तमिलनाडु चुनाव में सीट बंटवारे पर राजग में खींचतान

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में सीट बंटवारे को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है और प्रमुख घटक अन्नाद्रमुक के नेतृत्व वाले राजग में भाजपा की 50 सीटों की मांग ने गठबंधन प्रमुख को मुश्किल में डाल दिया है

Update: 2026-01-16 23:50 GMT

भाजपा की 50 सीटों की मांग से अन्नाद्रमुक असमंजस में

  • शाह के रुख से बढ़ा गतिरोध सीट समझौता अब तक अधर में
  • पीएमके से बनी सहमति एएमएमके की संभावित वापसी पर नजर
  • 2021 में 20 सीटों पर उतरी भाजपा अब 50 सीटों की विशलिस्ट पेश

चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में सीट बंटवारे को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है और प्रमुख घटक अन्नाद्रमुक के नेतृत्व वाले राजग में भाजपा की 50 सीटों की मांग ने गठबंधन प्रमुख को मुश्किल में डाल दिया है, जिसके कारण अब तक सीट बंटवारे के समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है।

राजग में दोबारा शामिल होने के बाद अन्नाद्रमुक तमिलनाडु में गठबंधन का नेतृत्व कर रही है और पार्टी के महासचिव ईके पलानीस्वामी को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया गया है। पीएमके के डॉ. अंबुमणि रामदास गुट की वापसी के बावजूद, गठबंधन को मजबूत करने की कवायद जारी है।

पूर्व अन्नाद्रमुक मंत्री एस.पी. वेलुमणि ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनके हालिया तमिलनाडु दौरे के दौरान दो बार मुलाकात की, वहीं श्री पलानीस्वामी भी दिल्ली जाकर भाजपा के वरिष्ठ नेता से मिले, लेकिन इसके बावजूद गतिरोध बना हुआ है। बताया जा रहा है कि श्री शाह भाजपा की मांग पर अड़े हुए हैं।

सूत्रों के मुताबिक, सार्वजनिक रूप से नरम रुख दिखाने के बावजूद भाजपा 234 सदस्यीय विधानसभा में 50 सीटों की अपनी शुरुआती मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं है। इसमें अन्य सहयोगी दलों के लिए भी सीटें शामिल करने की बात कही जा रही है, साथ ही श्री टीटीवी दिनाकरण की अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (एएमएमके) की संभावित वापसी के लिए भी जगह छोड़े जाने की मांग है। यह स्थिति अन्नाद्रमुक के लिए असहज है, क्योंकि उसे मौजूदा और संभावित अन्य सहयोगियों की मांगों को भी समायोजित करना है। इसी वजह से श्री पलानीस्वामी असमंजस में हैं और भाजपा के साथ सीट बंटवारे को अंतिम रूप देने में देरी हो रही है।

अन्नाद्रमुक पिछले साल अप्रैल में उस समय राजग में फिर से शामिल हो गई थी, जब भाजपा ने तेजतर्रार श्री के. अन्नामलाई को राज्य इकाई के अध्यक्ष पद से हटाने की बात मान ली थी, लेकिन भाजपा के अपनी हैसियत से ज़्यादा ज़ोर दिखाने की वजह से श्री पलानीस्वामी को कदम पीछे खींचने पड़े हैं।

पीएमके के अंबुमणि रामदास गुट के साथ अन्नाद्रमुक का समझौता बेहद तेजी से हो गया। श्री पलानीस्वामी और अंबुमणि के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल के बीच करीब एक घंटे की बैठक के बाद गठबंधन पर सहमति की घोषणा कर दी गई, हालांकि अंबुमणि गुट को कितनी सीटें दी गईं, इसका खुलासा नहीं किया गया।

वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अन्नाद्रमुक के साथ गठबंधन में 20 सीटों पर चुनाव लड़ते हुए चार सीटें जीती थीं। अब पार्टी की 50 सीटों की 'विशलिस्ट' में सत्तारूढ़ डीएमके की 30 सीटें, अन्नाद्रमुक की 5, कांग्रेस की 6 और विदुथलाई चिरुथैगल कच्ची (वीसीके) और माकपा की एक-एक सीट शामिल बताई जा रही हैं।

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