार

हैदराबाद पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर एक 63 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्मचारी से 29 लाख रुपये से अधिक की ठगी के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।;

Update: 2026-10-18 20:38 GMT

हैदराबाद। हैदराबाद पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर एक 63 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्मचारी से 29 लाख रुपये से अधिक की ठगी के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

साइबर क्राइम पुलिस ने आरोपियों को ठगी की रकम के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने, धोखाधड़ी से हासिल धन निकालने और पैसों के लेनदेन का सुराग छिपाने के लिए उन्हें अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराने के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर साइबर ठगों के साथ मिलकर यूएसडीटी (डिजिटल करेंसी) से जुड़े लेनदेन में मदद करने और इसके बदले कमीशन लेने का भी आरोप है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हैदराबाद निवासी मोहम्मद अशफाक हुसैन और अहमद नजीब उद्दीन के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, तीसरा आरोपी सचिन बेंगलुरु का रहने वाला है और फरार है।

हैदराबाद शहर के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं एसआईटी) एम. श्रीनिवासुलु ने रविवार को जारी एक बयान में मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 63 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्मचारी को 3 मार्च 2025 को अज्ञात लोगों के फोन आए थे। फोन करने वालों ने खुद को दिल्ली पुलिस, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का अधिकारी बताया था।

आरोपियों ने पीड़ित पर 6.8 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में शामिल होने का झूठा आरोप लगाया और गिरफ्तारी की धमकी दी। अपने दावों को सही साबित करने के लिए उन्होंने पीड़ित को फर्जी सरकारी दस्तावेज भी भेजे। उन्होंने दावा किया कि कथित अपराध में पीड़ित के आधार संबंधी विवरण और फिंगरप्रिंट का दुरुपयोग किया गया है।

इसके बाद आरोपियों ने पीड़ित से उसकी निजी और बैंकिंग संबंधी जानकारी हासिल की। उन्होंने रकम वापस करने का आश्वासन देकर जांच और सत्यापन के नाम पर पीड़ित और उसकी बेटी को पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया।

ठगों ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए पीड़ित और उसकी बेटी को इस मामले में किसी से बात नहीं करने की हिदायत भी दी। साथ ही, दोनों को गिरफ्तारी की धमकी दी गई। आरोपियों की बातों पर भरोसा करके पीड़ित और उसकी बेटी ने कुल 29,17,668 रुपये ट्रांसफर कर दिए।

रकम वापस नहीं मिलने पर पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ और उसने पुलिस से शिकायत की। शिकायत के आधार पर पुलिस ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(सी) और 66(डी) तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 111(2)(बी), 318(4), 319(2), 336(3), 338 और 340(2) के तहत मामला दर्ज किया।

पुलिस के अनुसार, दोनों गिरफ्तार आरोपी आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे। इसी दौरान उनकी व्हाट्सऐप के जरिए सचिन से जान-पहचान हुई। सचिन ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी से हासिल रकम को कई बैंक खातों के जरिए स्थानांतरित करने की योजना बनाई, ताकि पैसों के लेनदेन का पता लगाना और जांच एजेंसियों के लिए धन के स्रोत तक पहुंचना मुश्किल हो जाए।

योजना के तहत अशफाक ने नजीब से बैंक खातों का विवरण जुटाया और उसे सचिन के साथ साझा किया। इसके बाद सचिन ने नजीब की ओर से उपलब्ध कराए गए बैंक खाते में ठगी की रकम ट्रांसफर की।

बाद में अशफाक और नजीब ने चेक के जरिए रकम निकाली और कैश डिपॉजिट मशीनों (सीडीएम) के माध्यम से नकदी को अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराया। पुलिस के मुताबिक, सचिन ने इन पैसों का इस्तेमाल यूएसडीटी क्रिप्टोकरेंसी खरीदने में किया और बाद में इसे ऑनलाइन बेचकर भारतीय रुपये हासिल किए।

Similar News