पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी पर हाईकमान सख्त, बागी चन्नी के पोस्टर ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल

पंजाब कांग्रेस में संगठन मजबूत करने की कवायद, हाईकमान ने शुरू किया ग्राउंड रियलिटी चेक;

Update: 2026-07-29 10:08 GMT

चंडीगढ़:पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रही गुटबाजी को लेकर पार्टी हाईकमान अब निर्णायक रुख अपनाने की तैयारी में है। संगठन के भीतर लगातार बढ़ रही खींचतान और नेताओं के बीच मतभेदों को देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व ने पहले जमीनी हालात का आकलन करने का फैसला किया है। इसी उद्देश्य से पंजाब के प्रभारी भूपेश बघेल 30 जुलाई से 10 दिन के राज्य दौरे पर पहुंच रहे हैं। इस दौरे के दौरान वह ब्लॉक स्तर से लेकर जिला और प्रदेश स्तर तक संगठन के पदाधिकारियों तथा वरिष्ठ नेताओं से बातचीत कर वास्तविक स्थिति का फीडबैक जुटाएंगे।

नेताओं की राय जानेंगे बघेल 

भूपेश बघेल अपने दौरे के दौरान लगातार नौ दिनों तक अलग-अलग जिलों में बैठकों का सिलसिला चलाएंगे। इन बैठकों में जिला कार्यकारिणी, ब्लॉक कार्यकारिणी के पदाधिकारी, वर्ष 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ चुके कांग्रेस प्रत्याशी, मौजूदा विधायक और सांसद शामिल होंगे। कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि संगठन के हर स्तर से निष्पक्ष फीडबैक लिया जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पार्टी के भीतर असंतोष की असली वजह क्या है और किन नेताओं की भूमिका संगठन को प्रभावित कर रही है। बताया जा रहा है कि बैठकों में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से जुड़े मुद्दों और उनके गुट की गतिविधियों पर भी विस्तार से चर्चा होगी।

चन्नी के पोस्टर से बढ़ी सियासी चर्चा

भूपेश बघेल के दौरे से ठीक पहले पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की एक राजनीतिक गतिविधि ने पार्टी के भीतर नई चर्चा छेड़ दी है। चन्नी ने आम आदमी पार्टी सरकार में कथित फार्मेसी पेपर लीक मामले को लेकर आयोजित विरोध कार्यक्रम का पोस्टर जारी किया, लेकिन उसमें कांग्रेस का चुनाव चिह्न शामिल नहीं किया गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पोस्टर में कांग्रेस का प्रतीक चिन्ह न होना यह संकेत देता है कि चन्नी इस कार्यक्रम को अपनी व्यक्तिगत राजनीतिक पहचान के साथ आगे बढ़ाना चाहते हैं। वह विद्यार्थियों की ओर से बाबा फरीद यूनिवर्सिटी, फरीदकोट में आयोजित रोष धरने में भी व्यक्तिगत स्तर पर शामिल होने की तैयारी में हैं।

राहुल गांधी की प्रस्तावित रैलियों पर भी होगा मंथन

भूपेश बघेल के पंजाब दौरे का एक महत्वपूर्ण एजेंडा वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीति भी है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व पंजाब में राहुल गांधी की चार बड़ी जनसभाएं आयोजित करने की योजना पर विचार कर रहा है। बैठकों में संभावित रैली स्थलों, संगठन की तैयारियों और कार्यकर्ताओं की भागीदारी पर चर्चा की जाएगी। हालांकि पार्टी का मानना है कि बड़े राजनीतिक कार्यक्रमों से पहले संगठन के भीतर मौजूद गुटबाजी को समाप्त करना जरूरी है, ताकि राहुल गांधी के मंच पर कांग्रेस पूरी तरह एकजुट दिखाई दे।

राहुल गांधी से मुलाकात को लेकर चन्नी गुट की बढ़ी बेचैनी

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थक पिछले कुछ समय से राहुल गांधी से मुलाकात का समय मांग रहे हैं, लेकिन उन्हें अभी तक अनुमति नहीं मिली है। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी के कार्यालय की ओर से व्यस्त कार्यक्रम का हवाला देकर मुलाकात टाली जा रही है। सूत्रों का कहना है कि चन्नी गुट को उम्मीद है कि आगामी दिनों में उन्हें राहुल गांधी से मिलने का अवसर मिलेगा, जहां वे संगठन के भीतर चल रहे विवाद और अपना पक्ष सीधे नेतृत्व के सामने रख सकेंगे। हालांकि कांग्रेस की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

2027 चुनाव से पहले संगठन में एकजुटता पर जोर

कांग्रेस नेतृत्व का फोकस केवल गुटबाजी खत्म करने तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत बनाने पर भी है। बैठकों में कार्यकर्ताओं की राय, संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने, स्थानीय मुद्दों और चुनावी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। पार्टी का लक्ष्य कार्यकर्ताओं में नया उत्साह पैदा करना और उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सक्रिय करना है। कांग्रेस मानती है कि मजबूत संगठन और एकजुट नेतृत्व ही 2027 के चुनाव में पार्टी की स्थिति को बेहतर बना सकता है।

31 जुलाई से फतेहगढ़ साहिब से होगी दौरे की शुरुआत

भूपेश बघेल अपने पंजाब दौरे की औपचारिक शुरुआत 31 जुलाई को शहीदों की धरती फतेहगढ़ साहिब से करेंगे। इसके बाद वह विभिन्न जिलों का दौरा कर संगठन के नेताओं और कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद करेंगे। माना जा रहा है कि इस दौरे से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर कांग्रेस हाईकमान पंजाब इकाई में संगठनात्मक बदलाव और अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर आगे का फैसला कर सकता है।

Tags:    

Similar News