अब दुकानों की नहीं होगी नीलामी, निगम बेचेगी शराब
रायपुर ! राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि प्रदेश में अब शराब दुकानों की नीलामी नहीं होगी। निगम के जरिए शराब बेची जाएगी।;
रायपुर ! राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि प्रदेश में अब शराब दुकानों की नीलामी नहीं होगी। निगम के जरिए शराब बेची जाएगी। इससे अवैध शराब बेचने वाले कोचियों पर अंकुश लगेगा वही शराबबंदी को लेकर आबकारी सचिव की अध्यक्षता में 11 सदस्यीय समिति का गठन किया गया है समिति देश में पूर्ण शराबबंदी वाले राज्यो गुजरात व बिहार का दौरा करेगी इसके अलावा समिति तीन ऐसे राज्यों का दौरा करेगी जहां शराब का विक्रय सरकारी नियंत्रण में है। समिति तीन माह मेें अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को देगी। इसके लिए नई आबकारी नीति के पर आज केबिनेट ने मुहर लगा दी है। राशन दुकानों से वितरित होने वाले शक्कर की खरीदी अब सीधे नागरिक आपूर्ति निगम खुले बाजार या शक्कर कारखानों से खरीदेगी। मानव अंग के अवैध कारोबार को रोकने वाले संशोधन विधेयक को भी केबिनेट ने हरी झंडी दे दी है। मुख्यमंत्री डा.ॅ रमन सिंह की अध्यक्षतों में बुधवार को हुई राज्यमंत्री की बैठक में कई अह़म निर्णय लिए गए। आबकारी मंत्री अमर अग्रवाल ने केबिनेट के निर्णयों की जानकारी देते हुए बताया प्रदेश में सरकारी दुकानों के माध्यम से शराब की बिक्री होगी। ठेका प्रथा को समाप्त कर दिया गया है। प्रदेश में 710 शराब दुकान है इसमें और वृद्धि नहीं की जाएगी। केबिनेट ने नई आबकारी नीति का अनुमोदन कर दिया है। निगम का गठन कर शराब की ब्रिकी की जाएगी एक व्यक्ति को अधिकतम चार बोतल शराब मिलेगी। दुकान के सामने सीसीटीवी कैमरा लगाया जाएगा। इससे अवैध शराब पर अकुंश लगेगा। उन्होने बताया प्रदेश मेंं शराबबंदी व सरकारी नियंत्रण में शराब बिक्री के लिए 11 सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। समिति मेें शासन के अधिकारी समाजसेवी संस्थाओं और आम जनता के प्रतिविधि शामिल किए जाऐगे। शराब के प्रति जागरूक्ता लाने भारत माता वाहनियों को और अधिक सशक्त बनाया जाएगा। राशन दुकानों से गरीब जनता को आंवटित होने वाले शक्कर पर केंद्र सरकार नहीं दे रही है जिससे राज्य सरकार को नुकसान हो रहा है। घाटा से निपटने आपूर्ति निगम सीधे कारखानों से शक्कर खरीदेगी। शक्कर कारखाना के रेट टेन्डर से तय होते है। खाद्य विभाग टेंन्डर के जरिए शक्कर खरीदेगी। मानव अंगों के करोबार से जुड़े लोगों पर रोक लगाने केंंद्र के मानव अंग संशोधन अधिनियम का केबिनेट ने अनुमोदन किया है। इसमेंं अब निकट के संबधियों में मातृपक्ष को भी शामिल किया गया है। गलत तरीके से चिकित्सकीय कार्य करने वालों व उकसाने वालों के लिए सजा का प्रावधान है। मूल अधिनियम की धारा 18 में 5 वर्ष की सजा और 10 हजार जुर्माना का प्रावधान था इसे बढ़ाकर 10 वर्ष की सजा और 20 लाख जुर्माना किया गया है। इस अधिनियम में कुल 14 संशोधन किए जाए है विधानसभा के बजट सत्र में संकल्प पारित किया जाएगा। आईटी में निवेश को प्रात्सोहन देने के लिए प्रदेश में निजि क्षेत्र में पहला डाटा सेंन्टर स्थापित किया जाएगा। पाई डाटा सेंटर कंपनी इस पर 200 करोड़ पूंजी निवेश करेगी। इसमें 300 लोगों को रोजगार मिलेगा। बैठक में आईआईटी भिलाई के लिए 130 एकड़ जमीन ली गई है। बीएसपी को इसके बदले अन्यत्र जमीन देने का निर्णय केबिनेट ने लिया है।