नीट पेपर लीक मामले पर कांग्रेस का केंद्र सरकार पर हमला तेज, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और जेपीसी जांच की मांग
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार परीक्षा व्यवस्था को सुरक्षित और पारदर्शी बनाए रखने में पूरी तरह विफल रही है। पार्टी ने यह भी कहा कि दोषियों के खिलाफ केवल औपचारिक कार्रवाई नहीं, बल्कि कठोर कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।;
नई दिल्ली। NEET Paper Leak Case: नीट-यूजी परीक्षा रद्द होने और पेपर लीक विवाद को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपना हमला और तेज कर दिया है। पार्टी ने इस पूरे मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच कराने की मांग उठाई है। कांग्रेस का कहना है कि लगातार हो रहे पेपर लीक ने देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार परीक्षा व्यवस्था को सुरक्षित और पारदर्शी बनाए रखने में पूरी तरह विफल रही है। पार्टी ने यह भी कहा कि दोषियों के खिलाफ केवल औपचारिक कार्रवाई नहीं, बल्कि कठोर कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
कांग्रेस नेतृत्व ने सरकार को घेरा
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं। पार्टी का शीर्ष नेतृत्व छात्रों की परेशानियों को लेकर सरकार पर सवाल दाग रहा है। कांग्रेस का कहना है कि देशभर के लाखों छात्र लंबे समय तक तैयारी करने के बाद परीक्षा में बैठते हैं, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाएं उनकी मेहनत और भरोसे दोनों को नुकसान पहुंचाती हैं। बुधवार को युवा कांग्रेस अध्यक्ष उदय भान चिब और एनएसयूआई अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार और एनटीए पर गंभीर आरोप लगाए। दोनों नेताओं ने कहा कि परीक्षा रद्द करना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है, बल्कि इसके पीछे जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह बनाना जरूरी है।
एनटीए की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
युवा कांग्रेस अध्यक्ष उदय भान चिब ने कहा कि पिछले दस वर्षों में देशभर में 89 पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं और करीब 48 परीक्षाएं दोबारा करानी पड़ी हैं। उन्होंने दावा किया कि 2017 में एनटीए के गठन के बाद से परीक्षा प्रणाली में लगातार गड़बड़ियां बढ़ी हैं। चिब ने सवाल उठाया कि आखिर एनटीए की जवाबदेही किसके प्रति तय है और उसका ऑडिट कौन करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा आयोजित कराने के लिए निजी वेंडरों को काम देने की प्रक्रिया भी पारदर्शी नहीं है। उनके अनुसार, बार-बार हो रही लापरवाहियों के बावजूद किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय नहीं की जाती। उन्होंने यह भी कहा कि जिस समय पेपर लीक की घटनाएं हुईं, उस दौरान एनटीए के शीर्ष अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठे थे। कांग्रेस का आरोप है कि जवाबदेही तय करने के बजाय संबंधित अधिकारियों को दूसरे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त कर दिया गया।
छात्रों का सिस्टम से भरोसा टूट रहा
एनएसयूआई अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कहा कि पेपर लीक की लगातार घटनाओं से छात्रों में भारी निराशा और हताशा का माहौल है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन हर बार सिर्फ जांच और माफी तक मामला सीमित रह जाता है। जाखड़ ने आरोप लगाया कि एनटीए केवल औपचारिक प्रतिक्रिया देकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करता है। उनका कहना था कि यदि समय रहते सख्त कदम उठाए जाते तो बार-बार पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने नहीं आतीं। उन्होंने यह भी कहा कि लाखों छात्र और उनके परिवार मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। परीक्षा रद्द होने के बाद दोबारा तैयारी करना छात्रों के लिए बेहद कठिन स्थिति पैदा करता है।
राजस्थान और कोचिंग हब पर कांग्रेस के आरोप
कांग्रेस ने नीट-2026 पेपर लीक मामले में राजस्थान को केंद्र बिंदु बताते हुए भाजपा पर राजनीतिक संरक्षण देने का आरोप लगाया। विनोद जाखड़ ने कहा कि सीकर, कोटा और जयपुर जैसे बड़े कोचिंग हब में कई संस्थानों का संबंध भाजपा नेताओं से बताया जाता है। उन्होंने दावा किया कि पेपर लीक मामले में गिरफ्तार दो भाइयों के भाजपा युवा मोर्चा से संबंध रहे हैं। जाखड़ ने कहा कि इन आरोपितों की तस्वीरें भाजपा नेताओं के साथ सार्वजनिक रूप से मौजूद हैं, इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। हालांकि भाजपा की ओर से इन आरोपों पर अभी तक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पार्टी पहले भी पेपर लीक मामलों में किसी भी तरह की राजनीतिक संलिप्तता से इनकार करती रही है।
नई परीक्षा के लिए दूसरी एजेंसी की मांग
कांग्रेस ने मांग की है कि यदि नीट परीक्षा दोबारा कराई जाती है तो इसकी जिम्मेदारी किसी अन्य विश्वसनीय सरकारी एजेंसी को दी जाए। पार्टी का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में एनटीए की विश्वसनीयता गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि छात्रों का भरोसा वापस जीतने के लिए परीक्षा प्रक्रिया में व्यापक सुधार जरूरी हैं। पार्टी ने केंद्र सरकार से परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने, तकनीकी निगरानी बढ़ाने और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने की मांग की है। नीट पेपर लीक विवाद अब केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की शिक्षा व्यवस्था, सरकारी जवाबदेही और छात्रों के भविष्य से जुड़ा बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है।