स्पीकर ओम बिरला बोले- पीएम के साथ हो सकती थी अप्रत्याशित घटना, मैंने आने से मना किया

प्रधानमंत्री मोदी 5 फरवरी की शाम 5 बजे लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब देने वाले थे। हालांकि, विपक्षी सांसदों विशेषकर महिला सांसदों के विरोध और नारेबाजी के चलते कार्यवाही स्थगित कर दी गई। इसके बाद गुरुवार को हंगामे के बीच धन्यवाद प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

Update: 2026-02-05 10:45 GMT
नई दिल्‍ली। संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में बुधवार को हुए हंगामे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्रपति अभिभाषण पर प्रस्तावित जवाब टाल दिया गया। गुरुवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि सदन में ऐसी परिस्थितियां बन गई थीं, जिनमें कोई “अप्रत्याशित घटना” हो सकती थी। इसी आशंका के चलते उन्होंने स्वयं प्रधानमंत्री से उस दिन सदन में न आने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री मोदी 5 फरवरी की शाम 5 बजे लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब देने वाले थे। हालांकि, विपक्षी सांसदों विशेषकर महिला सांसदों के विरोध और नारेबाजी के चलते कार्यवाही स्थगित कर दी गई। इसके बाद गुरुवार को हंगामे के बीच धन्यवाद प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। वर्ष 2004 के बाद यह पहला अवसर बताया जा रहा है जब यह प्रस्ताव प्रधानमंत्री के भाषण के बिना पारित हुआ।

स्पीकर का बयान: “सदन की गरिमा सर्वोपरि”

गुरुवार को सदन में वक्तव्य देते हुए स्पीकर ओम बिरला ने कहा, “बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय में जो हुआ, वह सदन के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ। जब प्रधानमंत्री को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जवाब देना था, उस समय कुछ सदस्य प्रधानमंत्री की सीट के पास पहुंच गए थे। ऐसी स्थिति में कोई अप्रत्याशित घटना हो सकती थी।” उन्होंने विपक्षी सांसदों से अपील करते हुए कहा कि पोस्टर और बैनर लेकर सदन में आने से कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकती। बिरला ने कहा, “जिस प्रकार महिला सदस्य प्रधानमंत्री की सीट तक पहुंचीं, उसे पूरे देश ने देखा। यह न तो सदन की गरिमा के अनुकूल था और न ही संसदीय परंपराओं के अनुरूप।” हंगामे के बीच स्पीकर ने लोकसभा की कार्यवाही शुक्रवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी।

बुधवार को क्या हुआ?

बुधवार शाम 5 बजे जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई, तब विपक्ष की महिला सांसदों ने सत्ताधारी दल के नेताओं की सीटों के समीप पहुंचकर विरोध दर्ज कराया। इनमें प्रधानमंत्री की सीट भी शामिल थी। महिला सांसदों के हाथों में बड़े बैनर थे, जिन पर “जो सही है, वो करो” जैसे संदेश लिखे थे। विपक्षी सांसद 8 सदस्यों के निलंबन के खिलाफ विरोध कर रहे थे, जिन्हें मंगलवार को हंगामे के बाद निलंबित किया गया था। स्थिति बिगड़ती देख स्पीकर ने कार्यवाही स्थगित कर दी। बाद में कुछ मंत्रियों के हस्तक्षेप के बाद सांसदों ने घेराव समाप्त किया।

 सुरक्षा को लेकर चिंता

कुछ सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि प्रधानमंत्री के संबोधन के दौरान अव्यवस्था की स्थिति और बढ़ सकती थी। इसी आशंका को देखते हुए कार्यवाही स्थगित करने का निर्णय लिया गया। स्पीकर ने अपने बयान में यह स्पष्ट किया कि उनका निर्णय सदन की सुरक्षा और गरिमा को ध्यान में रखकर लिया गया।

स्पीकर कार्यालय में भी हुई बहस

बुधवार को लोकसभा स्पीकर के कार्यालय में भी विपक्ष और सत्तापक्ष के सांसदों के बीच तीखी बहस हुई। सामने आए एक वीडियो में विपक्ष की कुछ महिला सांसद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से चर्चा करती नजर आईं। हालांकि, इस बैठक के बारे में आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई।

राहुल गांधी और नरवणे की किताब

इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस सांसद राहुल गांधी भी चर्चा में रहे। वे बुधवार को संसद परिसर में पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे की एक अप्रकाशित किताब की प्रति लेकर पहुंचे थे। राहुल गांधी ने कहा था कि यदि प्रधानमंत्री सदन में आते हैं तो वे उन्हें यह किताब सौंपेंगे। राहुल ने दावा किया कि पुस्तक में एक पृष्ठ पर उल्लेख है कि प्रधानमंत्री ने सेना प्रमुख से कहा था, “जो उचित समझो, वह करो।” उन्होंने सरकार से इस पुस्तक के अस्तित्व को लेकर सवाल उठाए और कहा कि यदि प्रधानमंत्री सदन में आएंगे तो वे व्यक्तिगत रूप से उन्हें यह पुस्तक देंगे। राहुल गांधी ने यह भी टिप्पणी की कि उन्हें संदेह है कि प्रधानमंत्री सदन में आने का साहस करेंगे या नहीं। हालांकि, प्रधानमंत्री का संबोधन स्थगित होने के कारण यह टकराव टल गया।

संसदीय परंपराओं पर बहस

धन्यवाद प्रस्ताव का प्रधानमंत्री के जवाब के बिना पारित होना संसदीय परंपराओं को लेकर नई बहस छेड़ गया है। आम तौर पर राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री का जवाब सरकार की नीतियों और विपक्ष के आरोपों का विस्तृत उत्तर होता है। इस बार हंगामे और स्थगन के कारण यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। संसदीय मामलों के जानकारों का कहना है कि ऐसी परिस्थितियां सदन की कार्यवाही पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं और लोकतांत्रिक विमर्श को प्रभावित करती हैं।

गरिमा और नियमों से समझौता नहीं


बजट सत्र के दौरान जारी गतिरोध को देखते हुए दोनों पक्षों पर जिम्मेदारी है कि वे संवाद के माध्यम से समाधान खोजें। स्पीकर ओम बिरला ने स्पष्ट संकेत दिया है कि सदन की गरिमा और नियमों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री सदन में अपना जवाब देंगे या राजनीतिक टकराव का यह दौर जारी रहेगा। फिलहाल, लोकसभा में हंगामे और टली हुई स्पीच ने संसद की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

Tags:    

Similar News