सॉफ्ट टेनिस-एमएमए में मेडल

नई दिल्ली, एशियन गेम्स 2026 में भारत का प्रदर्शन शानदार रहा। देश ने कुल 21 गोल्ड समेत 85 मेडल अपने नाम किए। हालांकि, यह एशियन गेम्स भारत के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुआ। आइए आपको बताते हैं किन 5 वजहों से भारत के लिए यादगार रहा यह टूर्नामेंट।;

By :  IANS
Update: 2026-10-05 12:07 GMT

नई दिल्ली, एशियन गेम्स 2026 में भारत का प्रदर्शन शानदार रहा। देश ने कुल 21 गोल्ड समेत 85 मेडल अपने नाम किए। हालांकि, यह एशियन गेम्स भारत के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुआ। आइए आपको बताते हैं किन 5 वजहों से भारत के लिए यादगार रहा यह टूर्नामेंट।

महिला हॉकी में खत्म हुआ 44 साल का सूखा: एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला हॉकी टीम ने 44 साल का सूखा खत्म करते हुए देश की झोली में गोल्ड मेडल डाला। सलीमा टेटे की कप्तानी में भारतीय टीम का प्रदर्शन पूरे टूर्नामेंट में शानदार रहा। फाइनल में भारत ने चीन को कड़े मुकाबले में 1-0 से हराते हुए 1982 के बाद पहली बार गोल्ड मेडल जीता।

सुचिका तारियाल ने दिलाया एमएमए में मेडल: मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में भारत को एशियन गेम्स के इतिहास का अपना पहला मेडल मिला। सुचिका तारियाल ने महिलाओं के 60 किलोग्राम वर्ग में दमदार प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज मेडल जीता। हालांकि, वह अपना सेमीफाइनल मुकाबला हार गईं, जिसके चलते भारत इस खेल में गोल्ड या सिल्वर लाने से चूक गया।

सॉफ्ट टेनिस में पहला मेडल: सॉफ्ट टेनिस उन खेलों में शामिल था, जिन्हें एशियन गेम्स में पहली बार शामिल किया गया था। भारत की ओर से इस खेल में जय मीणा ने पुरुष कैटेगरी में बेहतरीन प्रदर्श करते हुए देश को पहला मेडल दिलाया। जय ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम करने में सफल रहे। इसके साथ ही रोइंग में भी सतनाम सिंह और सलमान खान की जोड़ी ने डबल स्कल्स में भारत को पहला मेडल दिलाया।

अनाहत-बरनिका इलांगोवन ने रचा इतिहास:एशियन गेम्स 2026 में अनाहत सिंह स्क्वैश के सिंगल्स के फाइनल तक पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं। वह गोल्ड लाने से तो चूक गईं, लेकिन उन्होंने सिल्वर जीतकर भी इतिहास रचा। वहीं, पोल वॉल्ट में बरनिका इलांगोवन ने एशियन गेम्स में भारत को पहला मेडल दिलाया। वह ब्रॉन्ज जीतने में सफल रहीं।

मीराबाई चानू का खत्म हुआ इंतजार: भारत की महिला वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने 28 साल का सूखा खत्म करते हुए एशियन गेम्स के इतिहास में पहली बार मेडल जीता। वह सिल्वर मेडल अपने नाम करने में सफल रहीं। वहीं, सावन बरवाल ने मैराथन में 1982 के बाद भारत को पहला मेडल दिलाया। सावन सिल्वर मेडल जीतकर स्वदेश लौटे।

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