टी-20 विश्व कप न खेलने से कगाल हो सकता है बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड, अंतरराष्ट्रीय मंच से होगा अलग-थलग

भारत में आयोजित होने वाले आईसीसी टी-20 विश्व कप से बाहर रहने का बांग्लादेश की कार्यवाहक सरकार का फैसला अब देश के क्रिकेट भविष्य पर भारी पड़ता नजर आ रहा है। जहां सरकार इस निर्णय को सुरक्षा और क्षेत्रीय हालात से जोड़कर सही ठहरा रही है, वहीं बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) की हालत अंदरखाने बेहद नाजुक हो चुकी है।

Update: 2026-01-23 21:28 GMT
ढाका/नई दिल्ली। भारत में आयोजित होने वाले आईसीसी टी-20 विश्व कप से बाहर रहने का बांग्लादेश की कार्यवाहक सरकार का फैसला अब देश के क्रिकेट भविष्य पर भारी पड़ता नजर आ रहा है। जहां सरकार इस निर्णय को सुरक्षा और क्षेत्रीय हालात से जोड़कर सही ठहरा रही है, वहीं बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) की हालत अंदरखाने बेहद नाजुक हो चुकी है। बोर्ड अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के सामने लगभग गिड़गिड़ाने की स्थिति में है और किसी तरह इस फैसले से होने वाले नुकसान को कम कराने की कोशिश कर रहा है। बीसीबी का मानना है कि यदि हालात नहीं बदले तो यह फैसला न केवल बोर्ड को आर्थिक रूप से कंगाल कर सकता है, बल्कि बांग्लादेश क्रिकेट को अंतरराष्ट्रीय मंच से लगभग अलग-थलग भी कर सकता है।

सरकार बनाम क्रिकेट बोर्ड

बांग्लादेश सरकार जहां इस फैसले को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ से जोड़कर सही ठहरा रही है, वहीं क्रिकेट बोर्ड इससे सहमत नहीं है। बीसीबी ने आईसीसी को साफ संदेश दिया है कि खिलाड़ी, कोचिंग स्टाफ और बोर्ड सभी भारत में टी-20 विश्व कप खेलना चाहते थे, लेकिन सरकार की अनुमति के बिना यह संभव नहीं हो सका। बीसीबी ने आईसीसी से आग्रह किया कि उसके मैच किसी तटस्थ स्थल विशेष रूप से श्रीलंका में कराए जाएं, ताकि टीम टूर्नामेंट से बाहर न हो। हालांकि आईसीसी ने इस मांग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

प्रतिबंध तक की चेतावनी

आईसीसी सूत्रों के अनुसार, बांग्लादेश का अंतिम समय पर टूर्नामेंट से हटना एक गंभीर मामला है। सूत्र ने बताया, “हम सभी पहलुओं पर विचार कर रहे हैं। इसमें बीसीबी पर प्रतिबंध लगाने का विकल्प भी शामिल है।” यदि ऐसा होता है, तो इसके दूरगामी परिणाम होंगे। बांग्लादेश में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पूरी तरह बंद हो सकता है। कोई भी विदेशी टीम वहां खेलने नहीं जाएगी। बांग्लादेशी टीम किसी भी देश में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं खेल पाएगी

खिलाड़ियों की आईसीसी रैंकिंग पर गंभीर असर पड़ेगा। आईसीसी से मान्यता प्राप्त किसी भी लीग में बांग्लादेशी खिलाड़ी भाग नहीं ले पाएंगे। इसका सीधा असर खिलाड़ियों की कमाई और करियर पर पड़ेगा, जिससे बीसीबी के खिलाफ खिलाड़ियों के विद्रोह की स्थिति भी बन सकती है।

आईपीएल से मुस्तफिजुर बाहर, यहीं से बिगड़े रिश्ते

भारत और बांग्लादेश के क्रिकेट संबंधों में तनाव की शुरुआत उस वक्त हुई, जब अनुभवी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) से बाहर कर दिया गया। यह फैसला भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने पड़ोसी देशों के अस्थिर हालात और सुरक्षा इनपुट्स को ध्यान में रखकर लिया था। इसके बाद से ही दोनों देशों के क्रिकेट संबंधों को लेकर माहौल गर्म होता चला गया। इसी पृष्ठभूमि में बीसीबी ने भारत में होने वाले टी-20 विश्व कप में हिस्सा न लेने का रुख अपनाया।

स्थल बदलने की मांग और आईसीसी का इनकार

बीसीबी ने औपचारिक रूप से आईसीसी से अनुरोध किया कि बांग्लादेश के मुकाबले श्रीलंका में कराए जाएं। बोर्ड का तर्क था कि इससे सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी दूर हो जाएंगी और टूर्नामेंट की निरंतरता भी बनी रहेगी। हालांकि आईसीसी ने सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स और अन्य सभी पहलुओं की समीक्षा के बाद साफ कर दिया कि टूर्नामेंट के कार्यक्रम और स्थल में बदलाव संभव नहीं है। आईसीसी का मानना था कि अगर एक टीम के लिए विशेष व्यवस्था की जाती है, तो इससे टूर्नामेंट की निष्पक्षता और तटस्थता पर सवाल उठेंगे।

