दो-तिहाई बहुमत के करीब मोदी सरकार! मॉनसून सत्र से पहले बदले सियासी समीकरण, परिसीमन विधेयक पर बढ़ी हलचल

संसद के मॉनसून सत्र से पहले परिसीमन विधेयक को लेकर राजनीतिक हलचल तेज। शरद पवार गुट के संकेत, विपक्षी दलों में बदलते समीकरण और दो-तिहाई बहुमत के गणित पर बढ़ी चर्चा।;

Update: 2026-07-16 06:02 GMT
नई दिल्ली। संसद के आगामी मॉनसून सत्र से पहले राष्ट्रीय राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दलों के भीतर बदलते राजनीतिक घटनाक्रम और कुछ क्षेत्रीय दलों के रुख को लेकर उठ रहे सवालों के बीच यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि केंद्र सरकार संविधान संशोधन जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों के लिए आवश्यक समर्थन जुटाने की दिशा में प्रयास तेज कर सकती है। विशेष रूप से परिसीमन से जुड़े प्रस्तावित विधेयक को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ गई है।

हाल के दिनों में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के कुछ नेताओं के बयानों ने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान खींचा है। पार्टी सांसद सुप्रिया सुले ने कहा है कि उनकी पार्टी किसी भी प्रस्तावित परिसीमन विधेयक पर अंतिम निर्णय उसके आधिकारिक मसौदे को देखने के बाद ही करेगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि सभी राज्यों में सीटों की संख्या संतुलित तरीके से बढ़ाई जाती है, तो व्यापक सहमति बनने की संभावना हो सकती है।

परिसीमन विधेयक पर फिर बढ़ी राजनीतिक सक्रियता

संविधान संशोधन से जुड़े ऐसे किसी भी विधेयक को पारित कराने के लिए संसद में विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार आगामी सत्र में सहयोगी और अन्य दलों के समर्थन को लेकर रणनीति बना सकती है। हालांकि अभी तक सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है कि संबंधित विधेयक मॉनसून सत्र में पेश होगा या नहीं।

इस बीच महाराष्ट्र की राजनीति में भी हलचल बनी हुई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विभिन्न नेताओं की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से हुई मुलाकातों के बाद संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हालांकि संबंधित नेताओं ने इन मुलाकातों को स्थानीय और प्रशासनिक मुद्दों से जुड़ा बताया है।

विपक्षी दलों में बदलते घटनाक्रम पर नजर

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर सामने आए राजनीतिक घटनाक्रम और कुछ सांसदों के अलग राजनीतिक मंच से जुड़ने की खबरों ने भी संसद के आगामी सत्र से पहले बहुमत के गणित पर नई चर्चा छेड़ दी है। इसी तरह महाराष्ट्र में शिवसेना के विभिन्न गुटों से जुड़े घटनाक्रम भी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करने वाले कारकों के रूप में देखे जा रहे हैं।

हालांकि इन सभी घटनाओं का संसद में वास्तविक प्रभाव तब स्पष्ट होगा, जब संबंधित सांसदों की स्थिति और लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष लंबित मामलों पर अंतिम निर्णय सामने आएगा।

विशेष बहुमत का गणित क्यों है अहम?

संविधान संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए केवल साधारण बहुमत पर्याप्त नहीं होता। ऐसे विधेयकों के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन के साथ-साथ सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत का समर्थन भी आवश्यक होता है। यही कारण है कि प्रत्येक सांसद का समर्थन राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।

विश्लेषकों का कहना है कि यदि कुछ क्षेत्रीय दल सरकार के प्रस्तावों का समर्थन करते हैं या मतदान के दौरान अनुपस्थित रहते हैं, तो बहुमत का गणित बदल सकता है। हालांकि यह पूरी तरह राजनीतिक परिस्थितियों और सदन में वास्तविक मतदान पर निर्भर करेगा।

दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा कैसे हासिल करेगी सरकार, ऐसे समझिए

तृणमूल कांग्रेस की बगावत से पहले ये बड़ा सवाल था कि लोकसभा के भीतर मोदी सरकार 298 सांसदों के समर्थन में 62 सांसदों का अतिरिक्त योग कैसे जोड़ेगी। लेकिन अब इस सवाल से पर्दा उठता दिख रहा है। क्योंकि अगर पिछली बार की तरह एनडीए 298 सांसदों का समर्थन दोबारा जुटा लेती है तो आगे की राह उसके लिए ज्यादा मुश्किल नहीं होगी। यहां समझें। अब एनडीए के पास तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसद, उद्धव गुट से शिवसेना में गए 6 सांसद और एनसीपी पवार गुट के 8 सांसदों का सपोर्ट होता है। इसका योग 332 होता है। इसमें अगर 22 सांसद द्रमुक के भी जुड़ जाते हैं तो ये आंकड़ा 332+22= 354 हो जाता है। अब एनडीए को मात्र 6 और सांसदों की जरूरत पड़ेगी। ऐसी स्थिति में अगर कुछ छोटे दल गैरहाजिर भी हो जाएं तो फिर बहुमत का आंकड़ा कम हो जाएगा और सरकार अपने मकसद में कामयाब हो जाएगी । विपक्ष में जिस तरह से टूट हो रही है। दशकों की करीबी को विधायक और सांसद मिनटों में छोड़ रहे हैं, उससे विपक्ष को झटके पर झटके लग रहे हैं। विपक्ष की ये टूट मोदी सरकार को मजबूत कर रही है। दो-तिहाई बहुमत मिलने पर सरकार बिना किसी अड़ंगे के अपने ऐजेंडे को पूरा कर सकती है।

मॉनसून सत्र पर रहेगी देश की नजर

20 जुलाई से शुरू होने वाला संसद का मॉनसून सत्र कई अहम विधायी और राजनीतिक मुद्दों के कारण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। परिसीमन, महिला आरक्षण के क्रियान्वयन, आर्थिक नीतियों और अन्य प्रमुख विधेयकों पर सरकार तथा विपक्ष के रुख पर पूरे देश की नजर रहेगी। फिलहाल राजनीतिक बयानबाजी और संभावित गठबंधनों की चर्चाएं तेज हैं, लेकिन अंतिम तस्वीर संसद की कार्यवाही और आधिकारिक फैसलों के बाद ही स्पष्ट होगी।

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