अब इंदौर के माथे पर लगा करचोरी का 'कलंक'
मध्यप्रदेश की व्यापारिक नगरी इंदौर की पहचान देश के सबसे साफ-सुथरे शहर में है, मगर गुटका कारोबार में करचोरी की रची गई साजिश ने इस शहर के माथे पर कलंक चस्पा कर दिया है;
भोपाल। मध्यप्रदेश की व्यापारिक नगरी इंदौर की पहचान देश के सबसे साफ-सुथरे शहर में है, मगर गुटका कारोबार में करचोरी की रची गई साजिश ने इस शहर के माथे पर कलंक चस्पा कर दिया है। यह ऐसा कारनामा है, जिसने व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) घोटाले की यादें फिर ताजा कर दी हैं।
देश और दुनिया के अन्य हिस्सों के साथ मध्यप्रदेश की यह व्यापारिक नगरी कोरोना महामारी के संकट के दौर से गुजर रही थी, उसी दौरान गुटका माफिया किशोर वाधवानी ने करचोरी की साजिश रची और उसमें उसके हिस्सेदार बने प्रशासनिक अधिकारी और राजनेता, जिनके नाम अभी पर्दे में हैं।
डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस और डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस ने लगभग 400 करोड़ की टैक्स चोरी पकड़ी है और इस मामले में किशोर वाधवानी की मुंबई से गिरफ्तारी भी हो चुकी है और वह जेल में है।
सार्वजनिक हो रहे दस्तावेज इस बात का खुलासा करते हैं कि इंदौर में मई माह के अंत में जब खुले तौर पर सब्जी, फल से लेकर किसी सामान की आपूर्ति की अनुमति नहीं थी, तब प्रशासन ने दो दर्जन से अधिक व्यापारिक प्रतिष्ठानों से गुटका को इंदौर और इंदौर से बाहर भेजने की अनुमति दे दी। प्रशासन ने यह अनुमति इस आधार पर दी कि गर्मी के मौसम में गुटका के खराब होने की आशंका है।
प्रशासन ने गुटकों से भरे ट्रकों को बाहर ले जाने के लिए बाकायदा वाहन और कर्फ्यू पास भी जारी किए गए थे। इन पास के जरिए 70 ट्रकों से अधिक माल इंदौर से बाहर भेजे जाने की बातें सामने आ रही हैं।
गुटका माफिया किशोर वाधवानी की कई राजनेताओं के साथ तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। ये तस्वीरें बताती हैं कि वाधवानी की सियासी जगत में गहरी घुसपैठ है। यही कारण है कि दोनों प्रमुख राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस इस मसले पर ज्यादा कुछ बोलने से बच रहे हैं।
बड़े नेताओं में राज्यसभा सांसद और कांग्रेस नेता विवेक तन्खा अकेले ऐसे हैं जो इस मामले पर खुलकर राय जाहिर कर रहे हैं। तन्खा ने ट्वीट कर कहा, "इंदौर जीएसटी स्कैम की ऑफिसियल बुलेटिन ने प्रारंभिक रूप से करचोरी चार सौ करोड़ निर्धारित की, जीएसटी सेंट्रल टैक्स तो सीबीआई के इन्वेस्टिगेशन का विषय है। प्रशासनिक अधिकारियों का रोल डीओपीटी भारत सरकार के संज्ञान का विषय भी एमएचए के संज्ञान में आ गई है। यह मप्र का व्यापम नंबर-2 बन रहा है। पीआईएल!"
इससे पहले, इंदौर में लगभग सात साल पहले वर्ष 2013 में व्यापमं घोटाले का खुलासा हुआ था। इस मामले में प्रशासनिक अधिकारी, कई नेताओं और शिक्षा मंत्री तक को जेल जाना पड़ा था। यह अंतर्राज्यीय घोटाला साबित हुआ था। इस मामले की एसटीएफ, एसआईटी के बाद सीबीआई जांच कर रही है।
व्यापम मामले से जुड़े लगभग 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। मौतों का रहस्य जानने दिल्ली से आए एक प्रमुख न्यूज चैनल के संवाददाता अक्षय सिंह की भी मौत हो गई। इस घोटाले में 1450 छात्रों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए और परिजनों को भी आरोपी बनाया गया। लगभग 3000 लोगों को आरोपी बनाया गया, जिनमें से बड़ी संख्या में लोगों को जेल जाना पड़ा।
व्यापम के बाद हनीट्रैप सेक्स कांड का खुलासा भी इंदौर से ही हुआ था। भोपाल की तीन महिलाएं नगर निगम के इंजीनियर हरभजन सिंह का वीडियो बनाने के बाद ब्लेकमैल कर रही थीं और तीन करोड़ रुपये की मांग कर रही थीं। इस मामले की जांच एसआईटी (विशेष जांच टीम) को सौंपी गई तो इस कांड की आंच भाजपा और कांग्रेस के कई नेताओं तक पर आई। अब गुटका माफिया किशोर वाधवानी द्वारा करचोरी का मामला भी इंदौर से ही सामने आया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि व्यापम कांड में राजनेता, नौकरशाह और माफिया की भूमिका सामने आई थी, हनीट्रैप में भी ऐसा ही कुछ हुआ था और अब गुटका करचोरी के मामले में भी यही हालत बन रहे हैं। देखना होगा कि इस गठजोड़ से जुड़े लोगों की गर्दन तक केंद्रीय जांच दल के हाथ पहुंचते हैं या नहीं।