सीएम मान की पत्नी पर लगे आरोपों को लेकर शिअद का हमला, चीमा ने उठाए सवाल

चंडीगढ़, 5 सितंबर (आईएएनएस)। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के वरिष्ठ नेता दलजीत सिंह चीमा ने सीएम भगवंत मान की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर मान पर लगे भ्रष्टाचार और दुष्‍कर्म के आरोपी को बचाने के आरोपों पर निशाना साधा।;

Update: 2026-09-05 17:20 GMT

चंडीगढ़। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के वरिष्ठ नेता दलजीत सिंह चीमा ने सीएम भगवंत मान की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर मान पर लगे भ्रष्टाचार और दुष्‍कर्म के आरोपी को बचाने के आरोपों पर निशाना साधा।

शिरोमणि अकाली दल के नेता दलजीत सिंह चीमा ने कहा, "मुख्यमंत्री के घर पर जो घटना हुई और मुख्यमंत्री की पत्नी पर जो आरोप लगे हैं, वे बहुत गंभीर हैं। अगर एक महिला होने के नाते आप पर दुष्‍कर्म के आरोपी को बचाने के लिए 5 करोड़ रुपए की डील करने का आरोप लगता है तो बताइए, पंजाब की महिलाएं कैसे सुरक्षित महसूस कर सकती हैं।"

उन्‍होंने कहा कि सामान्‍य तौर पर महिलाओं का मनाना है कि अगर और कोई नहीं सुनता तो उच्‍च अधिकारी की पत्‍नी के पास मदद के लिए चली जाती हैं, लेकिन यहां पर उलटा हो रहा है। इतना सब होने के बाद भी सीएम इस मामले को सीबीआई को सौंपने की हिम्‍मत नहीं जुटा पा रहे हैं। आपके (प्रभार) और रिश्‍तेदारों पर आरोप लग रहे हैं। ऐसे में आप क्‍लीनचिट कैसे दे दोगे।

उन्‍होंने कहा कि आपको चाहिए था कि आपने अपने ओहदे की मर्यादा रखते और कहते कि जबतक क्‍लीनचिट नहीं मिल जाती, मैं मुख्‍यमंत्री के पद पर नहीं रहूंगा। इस मामले में भगवंत मान, अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया चुप्‍पी साध रखे हैं। इन लोगों की जमीर जागनी चाहिए। वे इंडिया गेट पर आंदोलन कर बड़ी बातें करते थे।

उन्‍होंने कहा कि मुख्‍यमंत्री कार्यालय भ्रष्‍टाचार का अड्डा बन गया है। ईडी ने सीएम के ओएसडी पर एफआईआर दर्ज करने के लिए तीन बार पत्र लिखा है।

दलजीत सिंह चीमा कहते हैं, "अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में पंजाब में अंग्रेजों की एक नई ईस्ट इंडिया कंपनी आ गई है। अब यह लोगों को आपस में बांटने का काम कर रही है। कुछ कर्मचारियों को 60 प्रतिशत देने और दूसरों को नौकरी से निकालने की योजना बनाई जा रही है, साथ ही कुछ कर्मचारियों को सस्पेंड करने की भी योजना है। उन्हें आपस में ही लड़ाया जाएगा।"

उन्‍होंने कहा कि कोर्ट के डबल बेंच का फैसला है कि डीए 15 दिनों में मिलना चाहिए, जबकि ऐसा नहीं किया जा रहा है। इससे कोर्ट की अवमानना हो रही है। हाई कोर्ट के फैसले को बदलने का हक इनको किसने दिया।

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