'खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं हूं': आप सांसद राघव चड्ढा ने राज्यसभा में बोलने न देने पर दी प्रतिक्रिया

उन्होंने कहा कि जब भी उन्हें राज्यसभा में बोलने का मौका मिला, उन्होंने हमेशा आम लोगों से जुड़े मुद्दों को उठाया। चड्ढा ने सवाल उठाया, “क्या मैं गलत करता हूं? आखिर मेरे बोलने से किसी को क्या दिक्कत है? क्यों कोई मुझे रोकना चाहता है?”

Update: 2026-04-03 05:28 GMT
नई दिल्‍ली: आम आदमी पार्टी (AAP) की सियासत में गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब पार्टी ने अपने राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को उच्च सदन में उपनेता पद से हटा दिया। इतना ही नहीं, पार्टी की ओर से राज्यसभा सचिवालय से यह भी अनुरोध किया गया कि उन्हें सदन में बोलने के लिए समय आवंटित न किया जाए। इस फैसले ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है और अब खुद राघव चड्ढा ने इस पर प्रतिक्रिया दी है।

‘मेरी खामोशी को हार मत समझना’

पार्टी के इस फैसले के बाद राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं हूं।” उन्होंने आगे कहा कि जब भी उन्हें राज्यसभा में बोलने का मौका मिला, उन्होंने हमेशा आम लोगों से जुड़े मुद्दों को उठाया। चड्ढा ने सवाल उठाया, “क्या मैं गलत करता हूं? आखिर मेरे बोलने से किसी को क्या दिक्कत है? क्यों कोई मुझे रोकना चाहता है?” उन्होंने अपने समर्थकों का आभार जताते हुए कहा कि वह हमेशा आम आदमी के लिए काम करते रहेंगे। अपने संदेश में उन्होंने एक भावनात्मक पंक्ति भी लिखी- “मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना, मैं वो दरिया हूं जो वक्त आने पर सैलाब बनता है।”

क्या है पूरा मामला?

AAP ने राघव चड्ढा की जगह अब अशोक मित्तल को राज्यसभा में उपनेता नियुक्त किया है। पार्टी की ओर से राज्यसभा सचिवालय को औपचारिक रूप से सूचित किया गया कि चड्ढा को सदन में बोलने के लिए समय न दिया जाए। यह कदम असामान्य माना जा रहा है, क्योंकि आमतौर पर किसी सांसद को बोलने से रोकने का ऐसा औपचारिक अनुरोध कम ही देखने को मिलता है। इस घटनाक्रम के बाद राघव चड्ढा ने एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें राज्यसभा में उनके विभिन्न हस्तक्षेप दिखाए गए थे। इस वीडियो को उन्होंने “बुरी नजर” कैप्शन के साथ पोस्ट किया, जिससे संकेत मिलता है कि वह इस फैसले को लेकर असहज हैं।

क्या पार्टी में बढ़ रहा आंतरिक तनाव?

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह घटनाक्रम AAP के भीतर संभावित आंतरिक मतभेदों की ओर इशारा करता है। हालांकि पार्टी की ओर से इस फैसले के पीछे आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं किए गए हैं, लेकिन इस कदम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। राघव चड्ढा पार्टी के प्रमुख चेहरों में से एक रहे हैं और संसद में उनकी सक्रियता भी लगातार चर्चा में रही है। ऐसे में उन्हें अचानक इस तरह हटाना और बोलने से रोकने का अनुरोध करना एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

भाजपा का हमला

इस पूरे मामले पर दिल्ली भाजपा ने आम आदमी पार्टी और उसके नेतृत्व पर निशाना साधा है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि यह फैसला AAP के अंदरूनी संकट और नेतृत्व की कमजोरी को दर्शाता है। उन्होंने अरविंद केजरीवाल पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह एक कमजोर नेता हैं, जो न तो विपक्ष का सामना कर पा रहे हैं और न ही अपनी पार्टी के भीतर उठ रहे असंतोष को संभाल पा रहे हैं।

‘चड्ढा को चुप कराना असामान्य’

सचदेवा ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को अपने संसदीय दल के नेताओं का चयन करने का अधिकार है, लेकिन जिस तरह राघव चड्ढा को न केवल उपनेता पद से हटाया गया, बल्कि उन्हें सदन में बोलने से रोकने का अनुरोध भी किया गया, वह बेहद असामान्य और चिंताजनक है। उनके अनुसार, यह कदम इस बात का संकेत हो सकता है कि चड्ढा और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेद बढ़ रहे हैं।

अन्य नेताओं के नाम भी चर्चा में

भाजपा नेता ने यह भी दावा किया कि पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता भी नेतृत्व से दूरी बना रहे हैं। उन्होंने स्वाति मालीवाल का उदाहरण देते हुए कहा कि अब राघव चड्ढा जैसे बड़े नेता का इस तरह किनारे होना AAP के लिए गंभीर संकेत है। हालांकि AAP की ओर से इन दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

पार्टी की रणनीति पर असर

यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में आम आदमी पार्टी इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और क्या राघव चड्ढा को लेकर कोई और संगठनात्मक बदलाव किए जाते हैं। साथ ही, यह भी महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह विवाद केवल एक आंतरिक निर्णय तक सीमित रहता है या आगे चलकर पार्टी की राजनीति और रणनीति पर इसका व्यापक असर पड़ता है।

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