नई दिल्ली/दुबई। भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में अगले महीने से शुरू होने वाले आईसीसी टी-20 विश्व कप से बांग्लादेश को बाहर कर दिया गया है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) को दी गई समय-सीमा समाप्त होने के बाद यह अहम फैसला लिया। बांग्लादेश की जगह अब स्कॉटलैंड को टूर्नामेंट में शामिल किया गया है। इस फैसले के बाद पाकिस्तान ने भी टी-20 विश्व कप से हटने की धमकी दी है।
आईसीसी ने अपने फैसले को सही ठहराते हुए साफ कहा है कि वैश्विक क्रिकेट आयोजनों में किसी भी तरह का राजनीतिक दबाव या बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जा सकता। इस फैसले के तुरंत बाद टूर्नामेंट में एक और बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, क्योंकि पाकिस्तान ने भी टी-20 विश्व कप से हटने की धमकी दे दी है।
आईसीसी का सख्त रुख
सूत्रों के अनुसार, बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने सुरक्षा और राजनीतिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए अपने मैच श्रीलंका में कराने की मांग की थी। हालांकि, आईसीसी के समक्ष जब यह प्रस्ताव रखा गया तो 14 सदस्य देशों ने इसके खिलाफ मतदान किया। केवल पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ही बांग्लादेश के समर्थन में खड़ा नजर आया। आईसीसी ने बीसीबी को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और तय शर्तों को मानने के लिए एक निश्चित समय-सीमा दी थी। डेडलाइन समाप्त होने के बाद भी बांग्लादेश की ओर से संतोषजनक जवाब न मिलने पर आईसीसी ने कड़ा कदम उठाते हुए उसे टूर्नामेंट से बाहर कर दिया और स्कॉटलैंड को शामिल करने का फैसला किया। आईसीसी ने बयान में कहा कि विश्व कप जैसे बड़े आयोजनों की योजना लंबे समय से तय होती है और इसमें किसी भी प्रकार का राजनीतिक या दबाव आधारित हस्तक्षेप प्रतियोगिता की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाता है।
स्कॉटलैंड को मिला मौका
बांग्लादेश के बाहर होने के बाद स्कॉटलैंड को टी-20 विश्व कप में खेलने का मौका मिला है। स्कॉटलैंड की टीम हाल के वर्षों में सीमित ओवरों के क्रिकेट में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही है और उसने क्वालिफाइंग टूर्नामेंटों में भी मजबूत दावेदारी पेश की थी। आईसीसी के इस फैसले के बाद स्कॉटलैंड क्रिकेट बोर्ड ने इसे खिलाड़ियों की मेहनत और निरंतरता का फल बताया है।
बीसीबी की प्रतिक्रिया
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए बीसीबी ने कहा कि वह आईसीसी बोर्ड के अंतिम फैसले का सम्मान करता है, भले ही उसकी मांगों को नहीं माना गया। आईसीसी की ओर से बांग्लादेश के मैच किसी अन्य देश में शिफ्ट करने या ग्रुप बदलने से इनकार के बाद बोर्ड के पास इस फैसले को स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। बीसीबी मीडिया कमेटी के चेयरमैन अमजद हुसैन ने कहा कि इस स्थिति तक पहुंचने से पहले बोर्ड ने हर संभव कोशिश की. उन्होंने कहा, 'हमने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की।हम आईसीसी बोर्ड का पूरा सम्मान करते हैं। बोर्ड की बहुमत राय यह थी कि मैच को कहीं और शिफ्ट नहीं किया जा सकता। इसके बाद भी हमने अपने स्तर पर अनुरोध किए लेकिन जब वे इसे करने को तैयार नहीं हैं, तो हमारे पास और कुछ करने को नहीं बचता।
पाक की तीखी प्रतिक्रिया
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष मोहसिन नकवी ने शनिवार को बड़ा बयान देते हुए कहा कि टी-20 विश्व कप में पाकिस्तान की भागीदारी पर अंतिम फैसला देश की सरकार करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के समक्ष रखा जाएगा। नकवी ने कहा, “हम टी-20 विश्व कप खेलेंगे या नहीं, इसका फैसला पाकिस्तान सरकार करेगी। हमारे प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इस समय देश से बाहर हैं। उनकी वापसी के बाद उनसे सलाह ली जाएगी और सरकार का निर्णय अंतिम और बाध्यकारी होगा।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर सरकार ने पाकिस्तान को टूर्नामेंट में हिस्सा न लेने का निर्देश दिया, तो आईसीसी किसी अन्य टीम को आमंत्रित करने के लिए स्वतंत्र होगी।
हाइब्रिड मॉडल और पाकिस्तान के मुकाबले
गौरतलब है कि हाइब्रिड मॉडल के तहत पाकिस्तान को टी-20 विश्व कप में अपने सभी मुकाबले श्रीलंका में खेलने हैं। यह व्यवस्था भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के बीच हुए पूर्व समझौते के तहत तय की गई थी। पाकिस्तान पहले ही सुरक्षा और राजनीतिक कारणों से भारत में खेलने से इनकार करता रहा है, जिसके चलते आईसीसी टूर्नामेंटों में हाइब्रिड मॉडल अपनाया जाता रहा है। ऐसे में बांग्लादेश का यह तर्क था कि यदि पाकिस्तान अपने मैच श्रीलंका में खेल सकता है, तो उसे भी यही सुविधा मिलनी चाहिए। हालांकि आईसीसी और अधिकांश सदस्य देशों ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
बांग्लादेश के साथ ‘अनुचित व्यवहार’ का आरोप
पीसीबी अध्यक्ष मोहसिन नकवी ने आईसीसी पर बांग्लादेश के साथ अनुचित व्यवहार करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “आईसीसी ने इस पूरे मामले में बांग्लादेश के साथ सही रवैया नहीं अपनाया। हमारी नीति और रुख बिल्कुल स्पष्ट है। हम आईसीसी के अधीन नहीं हैं, बल्कि अपनी सरकार के प्रति जवाबदेह हैं।” नकवी ने दोहराया कि प्रधानमंत्री की वापसी के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा और पीसीबी सरकार के निर्देशों का पूरी तरह पालन करेगा।
क्रिकेट से आगे बढ़ता विवाद
टी-20 विश्व कप से बांग्लादेश के बाहर होने और पाकिस्तान की संभावित अनुपस्थिति की चेतावनी ने टूर्नामेंट से पहले ही माहौल को गर्मा दिया है। यह विवाद केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें कूटनीति, राजनीति और क्षेत्रीय समीकरण भी शामिल हो गए हैं। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पाकिस्तान भी विश्व कप से हटता है, तो इससे न केवल टूर्नामेंट की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित होगी, बल्कि प्रसारण अधिकारों और व्यावसायिक हितों पर भी असर पड़ेगा।
आईसीसी के सामने नई चुनौती
आईसीसी के लिए यह स्थिति बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। एक तरफ वह अपने नियमों और निष्पक्षता पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर सदस्य देशों के राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी मुद्दे लगातार सिर उठा रहे हैं। बांग्लादेश को बाहर करने के फैसले से आईसीसी ने यह संकेत दिया है कि वह किसी भी दबाव में नियमों से समझौता नहीं करेगी। अब सबकी नजरें पाकिस्तान सरकार के फैसले पर टिकी हैं। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की वापसी के बाद होने वाला निर्णय तय करेगा कि टी-20 विश्व कप में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा या नहीं।