कप्तानी छोड़ने के बाद मुश्किल दौर से गुजरे विराट कोहली, इन दो खिलाड़ियों को दिया वापसी का श्रेय

विराट कोहली ने 2022 में भारतीय टेस्ट टीम की कप्तानी छोड़ी थी। उस समय उनका प्रदर्शन भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा था। खासकर टेस्ट क्रिकेट में उनका फॉर्म कमजोर पड़ गया था।;

Update: 2026-05-20 07:29 GMT

बेंगलुरु : भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली ने पहली बार खुलकर उस दौर के बारे में बात की है, जब कप्तानी छोड़ने के बाद वह मानसिक और भावनात्मक रूप से काफी दबाव में थे। कोहली ने स्वीकार किया कि भारतीय टीम की जिम्मेदारियों और लगातार बढ़ती अपेक्षाओं ने उन्हें अंदर से थका दिया था। उन्होंने कहा कि उस मुश्किल समय में पूर्व मुख्य कोच राहुल द्रविड़ और बल्लेबाजी कोच विक्रम राठौर ने उन्हें संभालने और फिर से क्रिकेट का आनंद लेने में बड़ी भूमिका निभाई। विराट कोहली ने यह बातें ‘आरसीबी इनोवेशन लैब इंडियन स्पोर्ट्स समिट’ के तीसरे सत्र के दौरान कहीं। उन्होंने बताया कि कप्तानी छोड़ने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि लंबे समय से वह लगातार मानसिक दबाव में खेल रहे थे।

कप्तानी छोड़ने के बाद आया कठिन दौर

विराट कोहली ने 2022 में भारतीय टेस्ट टीम की कप्तानी छोड़ी थी। उस समय उनका प्रदर्शन भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा था। खासकर टेस्ट क्रिकेट में उनका फॉर्म कमजोर पड़ गया था। साल 2022 में उन्होंने छह टेस्ट मैचों में केवल 265 रन बनाए थे। इस दौरान उनके बल्ले से सिर्फ एक अर्धशतक निकला और उनका औसत 26.5 रहा। यह आंकड़े उस खिलाड़ी के लिए चौंकाने वाले थे, जिसे आधुनिक क्रिकेट के सबसे बेहतरीन बल्लेबाजों में गिना जाता है। कोहली ने कहा कि उस समय वह केवल क्रिकेट ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी संघर्ष कर रहे थे। हालांकि मैदान पर रहते हुए उन्होंने कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि वह दबाव में हैं।

राहुल द्रविड़ और विक्रम राठौर ने संभाला

विराट ने अपने बयान में राहुल द्रविड़ और बल्लेबाजी कोच विक्रम राठौर की विशेष तारीफ की। उन्होंने कहा कि दोनों ने उनकी मानसिक स्थिति को समझा और बिना अतिरिक्त दबाव डाले उनका साथ दिया। कोहली ने कहा कि राहुल द्रविड़ टेस्ट क्रिकेट को बहुत गहराई से समझते हैं और उन्होंने उन्हें सही दिशा दिखाने में मदद की। वहीं विक्रम राठौर लंबे समय से उनके साथ काम कर रहे थे, इसलिए वह उनकी भावनाओं और मनःस्थिति को बेहतर तरीके से समझ पा रहे थे। उन्होंने कहा, “दोनों ने मानसिक रूप से मेरा बहुत ध्यान रखा। उन्होंने मुझे फिर से उस स्थिति में पहुंचने में मदद की, जहां मैं क्रिकेट का आनंद महसूस कर सकूं।”

जिम्मेदारियों का बढ़ता बोझ

कोहली ने माना कि कप्तानी के दौरान वह धीरे-धीरे अपनी आंतरिक ऊर्जा खोते जा रहे थे, लेकिन उस समय उन्हें इसका एहसास नहीं हो रहा था। उन्होंने कहा कि वह भारतीय क्रिकेट को लगातार ऊंचाई पर बनाए रखने के लिए पूरी तरह समर्पित थे। कप्तानी के साथ-साथ बल्लेबाजी की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर थी, जिससे मानसिक दबाव लगातार बढ़ता गया। कोहली ने कहा, “मैं टीम की बल्लेबाजी इकाई और कप्तानी दोनों का केंद्र बन गया था। मुझे तब महसूस नहीं हुआ कि यह जिम्मेदारी मेरे जीवन पर कितना असर डाल रही है।” उनके मुताबिक, कप्तानी छोड़ते समय तक वह पूरी तरह मानसिक और शारीरिक रूप से थक चुके थे।

“यह जिम्मेदारी मुझे भीतर तक खा गई थी”

विराट कोहली ने स्वीकार किया कि भारतीय टीम की कप्तानी बेहद चुनौतीपूर्ण अनुभव रही। उन्होंने कहा कि लगातार अपेक्षाओं और प्रदर्शन के दबाव ने उन्हें भीतर तक प्रभावित किया। उन्होंने कहा, “जब मैंने कप्तानी छोड़ी, तब तक मैं पूरी तरह थक चुका था। यह जिम्मेदारी मुझे भीतर तक खा गई थी। यह बहुत कठिन और थकाने वाला दौर था।” कोहली के इस बयान को कई क्रिकेट विशेषज्ञ खिलाड़ियों के मानसिक स्वास्थ्य से जोड़कर भी देख रहे हैं। आधुनिक क्रिकेट में लगातार क्रिकेट, यात्राएं और प्रदर्शन का दबाव खिलाड़ियों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

2023 में की दमदार वापसी

हालांकि कठिन दौर के बाद विराट कोहली ने शानदार वापसी भी की। राहुल द्रविड़ की कोचिंग में उन्होंने 2023 में टेस्ट क्रिकेट में बेहतरीन प्रदर्शन किया। उस साल उन्होंने आठ टेस्ट मैचों में 671 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से दो शतक और दो अर्धशतक निकले, जबकि उनका औसत 56 रहा। यह प्रदर्शन साफ संकेत था कि कोहली ने अपनी लय और आत्मविश्वास दोबारा हासिल कर लिया है।

फिर से क्रिकेट का आनंद लेने लगे विराट

कोहली ने कहा कि अब वह क्रिकेट को पहले की तुलना में ज्यादा सहजता और खुशी के साथ खेल पा रहे हैं। उनके मुताबिक, मानसिक संतुलन बनाए रखना किसी भी खिलाड़ी के लिए उतना ही जरूरी है जितना शारीरिक फिटनेस। विराट कोहली के इस खुलासे ने यह भी दिखाया कि दुनिया के सबसे बड़े खिलाड़ियों को भी कभी-कभी मानसिक संघर्षों का सामना करना पड़ता है। सही समर्थन और भरोसेमंद लोगों की मदद से वे मुश्किल दौर से बाहर निकल सकते हैं।

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