खुला गड्ढा बना मौत का जाल, केंद्रीय विद्यालय के उप प्रधानाचार्य के बेटे की गई जान
27 साल बाद भी कारगिल विजय की गूंज पूरे देश में सुनाई देती है। यह विजय साहस, बलिदान और अटूट राष्ट्रभक्ति का अमर प्रतीक है। फिर से हासिल की गई प्रत्येक चोटी इस बात की याद दिलाती है कि भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। इसकी रक्षा हर परिस्थिति में की जाएगी।;
एक और मासूम की मौत के बाद प्राधिकरण पर उठे बड़े सवाल
- प्राधिकरण की लापरवाही ने फिर छीनी मासूम की जिंदगी, 15 फीट गहरे गड्ढे में डूबा बच्चा
ग्रेटर नोएडा। शहर में खुले गड्ढों को लेकर बरती जा रही कथित लापरवाही ने एक और मासूम की जान ले ली। युवराज मेहता की मौत के बाद सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के दावे करने वाले ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सामने अब फिर वही सवाल खड़े हो गए हैं। इस बार नॉलेज पार्क क्षेत्र स्थित कलाधाम सोसायटी के पास बोरिंग के लिए खोदे गए करीब 15 फीट गहरे गड्ढे में डूबने से छह वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। मृतक केंद्रीय विद्यालय के उप प्रधानाचार्य सीवान यादव का बेटा था।
जानकारी के अनुसार, शनिवार को बच्चा अन्य बच्चों के साथ सोसायटी के बाहर खेल रहा था। इसी दौरान वह बारिश के पानी से भरे गहरे गड्ढे के पास पहुंच गया और अचानक उसमें गिर गया। साथ खेल रहे बच्चों के शोर मचाने पर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। काफी मशक्कत के बाद बच्चे को बाहर निकालकर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। हादसे के बाद परिवार में मातम पसरा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह गड्ढा कई दिन पहले प्राधिकरण की ओर से बोरिंग कार्य के लिए खोदा गया था। बारिश के बाद इसमें पानी भर गया, लेकिन सुरक्षा के लिए न तो बैरिकेडिंग की गई और न ही किसी प्रकार का चेतावनी बोर्ड लगाया गया। लोगों का कहना है कि यह हादसा पूरी तरह रोका जा सकता था, यदि समय रहते सुरक्षा के इंतजाम किए गए होते।
निवासियों का कहना है कि कुछ समय पहले युवराज मेहता की भी खुले गड्ढे में गिरने से मौत हुई थी। उस घटना के बाद प्राधिकरण ने शहरभर में खुले गड्ढों की बैरिकेडिंग और सुरक्षा मानकों का पालन कराने के बड़े-बड़े दावे किए थे। लेकिन कलाधाम के पास हुआ यह हादसा उन दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है।
घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोगों ने निर्माण कार्यों के दौरान खोदे गए सभी खुले गड्ढों की तत्काल बैरिकेडिंग कराने, चेतावनी बोर्ड लगाने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों व संबंधित एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि अब भी जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई तो ऐसे हादसे आगे भी मासूमों की जान लेते रहेंगे।