राजस्थान पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े साइबर फ्रॉड गिरोह का किया भंडाफोड़, धरे गए तीन आरोपी

डीडवाना-कुचामन जिला पुलिस और जिला स्पेशल टीम (डीएसटी) ने ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी की आड़ में चल रहे एक अंतर-राज्यीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है और बड़ी मात्रा में डिजिटल डिवाइस व बैंकिंग दस्तावेज बरामद किए हैं।;

Update: 2026-10-03 21:10 GMT

जयपुर। डीडवाना-कुचामन जिला पुलिस और जिला स्पेशल टीम (डीएसटी) ने ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी की आड़ में चल रहे एक अंतर-राज्यीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है और बड़ी मात्रा में डिजिटल डिवाइस व बैंकिंग दस्तावेज बरामद किए हैं।

पुलिस के अनुसार, इस गैंग ने किराए के बैंक अकाउंट और नकली सिम कार्ड का इस्तेमाल करके कथित तौर पर साइबर फ्रॉड के ट्रांजेंक्शन किए।

यह जॉइंट ऑपरेशन डीडवाना पुलिस और डीएसटी ने एसपी प्यारेलाल शिवरान के निर्देश पर और एएसपी हिमांशु शर्मा व सर्कल ऑफिसर उमेश गुप्ता की देखरेख में चलाया।

इस ऑपरेशन की अगुवाई डीडवाना पुलिस स्टेशन ऑफिसर मोहन सिंह और डीएसटी टीम ने की।

पुलिस ने बताया कि 30 सितंबर को उन्हें जानकारी मिली कि कोलिया गांव में श्याम जी मार्ग पर एक घर के पीछे बने कमरे से कथित तौर पर अवैध ऑनलाइन गेमिंग का काम चल रहा था।

इस जानकारी पर कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने उस जगह पर छापा मारा और सिंडिकेट के तीन कथित सदस्यों को गिरफ्तार किया। आरोपी की पहचान दिनेश जेवालिया (32), निवासी कोलिया; घनश्याम जेवालिया (22), निवासी कोलिया; और गिरधारी थालोड (26), निवासी चिंडालिया (मकराना पुलिस स्टेशन एरिया) के रूप में हुई है।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने 96,820 रुपए नकद, 51 एटीएम कार्ड, 19 मोबाइल फोन, चार लैपटॉप, 10 चेक बुक, 10 बैंक डायरी, एक इंटरनेट डोंगल और दो पेमेंट स्कैनर बरामद किए।

पुलिस ने एक डायरी भी जब्त की और बताया कि उसमें कथित ऑनलाइन फ्रॉड और बड़ी रकम से जुड़े सट्टेबाजी के ट्रांजेंक्शन की जानकारी थी।

पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर ग्रामीणों और अन्य लोगों को छोटे-मोटे पेमेंट का लालच देकर उनके बैंक अकाउंट इस्तेमाल के लिए लेते थे।

फिर इन अकाउंट्स का इस्तेमाल कथित तौर पर साइबर फ्रॉड से जुड़े पैसे लेने और ट्रांसफर करने के लिए 'म्यूल अकाउंट्स' के तौर पर किया जाता था।

पुलिस ने आगे बताया कि आरोपी कथित तौर पर ट्रांजेक्शन के लिए नकली सिम कार्ड और वाट्सऐप, टेलीग्राम व फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म के साथ-साथ नकली ऐप्स का इस्तेमाल करते थे।

जांचकर्ताओं को शक है कि पीड़ितों को ऑनलाइन गेमिंग के मौकों और ज्यादा मुनाफे का लालच दिया जाता था, जिसके बाद साइबर फ्रॉड से मिले पैसे को कथित तौर पर किराए के बैंक अकाउंट्स के जरिए घुमाया जाता था।

पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और तीनों आरोपियों से विस्तार से पूछताछ शुरू कर दी है।

जांचकर्ता जब्त किए गए मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंकिंग डॉक्यूमेंट्स और अकाउंट रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं ताकि कथित नेटवर्क के दायरे का पता लगाया जा सके और इसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा सके।

पुलिस ने कहा कि डिजिटल और फाइनेंशियल सबूतों की जांच और विश्लेषण से नकली बैंक अकाउंट बनाने और उन्हें चलाने, तथा साइबर फ्रॉड सिंडिकेट में कथित तौर पर शामिल बड़े नेटवर्क के बारे में और खुलासे हो सकते हैं।

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