हार्दिक : एशियन गेम्स में हमारा लक्ष्य गोल्ड मेडल था
नागोया, एफआईएच वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में जगह नहीं बना पाने के बाद भारतीय पुरुष हॉकी टीम की काफी आलोचना हुई थी। हालांकि, टीम ने एशियन गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन कर जोरदार वापसी की। शनिवार को भारत ने अपने गोल्ड मेडल का सफलतापूर्वक बचाव किया और साथ ही लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 के लिए भी सीधा क्वालिफिकेशन हासिल कर लिया।;
नागोया, एफआईएच वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में जगह नहीं बना पाने के बाद भारतीय पुरुष हॉकी टीम की काफी आलोचना हुई थी। हालांकि, टीम ने एशियन गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन कर जोरदार वापसी की। शनिवार को भारत ने अपने गोल्ड मेडल का सफलतापूर्वक बचाव किया और साथ ही लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 के लिए भी सीधा क्वालिफिकेशन हासिल कर लिया।
यह पहली बार है जब भारत ने एशियन गेम्स में हॉकी का गोल्ड मेडल सफलतापूर्वक बरकरार रखा है। इसके साथ ही हरमनप्रीत सिंह इस कॉन्टिनेंटल इवेंट में टीम को दो गोल्ड मेडल दिलाने वाले पहले भारतीय कप्तान बन गए हैं। कुल मिलाकर, यह भारत का एशियन गेम्स में पुरुषों की हॉकी में पांचवां गोल्ड मेडल है – इससे पहले भारत 1966, 1998, 2014 और 2023 में भी चैंपियन रहा था।
अगस्त में हुए एफआईएच वर्ल्ड कप में भारतीय पुरुष टीम नीदरलैंड (1-3) और अर्जेंटीना (3-5) से हारने के बाद दूसरे चरण में पूल ई में सबसे नीचे रही और सेमीफाइनल में जगह नहीं बना पाई थी। इस वजह से उन्हें फैंस और जानकारों की तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा था।
हालांकि, एशियन गेम्स में ऐतिहासिक गोल्ड मेडल और लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 का टिकट हासिल करके हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी वाली टीम ने शानदार अंदाज में अपने आलोचकों को करार जवाब दिया। इस बारे में बात करते हुए मिडफील्डर हार्दिक सिंह ने कहा कि वर्ल्ड कप में टीम के प्रदर्शन के बाद फैंस काफी निराश थे, लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि उस समय खिलाड़ियों के मन में क्या चल रहा था। उन्होंने कहा, "खिलाड़ी फैंस से अधिक निराश थे।"
भारत के एशियन गेम्स गोल्ड मेडल बरकरार रखने के बाद हार्दिक ने 'आईएएनएस' से कहा, "वर्ल्ड कप के बाद फैंस और मीडिया निराश थे। हालांकि, आपको नहीं पता कि खिलाड़ियों के मन में क्या चल रहा होता है। मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से यह बहुत मुश्किल था क्योंकि हम जानते थे कि टोक्यो ओलंपिक में हम अंडरडॉग थे। पेरिस में हमने अच्छा प्रदर्शन किया है, और हमारा देश हमारे साथ था। वर्ल्ड कप में भी उम्मीदें थीं।"
हार्दिक ने फैंस से यह भी अपील की कि वे टीम का समर्थन सिर्फ एक टूर्नामेंट में न करें, बल्कि उनके पूरे सफर में उनका साथ दें। उन्होंने कहा, "मैं बस एक बात कहना चाहता हूं। अगर आप हमारा हौसला बढ़ाना चाहते हैं, तो सिर्फ वर्ल्ड कप के लिए ही न आएं। हमारी लीग के भी मैच होते हैं। आप वहां आकर हमें खेलते हुए देख सकते हैं। हमें पता है कि वर्ल्ड कप में हमारे प्रदर्शन से निराशा हुई थी। खिलाड़ियों से ज्यादा निराश कोई नहीं होता।"
बेल्जियम के फैंस का उदाहरण देते हुए मिडफील्डर ने याद दिलाया कि जब बेल्जियम हॉकी वर्ल्ड कप में सातवें स्थान पर रही थी, तो सोशल मीडिया पर उनके बारे में कोई नकारात्मक टिप्पणी नहीं की गई थी। उन्होंने कहा, "अगर आप बेल्जियम की टीम को देखें जब वे हारे थे, तो उनके सोशल मीडिया पर कोई नकारात्मक टिप्पणी नहीं थी। हम सचमुच सोच रहे थे, 'ये हैं असली फैंस', हम अभी जीते हैं, इसलिए हर कोई कहेगा कि यह उनका लक्ष्य था। मगर अगर हम हार जाते, तो वे कहते कि वे ऐसा नहीं कर पाए। अगर आप हमारा समर्थन करना चाहते हैं, तो कृपया आगे आएं और हमारी हॉकी यात्रा को फॉलो करें।"
गोल्ड मेडल जीतने के बाद अपनी भावनाएं साझा करते हुए हार्दिक ने बताया कि टीम पिछले पांच या छह दिनों से ठीक से सो नहीं पाई है। लक्ष्य गोल्ड मेडल जीतना था। जो हमने वर्ल्ड कप में नहीं किया, वह हमें यहां करना था। हमें पूरी दुनिया को अपनी हॉकी दिखानी थी। यही हमारा लक्ष्य था। और हमने वही किया।