यादव सिंह के बेटे सन्नी यादव को लेकर बैकफुट पर आया प्राधिकरण
ग्रेटर नोएडा ! करोड़ों रुपए के घोटाले में फंसे नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह के बेटे सन्नी यादव को मलाईदार पद देने को लेकर ग्रेटर;
ग्रेटर नोएडा ! करोड़ों रुपए के घोटाले में फंसे नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह के बेटे सन्नी यादव को मलाईदार पद देने को लेकर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण एक ही दिन में बैकफुट पर आ गया। पात्रता की शर्तों को ताक पर रख कर सन्नी यादव को सीनियर मैनेजर का प्रभार दिए जाने का मामला तूल पकडऩे पर गुरुवार को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने अपना निर्णय वापस ले लिया। प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी दीपक अग्रवाल ने सीनियर मैनेजर का प्रभार दिए जाने व पात्रता को लेकर जांच बैठा दी है।
बता दे कि 954 करोड़ रुपए के घोटाले में फंसे यादव सिंह के खिलाफ सीबीआई जांच चल रही है। उनका बेटा सन्नी यादव ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में परियोजना विभाग में प्रबंधक पद पर तैनात है। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर आचार संहिता लगने से एक दिन पहले ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने सन्नी यादव को सीनियर मैनेजर का प्रभार सौंप दिया था। साथ ही उसे डिविजन तीन का प्रभारी बना दिया है। सन्नी यादव को जो प्रभार दिया गया है उसकी पात्रता की शर्तों का वह पूरा नहीं करते हैं। गुरुवार को देशबन्धु ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में अभी चलता है यादव का रसूक शीर्षक से खबर प्रकाशित किया था। इसके बाद यह खबर इलेक्ट्रानिक्स मीडिया में भी चर्चा का मुद्दा बन गया है। भाजपा समेत कई पार्टियों ने इसे राजनीतिक मुद्दा बना लिया। इसके बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को सन्नी यादव को प्रभार दिए जाने का निर्णय वापस लेना पड़ा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी दीपक अग्रवाल ने बताया कि सन्नी यादव को सीनियर मैनेजर का प्रभार दिए जाने का निर्णय फिलहाल रद्द कर दिया गया है, पात्रता की शर्तों को लेकर जांच बैठा दी गई है इसकी जांच अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी विमल शर्मा को सौंप दी गई है।
सन्नी यादव की ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में तैनाती बसपा सरकार के दौरान असिस्टेंट मैनेजर के पद पर हुई थी। कुछ ही माह बाद उसे मैनेजर बना दिया गया था। यादव सिंह जब घोटोले में फंसे तो सन्नी यादव ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय आना बंद कर दिया था। सप्ताह में एक दिन कार्यालय आकर पूरे सप्ताह की उपस्थिति दर्ज करा देता है। उसके खिलाफ कोई भी अधिकारी कदम उठाने की हिम्मत नहीं जुटा पाता। सीबीआई जांच के बाद भी यादव सिंह का रसूल प्राधिकरण में बरकरार रहा।
बताया जाता है कि प्रदेश में आचार संहिता लगने से पहले सपा के एक बड़े नेता ने प्राधिकरण के अधिकारियों को फोनकर सन्नी यादव को सीनियर मैनेजर का प्रभार दिए जाने की सिफारिश की थी। सपा के बड़े नेता के प्रभाव में आकर प्राधिकरण अधिकारियों ने नियम को ताक पर रखकर सन्नी यादव को मलाईदार पद पर बैठा दिया।