सीएए के विरोध में मंसूर पार्क में धरना जारी

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में उत्तर प्रदेश में प्रयागराज के खुल्दाबाद क्षेत्र स्थित मंसूर अली पार्क में कल शाम से महिलाओं और पुरूषों का धरना प्रदर्शन जारी है

Update: 2020-01-14 00:19 GMT

प्रयागराज। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में उत्तर प्रदेश में प्रयागराज के खुल्दाबाद क्षेत्र स्थित मंसूर अली पार्क में कल शाम से महिलाओं और पुरूषों का धरना प्रदर्शन जारी है।

सीएए के विरोध में धरने के समर्थन में समाजवादी पार्टी की नेत्री और इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष ऋचा सिंह के साथ युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष जीतेन्द्र तिवारी समेत अनेक नेता और समाजिक कार्यकर्ता उपस्थित हैं। धरने पर करेली के कई मुहल्लों के अलावा बमरौली, पुरामुफ्ती, और सल्लाहपुर क्षेत्र के अलावा बाहर से भी हजारों की संख्या में लोग सीएए और एनआरसी के विरोध में धरना दे रहे हैं।

सोमवार को मुस्लिम महिलाओे ने हाथों में तख्ती लिए और तिरंगा झंडा लहराते हुए सीएए का विरोध करते हुए धरने पर बैठी रही। महिलाओं का कहना है कि मुल्क में अमन चैन के साथ सभी को रहने का अधिकार है। सीएए एक ऐसा कानून है जो आपस में दूसरों को लड़ाने का काम कर रहा है।

उन्होने कहा कि हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिशाल पेश करते रहे हैं। मुस्लिम के त्यौहारों में हिन्दू और हिन्दू के त्यौहारों पर मुस्लिम भाई पूरा सहयोग करते हैं महिलायें संविधान रचयिता भीम राव अंबेडकर की तस्वीर भी हाथ में लिए हैं। “लेकर रहेंगे आजादी, हमें आजादी चाहिए, हमें शाति से रहने दो” जैसे नारे लगा रहे हैं।

धरने पर बैठी महिलाओं ने कहा कि अगर इसी तरह भाई चारा कायम रहा तो देश बरकरार रहेगा लेकिन केन्द्र सरकार सीएए ओर एनआरसी जैसे कानून पास कर केवल मुस्लिम समुदाय को ही निशाना बना रहा है जहसका हम पुरजोर विरोध करते हैं और देश में इस कालू कानून को नहीं आने देंगे। हम अपनी आवाज बुलन्द कर सोई सरकार को जगा देंगें। मौके पर कई थानों की फोर्स और पीएसी बल तैनात है।

धरने का समर्थन ऋचा सिंह, नेहा यादव खुशनुमा बानो समेत कई शोसल एक्टीविस्ट कर रही है। धरना कल शाम से शुरू हुआ है जो निरंतर अभी तक चल रहा है। इसके अलावा युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष जितेन्द्र तिवारी और पदाधिकारी उपस्थित हैं। खुल्दाबाद पुलिस का कहना है धरने पर अभी भी लोग बैठे हैं। उन्हे समझाने का प्रयास किया गया लेकिन धरना समाप्त करने को तैयार नहीं है।
 

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