मोटापा गंभीर बीमारी, लेकिन इलाज संभव

आज भागदौड़ भरी जिंदगी, गलत खान-पान या जेनेटिक कारणों से भारत में 4 में से एक व्यक्ति मोटापे की समस्या से ग्रसित है

Update: 2022-09-04 23:18 GMT

मेरठ। आज भागदौड़ भरी जिंदगी, गलत खान-पान या जेनेटिक कारणों से भारत में 4 में से एक व्यक्ति मोटापे की समस्या से ग्रसित है। मोटापे के कारण इंसान के शरीर में कई बीमारियों को पनपने की जगह मिल जाती हैै। जिससे उसके जीवन पर काफी प्रभाव देखने को मिलता है। लेकिन अब इस समस्या से जूझने की जरूरत नहीं और बरिएट्रिक सर्जरी से दोबारा सामान्य जीवन का सुख मिल सकता है।

आएमए हाॅल में आयोजित पत्रकार वार्ता में डॉक्टर ऋषि सिंघल ने बताया कि कई रोगियों की सफल बरिएट्रिक सर्जरी कर उन्हें एक नया, बेहतर जीवन दिया है। ये सर्जरी उन रोगियों के लिए तो एक वरदान है जिन्हें मोटापे के साथ रक्तचाप, मधुमेह, थायरायड जैसी बीमारिया भी है। अत्याधिक मोटे लोगों के लिए यह सर्जरी काफी उपयोगी है जो दूरबीन के द्वारा की जाती है। रोगी को 24 घंटे से लेकर 3 दिन में छुट्टी मिल जाती है, व 4 हफ्ते में ही रोगी अपना जीवन सामान्य, सरल व प्रभावी ढंग से जीने लगता है। इस दौरान वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ राजीव अग्रवाल, डॉ राकेश अरन, डॉ एसपी सोंधी, डॉ राहुल मित्तल, डॉ अनुराग गुप्ता, डॉ एस के त्यागी, डॉ बी पी सिंघल व अन्य मौजूद रहे।

आमाशय व आंतों में होते हैं बदलाव

इसमें वजन कम करने के लिए पेट में आमाशय व आंतों में इस तरह बदलाव किये जाते है कि धीरे-धीरे मरीज का वजन कम होने लगता है। इस सर्जरी के बाद प्रत्येक माह 3 से 4 किलो वजन कम होने लगता है और अगले 1 से 2 वर्ष में वजन अपने स्थाई स्तर तक पहुंच जाता है। मोटापे को व्यक्ति की खानपान की गलत आदतों से जोड़कर देखा जाता है जो पूरी तरह सही नहीं है। खराब लाइफस्टाइल के साथ-साथ जेनेटिक कारणों से भी मोटापा एक गंभीर बीमारी की श्रेणी में आने लगा है। डाइट कंट्रोल व व्यायाम के बावजूद अगर वजन बढ़ता जाए तो सर्जरी जरूरी हो जातीं हैं।

1.50 से 3 लाख तक का होता है खर्च

व्यक्ति की मेडिकल स्थिति रिकवरी और टाइप ऑफ सर्जरी के आधार पर इस ऑपरेशन का खर्च लगभग 1.50 लेकर 3 लाख तक आता है। डॉक्टर ऋषि सिंघल ने एक सवाल के उत्तर में बताया कि बेरियाट्रिक सर्जरी से प्रजनन क्षमता व नवजात पर दुष्प्रभाव पड़ता है, ऐसा नहीं है बल्कि इससे महिलाओं और पुरुषों की प्रजनन क्षमता में सुधार होता है सर्जरी के बाद जब महिला का वजन कम हो रहा हो तो उसे प्रेगनेंसी प्लान नहीं करनी चाहिए, सर्जरी के 1 से 2 साल बाद ही उचित वजन होने पर डॉक्टर कि सलाह से गर्भ धारण करें। सही पोषण हो तो नवजात को भी किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होती है। इसमें बेहतरीन परिणामों के लिए जरूरी है कि मरीज अपनी फूड हैबिट्स पर मानसिक रूप से नियंत्रण रखें, व समय समय पर अपने डॉक्टर के पास जाकर रेगुलर चेकअप कराएं तभी मरीज उचित तरीके से वजन कम कर पाता है। इस ऑपरेशन के बाद व्यक्ति कमजोर हो जाता है ऐसा हमारे एृक संवाददाता का प्रश्न था, उत्तर में डॉक्टर ऋषि ने बताया कि नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं है ब्लकि इसके बाद व्यक्ति को शरीर में एक अलग तरह की चुस्ती, फुर्ती का एहसास होने लगता है।

सर्जरी के बाद रेगुलर चेकअप जरूरी

इंग्लैंड में अपनी सेवा देकर मेरठ में आए डॉक्टर ऋषि सिंघल ने कई ऑपरेटेड मरीजों का साक्षात्कार भी कराया जिनमें श्रीमती नीरू 52 वर्ष श्रीमती सविता मांगलिक 61 वर्ष श्रीमती विनीता 49 वर्ष डॉक्टर देवेंद्र 49 वर्ष डॉक्टर सीमा शर्मा 41 वर्ष व अन्य शामिल थे। मरीजों को सलाह भी दी गई की सर्जरी के बाद जरूरी है कि मरीज डॉक्टर के पास रेगुलर चेकअप के लिए आए और उनके द्वारा दिए सुझावों को अपनाएं वरना शरीर में विटामिन मिनरल्स व अन्य पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। बता दें कि जनपद मेरठ में द ओबेसिटी क्लिनिक पिछले 1 वर्ष से निरंतर अपनी सेवाओं से पश्चिम उत्तर प्रदेश में मोटापे के मरीजों के लिए एक वरदान बनता जा रहा है।

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