सीजेआई के घर नृपेन्द्र मिश्रा के जाने पर कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने उठाया सवाल

 कांग्रेस ने उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों के संवाददाता सम्मेलन कर देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) दीपक मिश्रा की कामकाज की शैली को कठघरे में खड़ा किये जाने के एक दिन बाद प्रधानमंत्री

Update: 2018-01-13 15:33 GMT

नयी दिल्ली।  कांग्रेस ने उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों के संवाददाता सम्मेलन कर देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) दीपक मिश्रा की कामकाज की शैली को कठघरे में खड़ा किये जाने के एक दिन बाद प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव नृपेन्द्र मिश्रा के मुख्य न्यायाधीश से मिलने उनके घर जाने पर सवाल उठाया है।

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव के आज मुख्य न्यायाधीश के निवास स्थान- 5, कृष्ण मेनन मार्ग जाने के कुछ घंटे बाद ही कहा कि प्रधानमंत्री को देश के मुख्य न्यायाधीश के निवास पर अपना विशेष दूत भेजने का कारण बताना चाहिए।

उन्होंने ट्वीट किया ,“ प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव नृपेन्द्र मिश्रा मुख्य न्यायाधीश के निवास 5-कृष्णा मेनन मार्ग गये हैं। प्रधानमंत्री को अपने विशेष दूत को मुख्य न्यायाधीश के घर भेजने का कारण बताना चाहिए।” 

As PM’s Principal Secretary, Nripendra Misra visits CJI’s residence at 5, Krishna Menon Marg; PM must answer the reason for sending this special messenger to Chief Justice of India.

— Randeep S Surjewala (@rssurjewala) January 13, 2018


 

इससे पहले  मिश्रा ने कहा कि वह न्यायमूर्ति मिश्रा को नये साल की बधाई देने तथा नये निवास स्थान पर आने के लिए बधाई देने गये थे।
साथ ही उन्होंने कहा कि वह मुख्य न्यायाधीश से नहीं मिल सके, क्योंकि वह (मुख्य न्यायाधीश) पूजा कर रहे थे।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को ही सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ मामले के ट्रायल जज बी एच लोया की मौत के मामले की उच्चतम न्यायालय में उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की थी।

संवाददाता सम्मेलन में अपनी बात रखने वाले चारों न्यायाधीशों ने भी इस मुद्दे को मुख्य न्यायाधीश के साथ मतभेदों का एक प्रमुख कारण बताया था।

उधर भारतीय जनता पार्टी ने यह कहते हुए कांग्रेस की अालोचना की है कि विपक्ष इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा है। पार्टी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा है, “यह उच्चतम न्यायालय का आंतरिक मामला है और इस पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए।” 

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