नई दिल्ली: करवा चौथ का त्योहार सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास होता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और खुशहाल वैवाहिक जीवन की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं। सुबह से व्रत रखने के बाद शाम को चौथ माता की पूजा की जाती है और करवा चौथ की कथा सुनी जाती है। इसके बाद महिलाओं को चंद्रोदय का इंतजार रहता है। चंद्रमा को अर्घ्य देने और पति के हाथों पानी पीने के बाद व्रत पूरा किया जाता है। हालांकि, इस बार कई इलाकों में बादल और बारिश के कारण चांद के दर्शन को लेकर असमंजस बना हुआ है। कहीं आसमान में बादल छाए हैं, तो कहीं बारिश के कारण चंद्रमा दिखाई देने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में देशभर में महिलाएं चांद निकलने का इंतजार कर रही हैं। मौसम की स्थिति के कारण चंद्रोदय के निर्धारित समय पर भी चांद के दर्शन होना जरूरी नहीं है।
करवा चौथ पर कब दिखाई देगा चांद?
करवा चौथ पर चंद्रमा निकलने का समय अलग-अलग शहरों में अलग होता है। उपलब्ध पंचांग संबंधी जानकारी के मुताबिक, असम में चंद्रमा शाम करीब 7 बजकर 6 मिनट पर दिखाई देने की संभावना जताई गई है। वहीं, देश के कई अन्य हिस्सों में चंद्रोदय का संभावित समय रात 8 बजे से 9 बजे के बीच बताया गया है। हालांकि, चंद्रमा निकलने का वास्तविक समय स्थान के अनुसार बदलता है। इसके अलावा बादल, बारिश और स्थानीय मौसम की स्थिति भी चंद्रमा के दर्शन में बाधा डाल सकती है। इसलिए व्रत रखने वाली महिलाओं को अपने शहर के चंद्रोदय के समय के अनुसार पूजा की तैयारी करनी चाहिए।
चांद निकलने का समय
दिल्ली-एनसीआर में चांद के दिखाई देना क समय रात 8:17 बजे से था। वहीं, लखनऊ में रात 8:06 बजे से, जयपुर में रात 8:28 बजे से, मुंबई में रात 9:00 बजे से, कोलकाता में शाम 7:47 बजे से और बेंगलुरु में रात 8:55 बजे का समय है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नोएडा में चंद्रमा निकलने का संभावित समय रात 8 बजकर 17 मिनट बताया गया है। वहीं, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा में चंद्रोदय का समय रात 8 बजकर 16 मिनट बताया गया है।हालांकि, इन समयों पर चांद दिखाई देना मौसम पर निर्भर करेगा। आसमान में बादल छाए रहने की स्थिति में चंद्रमा क्षितिज पर आ जाने के बावजूद दिखाई नहीं दे सकता। ऐसे में महिलाओं को घबराने के बजाय अपने क्षेत्र की मौसम संबंधी जानकारी और स्थानीय पंचांग का ध्यान रखना चाहिए।
चांद नहीं दिखे तो कैसे खोलें करवा चौथ का व्रत?
करवा चौथ पर चंद्रमा के दर्शन के बाद ही व्रत खोलने की परंपरा है। लेकिन खराब मौसम के कारण चांद दिखाई न देने पर कई महिलाओं के मन में सवाल उठता है कि वे व्रत कैसे पूरा करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसी स्थिति में सबसे पहले अपने शहर में चंद्रोदय के निर्धारित समय तक इंतजार करना चाहिए। यदि बादलों के कारण चंद्रमा दिखाई नहीं देता है, तो स्थानीय परंपरा और परिवार के पुरोहित की सलाह के अनुसार पूजा की जा सकती है। कुछ धार्मिक परंपराओं में चंद्रमा के उदय के समय उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके चंद्रदेव का स्मरण करने और अर्घ्य देने की सलाह दी जाती है। हालांकि, इस विधि को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हो सकती हैं। इसलिए अपने परिवार की परंपरा का पालन करना उचित रहेगा।
भगवान शिव और चंद्रदेव की पूजा भी कर सकती हैं महिलाएं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव के मस्तक पर चंद्रमा विराजमान हैं। ऐसे में चंद्रमा के दर्शन नहीं होने पर कुछ लोग भगवान शिव की तस्वीर या मूर्ति के सामने पूजा करते हैं और चंद्रदेव का ध्यान करते हैं। कुछ परंपराओं में चावल से चंद्रमा की प्रतीकात्मक आकृति बनाकर उसकी पूजा करने और मंत्र जाप के बाद व्रत खोलने की भी मान्यता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ऐसी विधियां सभी समुदायों और परिवारों में समान रूप से प्रचलित नहीं हैं। यदि चंद्रमा बादलों के पीछे छिपा हो, तो केवल वीडियो कॉल पर दूसरे स्थान से चांद देखने को पारंपरिक पूजा का सर्वमान्य विकल्प नहीं माना जाता। ऐसी स्थिति में स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार निर्णय लेना बेहतर है।
करवा चौथ पर रखें इन बातों का ध्यान
करवा चौथ का उद्देश्य पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और आपसी समर्पण की भावना को मजबूत करना है। इसलिए मौसम के कारण चंद्रमा दिखाई देने में देरी होने पर अनावश्यक तनाव न लें। अपने शहर के चंद्रोदय समय की पुष्टि करें और पूजा की विधि के संबंध में जरूरत पड़ने पर परिवार के जानकारों से सलाह लें।