मानसून सत्र से पहले कांग्रेस का सरकार पर हमला, परिसीमन से लेकर ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ तक कई विधेयकों के विरोध का ऐलान

जयराम रमेश ने दावा किया कि केंद्र सरकार एक बार फिर परिसीमन से संबंधित विधेयक संसद में लाने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि इससे पहले सरकार इस प्रस्ताव को आवश्यक समर्थन दिलाने में सफल नहीं हो सकी थी और अब इसे दोबारा लाने की कोशिश की जा रही है।;

Update: 2026-07-16 09:57 GMT

नई दिल्ली: संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले कांग्रेस ने सरकार के संभावित विधायी एजेंडे के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने का संकेत दिया है। पार्टी का कहना है कि यदि केंद्र सरकार कुछ प्रमुख विधेयकों को सदन में पेश करती है, तो कांग्रेस उनका संसद के भीतर और बाहर पुरजोर विरोध करेगी। कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इन मुद्दों पर अन्य विपक्षी दलों के साथ मिलकर संयुक्त रणनीति बनाने का प्रयास करेगी। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने गुरुवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी की बैठक में हुई चर्चाओं की जानकारी देते हुए कई प्रस्तावित विधेयकों पर अपना विरोध दर्ज कराया।

परिसीमन विधेयक पर सरकार को घेरने की तैयारी

जयराम रमेश ने दावा किया कि केंद्र सरकार एक बार फिर परिसीमन से संबंधित विधेयक संसद में लाने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि इससे पहले सरकार इस प्रस्ताव को आवश्यक समर्थन दिलाने में सफल नहीं हो सकी थी और अब इसे दोबारा लाने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस नेता ने कहा कि उनकी पार्टी पहले भी इस प्रस्ताव का विरोध करती रही है और आगे भी इसी रुख पर कायम रहेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर विपक्षी दलों के बीच एकजुटता बनाए रखने की दिशा में भी काम करेगी।

संविधान संशोधन विधेयक पर भी जताई आपत्ति

कांग्रेस ने न्यायाधीशों को हटाने की प्रक्रिया से जुड़े प्रस्तावित संविधान संशोधन विधेयक पर भी सवाल उठाए हैं। जयराम रमेश ने बताया कि पार्टी की बैठक में इस विषय पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि इस विधेयक की जांच के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का विपक्षी दलों ने बहिष्कार किया है। कांग्रेस का मानना है कि इस विषय पर व्यापक सहमति और गंभीर विचार-विमर्श की आवश्यकता है, इसलिए पार्टी इस प्रस्ताव का भी विरोध करेगी।

‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का भी करेगी विरोध

जयराम रमेश ने कहा कि बैठक में 'वन नेशन, वन इलेक्शन' के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि इस विषय पर गठित संयुक्त संसदीय समिति को अपनी रिपोर्ट निर्धारित समय सीमा के भीतर सौंपनी है। कांग्रेस का कहना है कि यह प्रस्ताव देश की संघीय व्यवस्था और लोकतांत्रिक ढांचे पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है। इसलिए पार्टी इस पहल का भी विरोध करेगी और इस विषय पर संसद में अपनी बात मजबूती से रखेगी।

एफसीआरए और शिक्षा विधेयक पर भी सख्त रुख

कांग्रेस ने संकेत दिया कि यदि सरकार विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) में संशोधन से जुड़ा विधेयक फिर से संसद में पेश करती है, तो पार्टी उसका भी विरोध करेगी। जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस पहले भी इस प्रस्ताव का विरोध कर चुकी है। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष के विरोध के बाद सरकार को पहले इस विधेयक को वापस लेना पड़ा था। यदि इसे दोबारा लाया जाता है, तो कांग्रेस फिर से इसका विरोध करेगी। इसके अलावा, यदि सरकार 'विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक' संसद में पेश करती है, तो कांग्रेस उसके खिलाफ भी आवाज उठाएगी। पार्टी का कहना है कि शिक्षा से जुड़े किसी भी बड़े सुधार पर व्यापक चर्चा और सहमति जरूरी है।

खाद्य सुरक्षा कानून में बदलाव पर भी आपत्ति

कांग्रेस ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 में प्रस्तावित संशोधनों का भी विरोध करने का ऐलान किया है। जयराम रमेश ने कहा कि यही कानून प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का आधार है और इसमें किसी भी प्रकार का बदलाव करोड़ों लाभार्थियों को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस कानून में संशोधन का विधेयक लाती है, तो कांग्रेस उसका भी कड़ा विरोध करेगी।

'सरकार के एजेंडे में समर्थन योग्य कुछ नहीं'

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जयराम रमेश ने कहा कि सरकार के मौजूदा विधायी एजेंडे में ऐसा कोई प्रमुख विधेयक दिखाई नहीं देता, जिसका कांग्रेस समर्थन कर सके। उन्होंने कहा कि विपक्ष की भूमिका केवल विरोध करना नहीं, बल्कि जनहित के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाना भी है। उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस संसद के भीतर बहस के माध्यम से और संसद के बाहर जनता के बीच जाकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाएगी।

मानसून सत्र में तीखी राजनीतिक टकराव की संभावना

कांग्रेस के इस रुख से संकेत मिलते हैं कि आगामी मानसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच कई महत्वपूर्ण विधेयकों को लेकर तीखी बहस देखने को मिल सकती है। परिसीमन, 'वन नेशन, वन इलेक्शन', एफसीआरए संशोधन, शिक्षा सुधार और खाद्य सुरक्षा कानून जैसे मुद्दे संसद की कार्यवाही के दौरान प्रमुख राजनीतिक विषय बन सकते हैं। ऐसे में मानसून सत्र के हंगामेदार रहने की संभावना जताई जा रही है।

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