टूर्नामेंट से बाहर हुआ बांग्लादेश

आईसीसी के रुख के बावजूद बांग्लादेश सरकार अपने फैसले पर अड़ी रही। अंततः बांग्लादेश ने टी-20 विश्व कप से हटने का आधिकारिक निर्णय ले लिया। यह फैसला क्रिकेट के लिहाज से ऐतिहासिक और विवादास्पद दोनों माना जा रहा है।

सरकार की दलील: सुरक्षा पहले

बांग्लादेश सरकार के खेल सलाहकार नजरुल ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा, “टूर्नामेंट में नहीं खेलने से होने वाले आर्थिक नुकसान की तुलना हमें उस संभावित आपदा से करनी चाहिए, जिसमें खिलाड़ी, दर्शक और पत्रकार एक जोखिम भरे क्षेत्रीय राजनीतिक माहौल में फंस सकते हैं।” उन्होंने कहा कि विदेश में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और इसी आधार पर यह फैसला लिया गया।

आईसीसी का जवाब: निष्पक्षता से समझौता नहीं

वहीं आईसीसी सूत्रों ने साफ किया कि यदि बांग्लादेश की मांग मान ली जाती, तो इससे अन्य टीमों और प्रशंसकों के लिए गंभीर समस्याएं खड़ी हो जातीं। सूत्र के अनुसार, “इससे आईसीसी के संचालन की निष्पक्षता, तटस्थता और अखंडता को खतरा पैदा होता।”

बीसीबी के सामने आर्थिक संकट

बांग्लादेश के इस फैसले से बीसीबी को कई स्तरों पर भारी आर्थिक झटका लग सकता है।

1. आईसीसी रेवेन्यू डिस्ट्रीब्यूशन का खतरा

आईसीसी के 2024-2027 चक्र के रेवेन्यू मॉडल के तहत बीसीबी को हर साल लगभग 26.74 मिलियन डॉलर से 29 मिलियन डॉलर (करीब 2.45 से 2.65 अरब रुपये) मिलने का अनुमान था। यह राशि मुख्य रूप से विश्व कप जैसे टूर्नामेंट से होने वाली कमाई से आती है।
निलंबन की स्थिति में यह पूरा हिस्सा खतरे में पड़ सकता है।

2. ग्रुप स्टेज फीस का सीधा नुकसान

टी-20 विश्व कप में हिस्सा लेने मात्र से ही बांग्लादेश को लगभग पांच करोड़ रुपये की ग्रुप स्टेज फीस मिलनी थी। नॉकआउट चरण में पहुंचने पर यह रकम और बढ़ सकती थी।

3. आईसीसी सदस्यता पर संकट

आखिरी समय पर टूर्नामेंट से हटने के कारण बीसीबी की आईसीसी सदस्यता भी खतरे में पड़ सकती है। यदि निलंबन हुआ, तो बांग्लादेश को विश्व टेस्ट चैंपियनशिप से भी बाहर होना पड़ेगा।

ब्रांड वैल्यू और घरेलू क्रिकेट पर असर

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बांग्लादेश क्रिकेट की ब्रांड वैल्यू को गहरा झटका लग सकता है। इसका असर बांग्लादेश प्रीमियर लीग (बीपीएल) पर पड़ेगा

विदेशी खिलाड़ी लीग में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। ब्रॉडकास्टर और प्रायोजक पीछे हट सकते हैं। लीग के बंद होने तक की नौबत आ सकती है। यह बांग्लादेश के क्रिकेट प्रशंसकों के लिए भी बड़ा झटका होगा, क्योंकि देश में क्रिकेट तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और दर्शकों का जुड़ाव लगातार बढ़ा है।

खिलाड़ी बनाम बोर्ड की आशंका

यदि आईसीसी प्रतिबंध लगाता है और खिलाड़ियों की अंतरराष्ट्रीय कमाई बंद होती है, तो बीसीबी के खिलाफ खिलाड़ियों के असंतोष और बगावत की स्थिति बन सकती है। कई खिलाड़ी निजी लीगों और विदेशी करारों से मिलने वाली आय पर निर्भर हैं।

क्रिकेट से आगे राजनीति की छाया

कुल मिलाकर बांग्लादेश का यह फैसला सिर्फ एक खेल आयोजन से बाहर रहने तक सीमित नहीं है। यह राजनीति, कूटनीति और खेल प्रशासन के टकराव का उदाहरण बन गया है। आने वाले दिनों में आईसीसी का रुख यह तय करेगा कि बांग्लादेश क्रिकेट इस संकट से उबर पाता है या फिर लंबे समय के लिए हाशिये पर चला जाता है।

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