पंजाब कांग्रेस की गुटबाजी खुलकर आई सामने, भूपेश बघेल की मौजूदगी में नेताओं के बीच मारपीट और कुर्सियां चलीं

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद उस समय शुरू हुआ जब प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग मंच से कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान चन्नी समर्थक नेताओं और कार्यकर्ताओं ने "चरणजीत सिंह चन्नी जिंदाबाद", "राजा वड़िंग मुर्दाबाद" और "भूपेश बघेल मुर्दाबाद" के नारे लगाने शुरू कर दिए।;

Update: 2026-08-02 09:27 GMT

चंडीगढ़/संगरूर/पटियाला: पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चली आ रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सार्वजनिक मंच तक पहुंच गई है। पार्टी नेताओं को एकजुट करने के उद्देश्य से प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल द्वारा आयोजित बैठकों के दौरान संगरूर और पटियाला में नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक मारपीट में बदल गई। दोनों स्थानों पर स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कार्यक्रम निर्धारित समय से पहले ही समाप्त करना पड़ा। घटना ने प्रदेश कांग्रेस में जारी गुटबाजी को एक बार फिर उजागर कर दिया है। पार्टी के भीतर प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थकों के बीच लंबे समय से मतभेद की चर्चा रही है, जो इस बैठक में खुलकर सामने आ गई।

नारेबाजी के बाद बढ़ा विवाद

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद उस समय शुरू हुआ जब प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग मंच से कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान चन्नी समर्थक नेताओं और कार्यकर्ताओं ने "चरणजीत सिंह चन्नी जिंदाबाद", "राजा वड़िंग मुर्दाबाद" और "भूपेश बघेल मुर्दाबाद" के नारे लगाने शुरू कर दिए। इसका विरोध वड़िंग समर्थकों ने किया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच पहले तीखी बहस हुई और फिर स्थिति हाथापाई तक पहुंच गई। देखते ही देखते दोनों गुटों के नेताओं ने एक-दूसरे पर कुर्सियां फेंकनी शुरू कर दीं। मंच पर मौजूद वरिष्ठ नेताओं ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन तनाव कम नहीं हुआ।

कार्यक्रम समय से पहले करना पड़ा समाप्त

लगातार बढ़ते हंगामे और अव्यवस्था के कारण संगरूर और पटियाला दोनों स्थानों पर पार्टी को अपना कार्यक्रम निर्धारित समय से पहले समाप्त करना पड़ा। पार्टी नेतृत्व के लिए यह घटनाक्रम इसलिए भी असहज रहा क्योंकि बैठक का उद्देश्य संगठन में एकता और अनुशासन का संदेश देना था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना ने पंजाब कांग्रेस के भीतर मौजूद मतभेदों को सार्वजनिक रूप से उजागर कर दिया है।

सोशल मीडिया पोस्ट से भी बढ़ी तल्खी

हाल के दिनों में चरणजीत सिंह चन्नी और उनके पुत्र रिदमजीत सिंह द्वारा सोशल मीडिया पर साझा की गई एक रील भी राजनीतिक चर्चा का विषय बनी रही। रील में एक संवाद था, जिसमें कहा गया था कि "कुछ लोग गलतफहमी में हैं कि हम जवाब नहीं देंगे। तैयारी थोड़ी बड़ी है, सब्र रखो, पल-पल का हिसाब लेंगे।" इस पर प्रतिक्रिया देते हुए राजा वड़िंग ने बिना नाम लिए कहा कि केवल सोशल मीडिया पर रील डालने से चुनाव नहीं जीते जाते। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास काम के आधार पर मिलता है, न कि इंटरनेट पर लोकप्रियता से। वड़िंग ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि सोशल मीडिया की लोकप्रियता ही चुनाव जिताने का आधार होती, तो दिवंगत गायक सिद्धू मूसेवाला चुनाव नहीं हारते, क्योंकि उनकी सोशल मीडिया पहुंच करोड़ों लोगों तक थी।

पुराने चुनावी प्रदर्शन पर भी तंज

राजा वड़िंग ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि उस कठिन दौर में उन्होंने पार्टी संगठन को मजबूत करने का प्रयास जारी रखा। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव हारने के बाद वह विदेश नहीं गए, बल्कि लगातार कार्यकर्ताओं के बीच रहकर पार्टी को मजबूत करने में जुटे रहे। उनकी इस टिप्पणी को राजनीतिक हलकों में चरणजीत सिंह चन्नी पर अप्रत्यक्ष निशाना माना जा रहा है, हालांकि चन्नी ने इस पर अलग से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी।

भूपेश बघेल ने लगाया साजिश का आरोप

घटना के बाद प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल और प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग ने दावा किया कि कांग्रेस के कार्यक्रम को बाधित करने के लिए बाहरी और शरारती तत्वों को भेजा गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके पीछे आम आदमी पार्टी (आप) की भूमिका हो सकती है। बघेल ने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और यदि पार्टी का कोई सदस्य अनुशासनहीनता में शामिल पाया गया तो उसके खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, आम आदमी पार्टी की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

मंच से कार्यकर्ताओं को दी चेतावनी

हंगामे के दौरान राजा वड़िंग लगातार कार्यकर्ताओं से शांति बनाए रखने की अपील करते रहे। उन्होंने मंच से कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी उनके लिए सम्माननीय नेता हैं और पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं का वह आदर करते हैं। इसके बावजूद नारेबाजी जारी रहने पर वड़िंग ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें ऐसी स्थिति पैदा करने के लिए मजबूर न किया जाए, जिससे किसी वरिष्ठ नेता के बारे में उन्हें कठोर टिप्पणी करनी पड़े।

जलालपुर के निलंबन पर नया विवाद

पटियाला की बैठक में राजा वड़िंग ने पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए घनौर के पूर्व विधायक मदन लाल जलालपुर को निलंबित करने की घोषणा की। इसके तुरंत बाद चरणजीत सिंह चन्नी और कांग्रेस नेता भारत भूषण आशु जलालपुर के आवास पहुंचे और इस कार्रवाई पर सवाल उठाए। चन्नी ने कहा कि जलालपुर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) तथा पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के सदस्य हैं। उनके अनुसार, पार्टी के संविधान के तहत किसी एआईसीसी या पीसीसी सदस्य अथवा पूर्व विधायक को सीधे निलंबित करने का अधिकार संबंधित अनुशासनात्मक समिति की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही प्रयोग किया जा सकता है। पंजाब कांग्रेस में ताजा घटनाक्रम ने यह संकेत दिया है कि संगठनात्मक एकजुटता की चुनौती अभी भी बरकरार है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व इस विवाद को किस तरह सुलझाता है, इस पर राजनीतिक हलकों की नजर बनी रहेगी।

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