मेसी और अर्जेंटीना टीम के केरल दौरे पर बड़ा खुलासा
तिरुवनंतपुरम, लियोनेल मेसी और अर्जेंटीना की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के 2025 में प्रस्तावित केरल दौरे को लेकर चल रहे विवाद के केंद्र में एक अनजान महिला सामने आई है।;
तिरुवनंतपुरम, लियोनेल मेसी और अर्जेंटीना की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के 2025 में प्रस्तावित केरल दौरे को लेकर चल रहे विवाद के केंद्र में एक अनजान महिला सामने आई है। आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, तत्कालीन खेल मंत्री वी. अब्दुरहीमान और अर्जेंटीना फुटबॉल एसोसिएशन (एएफए) के बीच हुए ईमेल संवाद में उसे कॉपी किया गया था।
मलप्पुरम की रहने वाली अमीरा आयशा बेगम को पूर्व खेल मंत्री का दोस्त माना जाता है। उन्हें कथित तौर पर मेसी के प्रस्तावित इवेंट से जुड़ी बातचीत की जानकारी दी गई थी।
अब्दुरहीमान द्वारा एएफए अधिकारियों और निजी स्पॉन्सर को भेजे गए ईमेल की कॉपी भी बेगम को मार्क की गई थीं, जिससे यह सवाल उठता है कि सरकार समर्थित प्रोजेक्ट से जुड़े आधिकारिक संवाद की जानकारी किसी निजी व्यक्ति को कैसे थी।
राज्य के खेल मंत्री ओ.जे. जनेश ने बुधवार को कहा कि मेल और ऐसी सभी चीजें रहस्य में डूबी हुई लगती हैं और यह साफ तौर पर एक विस्तृत जांच की मांग करती हैं।
यह खुलासा इसलिए अहम है क्योंकि खेल विभाग के सचिव की तैयार की गई एक रिपोर्ट में इस प्रोजेक्ट को हैंडल करने के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। घटना के समय राज्य के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन थे।
रिपोर्ट में बताया गया है कि एएफए के साथ सरकार का संवाद खेल विभाग के जरिए नहीं, बल्कि सीधे अब्दुर्रहीमान ने किया था।
नतीजों के मुताबिक, खेल विभाग के सचिव और निदेशक संवाद का हिस्सा नहीं थे। ईमेल ट्रेल में महिला के शामिल होने से इस बात पर सवाल उठे हैं कि बातचीत से जुड़ी जानकारी किस समानांतर चैनल से साझा की जा रही थी।
रिकॉर्ड से पता चलता है कि सरकार, एएफए अधिकारियों और निजी स्पॉन्सर से जुड़े संवाद में उन्हें कॉपी किया गया था। अब यह मामला मेसी प्रोजेक्ट से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की प्रस्तावित हाई-लेवल जांच के दायरे में आने की संभावना है।
खेल विभाग के सचिव की रिपोर्ट में कथित तौर पर संभावित उल्लंघनों की जांच करने की सिफारिश की गई है, जिसमें निजी पार्टियों को गलत वित्तीय फायदा पहुंचाने और फॉरेन-एक्सचेंज नियमों को तोड़ने की कोशिशें शामिल हैं।
रिपोर्ट इस दावे पर भी सवाल उठाती है कि एएफए केरल में एक मैत्री मैच कराने के लिए आधिकारिक तौर पर सहमत हो गया था। इसमें आरोप लगाया गया है कि केंद्र को यह आभास दिया गया कि एएफए ने इवेंट के लिए आधिकारिक सहमति दे दी है, जिसके बाद स्पॉन्सर को विदेश में 126 करोड़ रुपये भेजने का आदेश मिल गया।