प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष कर संग्रह बढ़ा

नई दिल्ली ! चालू वित्तवर्ष की अप्रैल-फरवरी अवधि में प्रत्यक्ष कर संग्रहण 10.7 फीसदी बढ़कर 6.17 लाख करोड़ रुपये और अप्रत्यक्ष कर संग्रहण 22.2 फीसदी बढ़कर 7.72 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

Update: 2017-03-11 04:38 GMT

नई दिल्ली !  चालू वित्तवर्ष की अप्रैल-फरवरी अवधि में प्रत्यक्ष कर संग्रहण 10.7 फीसदी बढ़कर 6.17 लाख करोड़ रुपये और अप्रत्यक्ष कर संग्रहण 22.2 फीसदी बढ़कर 7.72 लाख करोड़ रुपये हो गया है। एक आधिकारिक बयान में शुक्रवार को यह जानकारी दी गई। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया, "2017 के फरवरी तक के प्रत्यक्ष कर संग्रहण के आंकड़ों से पता चलता है कि कुल 6.17 लाख करोड़ रुपये इकट्ठा हुए हैं, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 10.7 फीसदी अधिक है।"

बयान में कहा गया है कि फरवरी 2017 तक के आंकड़ों से पता चलता है कि प्रत्यक्ष कर संग्रहण के सालाना बजटीय लक्ष्य का 72.9 फीसदी प्राप्त कर लिया गया है।

बयान में कहा गया कि अप्रैल-फरवरी अवधि के दौरान कुल 1.48 लाख करोड़ रुपये रिफंड किए गए, जो पिछले साल (2016) की समान अवधि की तुलना में 40.2 फीसदी अधिक है।

अप्रत्यक्ष कर संग्रहण के बारे में वित्त मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है, "अप्रत्यक्ष कर (केंद्रीय उत्पाद शुल्क, सेवा कर और कस्टम) के फरवरी 2017 तक के आंकड़ों से पता चलता है कि कुल 7.72 लाख करोड़ रुपये का कर संग्रहण हुआ है, जो कि पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 22.2 फीसदी अधिक है।"

फरवरी 2017 तक के कर संग्रहण के आंकड़ों से पता चलता है कि अप्रत्यक्ष कर संग्रहण के बजटीय लक्ष्य का 90.9 फीसदी प्राप्त कर लिया गया है।

घरेलू रेटिंग एजेंसी की प्रमुख अर्थशा_x009d_ी अदिति नायर ने कहा, "वित्त वर्ष 2016-17 के अप्रत्यक्ष कर संग्रहण के संशोधित अनुमान के प्राप्त करने की संभावना है।"

बयान में आगे कहा गया, "जहां तक केंद्रीय उत्पाद कर संग्रहण का सवाल है वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान यह 3.45 लाख करोड़ रुपये रही, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के दौरान यह 2.53 लाख करोड़ रुपये थी। इस तरह से इसमें 36.2 फीसदी की वृद्धि हुई है।"

वहीं, वित्त वर्ष 2016-17 की अप्रैल से फरवरी की अवधि में सेवा कर संग्रहण 2.21 लाख करोड़ रुपये रही जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 1.83 लाख करोड़ रुपये थी। इस तरह से इसमें 20.8 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।

समीक्षाधीन अवधि में कस्टम संग्रहण 2.05 लाख करोड़ रुपये रही, जोकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 1.94 लाख करोड़ रुपये थी। इसमें 5.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।

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