सख्त कानून से सडक़ हादसों में आएगी कमी
नई दिल्ली ! देश में सडक़ हादसों से मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है और 2015 के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान 1.46 लाख लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।;
नई दिल्ली ! देश में सडक़ हादसों से मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है और 2015 के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान 1.46 लाख लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। चूंकि भारत ने 2020 तक सडक़ दुर्घटनाओं और इससे होने वाली मौतों में 50 प्रतिशत की कमी करने के लिए प्रतिबद्धता जताई है इसलिए सडक़ों को सुरक्षित बनाने के लिए काम करने वाली जिनेवा की संस्था इंटरनेशल रोड फेडरेशन (आईआरएफ) ने विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों से अपील की है।
कि वो संसद के आगामी सत्र में मोटर वाहन कानून (एमवीए) में बहुप्रतीक्षित संशोधनों को मंजूरी दें। इंटरनेशल रोड फेडरेशन के चेयरमैन केके कपिला ने कहा, भारत ने 2020 तक सडक़ हादसे और इसमें होने वाली मौतों में 50 प्रतिशत तक कमी के संयुक्त राष्ट्र संघ के दशकीय कार्य योजना पर हस्ताक्षर किए हैं। लेकिन भारत सडक़ों पर घट रही सुरक्षा के संदर्भ में गंभीर समस्याओं का सामना कर रहा है। मुकुल रॉय की अध्यक्षता वाली परिवहन पर संसदीय समिति ने अपनी सिफारिशें दे दी हैं और उन्हें संसद में पेश किया जा चुका है। आईआरएफ केंद्र सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों से आग्रह करता है कि वो 9 मार्च से शुरू हो रहे संसद के सत्र में बहुप्रतीक्षित सडक़ सुरक्षा अधिनियम को मंजूरी दे दें। उन्होंने सडक़ हादसों में लगने वाली चोटों और मौतों को कम करने में नए एमवीए को पास किए जाएं क्योंकि यदि नया कानून लागू हो जाता है तो यातायात नियम तोडऩे पर 10 गुना ज्यादा जुर्माना भरना पड़ेगा। तेज रफ्तार ड्राइविंग, शराब पीकर गाड़ी चलाना, गाड़ी चलाते समय फोन पर बातचीत, रेड लाइट तोडऩे पर भारी जुर्माने और नाबालिगों के गाड़ी चलाने पर जेल जैसी संसदीय समिति की सिफारिश पर सख्त कानून से ही हादसों को रोका जा सकेगा।