तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के राज्यपालों पर स्टालिन ने साधा निशाना

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एवं द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन ने नए साल के पहले विधानसभा सत्र के दौरान अपने-अपने राज्य सरकारों द्वारा तैयार भाषण न पढ़ने के लिए तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के राज्यपालों पर तमकर निशाना साधा और कहा कि उनका रवैया स्पष्ट और जानबूझकर है

Update: 2026-01-23 04:47 GMT

चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एवं द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन ने नए साल के पहले विधानसभा सत्र के दौरान अपने-अपने राज्य सरकारों द्वारा तैयार भाषण न पढ़ने के लिए गुरुवार को तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के राज्यपालों पर तमकर निशाना साधा और कहा कि उनका रवैया स्पष्ट और जानबूझकर है।

श्री स्टालिन ने तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के राज्यपालों पर विधिवत तरीके से चुनी हुई सरकारों को कमजोर करने और पार्टी एजेंट की तरह काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने केरल और कर्नाटक के राज्यपालों द्वारा विधानसभा में राज्य सरकारों द्वारा तैयार किए गए अभिभाषण को पढ़ने से इनकार करने का जिक्र करते हुए कहा कि एकमात्र समाधान यह है कि राज्यपाल के अभिभाषण के साथ नए साल के पहले विधानसभा सत्र को शुरू करने की इस पुरानी और अप्रासंगिक प्रथा को समाप्त किया जाए।

श्री स्टालिन ने तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि द्वारा 20 जनवरी को विधानसभा सत्र के पहले दिन द्रमुक सरकार द्वारा तैयार किए गए अभिभाषण को देने से बचने और अपने अभिभाषण शुरू होने से पहले राष्ट्रगान न गाए जाने का हवाला देते हुए सदन से बाहर चले जाने के बाद अपने पहले के रुख को दोहराते हुए कहा कि द्रमुक देशभर में समान विचारधारा वाले विपक्षी दलों से परामर्श करेगी और इस पुरानी और अप्रासंगिक प्रथा को समाप्त करने के लिए अगले ही संसदीय सत्र में संवैधानिक संशोधन करेगी। उन्होंने कहा, "पहले तमिलनाडु फिर केरल अब कर्नाटक। यह रवैया जान-बूझकर अपनाया जा रहा है। राज्यपाल राज्य सरकारों द्वारा तैयार भाषण पढ़ने से इनकार कर रहे हैं और पार्टी एजेंट की तरह व्यवहार कर रहे हैं। विधिवत चुनी हुई राज्य सरकारों को कमजोर कर रहे हैं। जैसा कि मैंने पहले कहा था, अब एकमात्र समाधान पहले वार्षिक विधानसभा सत्र को राज्यपाल के अभिभाषण के साथ शुरू करने की प्रथा को समाप्त करना है।

उन्होंने जोर दिया कि द्रमुक पूरे देश में समान विचारधारा वाले विपक्षी दलों से परामर्श करेगी तथा इस पुरानी और अप्रासंगिक प्रथा को समाप्त करने के लिए अगले ही संसदीय सत्र में संवैधानिक संशोधन करेगी।"

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