राज्यसभा सांसदों ने केजरीवाल की अपील को नहीं दी तवज्जो

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने खेती ऑर्डिनेंस बिल का विरोध किया है।

Update: 2020-09-20 15:45 GMT

नई दिल्ली | दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने खेती ऑर्डिनेंस बिल का विरोध किया है। आम आदमी पार्टी भी संसद के अंदर खेती ऑर्डिनेंस बिल का विरोध किया। इसके साथ ही केजरीवाल ने सभी गैर भाजपा दलों से राज्यसभा के अंदर इस बिल के विरोध में मतदान करने की अपील की थी। हालांकि रविवार को राज्यसभा में यह बिल ध्वनि मत से पारित हो गया। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को कहा, आज पूरे देश के किसानों की नजर राज्य सभा पर है। राज्य सभा में भाजपा अल्पमत में है। मेरी सभी गैर भाजपा पार्टियों से अपील है कि सब मिलकर इन तीनों बिलों को हरायें, यही देश का किसान चाहता है। केजरीवाल की इस अपील को कई राजनीतिक दलों ने कोई खास तवज्जो नहीं दी।

केजरीवाल ने रविवार को कहा, केंद्र के तीनों विधेयक किसानों को बड़ी कंपनियों के हाथों शोषण के लिए छोड़ देंगे। मेरी सभी गैर भाजपा पार्टियों से बिनती है कि राज्यसभा में एकजुट होकर इन विधेयकों का विरोध करें, सुनिश्चित करें कि आपके सभी सांसद मौजूद हों और वॉकआउट का ड्रामा ना करें। पूरे देश के किसान आपको देख रहे हैं। मुख्यमंत्री की इस अपील के बावजूद खेती ऑर्डिनेंस बिल राज्यसभा में पास हो गया।

आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि यह कानून एग्रीकल्चर को प्राइवेट सेक्टर के हाथों में देने के लिए लाया गया है। जिससे गेंहू और धान की एमएसपी खत्म हो जाएगी।

खेती आर्डिनेंस बिल पर आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार के साथ-साथ पंजाब की अमरिंदर सरकार और अकाली दल पर सवाल खड़े किए हैं।

आम आदमी पार्टी सांसद भगवंत मान ने कहा, जब केंद्रीय कैबिनेट में बिल पेश किया गया तो हरसिमरत बादल द्वारा विरोध नहीं किया गया। पंजाब के मुख्यमंत्री भी इस बिल को लाने वाली कमिटी में शामिल थे। अकाली दल और कांग्रेस दोनों किसानों को गुमराह कर रहे हैं।

भगवंत मान ने कहा,यह बिल एग्रीकल्चर को प्राइवेट सेक्टर के हाथों में देने के लिए लाया गया है। जिससे गेंहू और धान की एमएसपी खत्म हो जाएगी। देश की जीडीपी इस बार माइनस 23.9 प्रतिशत गिरी है। सारे सेक्टर में बस खेती ही ऐसा सेक्टर है जो पॉजिटिव है, आप उसे भी बेच रहे हैं।

भगवंत मान ने कहा, किसानों की जिंदगी मुश्किल करने के लिए जो खेती आर्डिनेंस लाया गया है। वो बहुत ही निराशाजनक है। पंजाब में किसानों ने कई बार शिरोमणि अकाली दल को वोट दिया लेकिन जब किसानों के हितों की रक्षा की बात आई तो उनके हक में शिरोमणि दल ने 4 वोट नहीं डाले।

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