ललित सुरजन की कलम से - तीसरा मोर्चा : सच या सपना
डॉ. राममनोहर लोहिया ने एक समय गैर-कांग्रेसवाद का नारा दिया था, जिसकी परिणति 1967 के आम चुनावों के बाद अनेक प्रदेशों में अभूतपूर्व ढंग से दल बदलकर संविद (संयुक्त विधायक दल) सरकारों के गठन में हुई थी
डॉ. राममनोहर लोहिया ने एक समय गैर-कांग्रेसवाद का नारा दिया था, जिसकी परिणति 1967 के आम चुनावों के बाद अनेक प्रदेशों में अभूतपूर्व ढंग से दल बदलकर संविद (संयुक्त विधायक दल) सरकारों के गठन में हुई थी। इसकी पहल डॉ. लोहिया के अनुयायियों ने ही की थी, जो नाम तो गांधी का लेते थे, लेकिन सत्ता का साध्य हासिल करने के लिए साधन की पवित्रता के विचार को जिन्होंने तिलांजलि दे दी थी। अनेक प्रांतों में गठित इन संविद सरकारों से आगे चलकर किसी को फायदा हुआ तो वह तत्कालीन जनसंघ और वर्तमान भाजपा ही थी; जबकि समाजवादी और साम्यवादी दोनों को इससे ऐसा नुकसान हुआ जिसकी भरपाई आज तक नहीं हुई। आज की तारीख में लालू प्रसाद, रामविलास पासवान, नीतीश कुमार, मुलायम सिंह इस समाजवादी विचारधारा के ही वंशज हैं।
देशबंधु में 9 मई 2013 को प्रकाशितढ
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