नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) में दिए भाषण को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने निशाना साधा है। खड़गे ने आरोप लगाया कि युवाओं, शिक्षा और उनके भविष्य से जुड़े मुद्दों पर संवाद का अवसर राजनीतिक भाषण में बदल गया। खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि प्रधानमंत्री को देश के युवाओं के सवालों का सामना करना चाहिए था। उन्होंने प्रधानमंत्री के भाषण में इस्तेमाल किए गए ‘नाराज फूफा’ और ‘दिमागी नक्सल’ जैसे शब्दों पर भी तंज कसा।
.@narendramodi जी कल दिल्ली विश्वविद्यालय के SRCC में गए। यह देश के युवाओं, शिक्षा और उनके भविष्य पर संवाद का अवसर था। लेकिन अफसोस, युवाओं के सवालों का सामना करने के बजाय भाषण फिर एक राजनीतिक प्रचार में बदल गया।
— Mallikarjun Kharge (@kharge) September 6, 2026
मोदी जी की Modus Operandi —
लोकतंत्र में सवालों को दबाने के लिए…
‘युवाओं के सवालों के बजाय राजनीतिक प्रचार’
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपनी पोस्ट में कहा कि SRCC में प्रधानमंत्री की मौजूदगी युवाओं और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा का अवसर थी, लेकिन उनके मुताबिक यह अवसर राजनीतिक प्रचार में बदल गया। खड़गे ने कहा कि राजनीतिक जुमले बदलते रहते हैं, लेकिन उनकी नजर में केंद्र सरकार की नीतियों में बदलाव नहीं आया है। उन्होंने प्रधानमंत्री के ‘आउटरीच’ को लेकर भी कटाक्ष किया। खड़गे ने कहा कि आउटरीच की जरूरत तब पड़ती है, जब सरकार लोगों की पहुंच से दूर हो जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने अपना रिपोर्ट कार्ड सामने रखा है और देश का युवा भी अपना रिपोर्ट कार्ड लेकर खड़ा है।
पीएम मोदी ने ‘होम्योपैथी गोली’ का किया जिक्र
SRCC के 100वें स्थापना दिवस समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने करीब 48 मिनट तक छात्रों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने अपने 15 अगस्त के लाल किले के भाषण में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का फिर उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने ऐसे लोगों के लिए लाल किले से ‘होम्योपैथी की गोली’ दी थी। उनके अनुसार, इसके बाद विरोध करने वाले लोग ज्यादा मुखर होकर सामने आए और जनता उनके बारे में जान सकी।
‘नाराज फूफा’ कहकर भी साधा निशाना
प्रधानमंत्री ने विकास योजनाओं का विरोध करने वालों के लिए ‘नाराज फूफा’ का जुमला भी इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग हर नई योजना पर सवाल उठाते हुए पूछते हैं कि इसकी जरूरत ही क्या है। मोदी ने बुलेट ट्रेन, UPI और नई संसद जैसी परियोजनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ वर्गों ने इन पहलों पर भी सवाल उठाए थे। प्रधानमंत्री के मुताबिक विकास के लिए जरूरी फैसलों को ऐसे विरोध के कारण रोका नहीं जा सकता।
13 साल बाद SRCC पहुंचे मोदी
प्रधानमंत्री मोदी करीब 13 साल बाद SRCC पहुंचे। उन्होंने कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने के लिए मेट्रो की यात्रा भी की। वर्ष 2013 में वह गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में इसी कॉलेज में आए थे। अपने संबोधन में उन्होंने उस पुराने दौरे को याद करते हुए तब और अब के भारत की आर्थिक स्थिति की तुलना की। मोदी ने दावा किया कि 2013 में देश ‘पॉलिसी पैरालिसिस’, महंगाई, भ्रष्टाचार और कमजोर आर्थिक विकास जैसी चुनौतियों से जूझ रहा था। उन्होंने कहा कि आज भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है और वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।
‘आधा खाली नहीं, पूरा भरा ग्लास देखता हूं’
प्रधानमंत्री ने अपने पुराने ‘आधे भरे गिलास’ वाले उदाहरण को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग भारत की संभावनाओं को हमेशा आधे खाली गिलास की तरह देखते हैं, जबकि वह देश के सामर्थ्य को पूरा भरा हुआ देखते हैं। उन्होंने युवाओं से बड़े लक्ष्य निर्धारित करने का आह्वान किया और कहा कि भारत मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च, कृषि निर्यात और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
जनधन, मैन्युफैक्चरिंग और आत्मनिर्भरता का जिक्र
मोदी ने अपने संबोधन में जनधन योजना और वित्तीय समावेशन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि करोड़ों बैंक खाते खुलने से देश में वित्तीय पहुंच बढ़ी और डिजिटल भुगतान तथा फिनटेक क्षेत्र के विस्तार की नींव मजबूत हुई।
प्रधानमंत्री ने ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि भारत अब स्मार्टफोन और रक्षा उपकरणों के उत्पादन तथा निर्यात में पहले की तुलना में काफी आगे बढ़ चुका है।