टोल नहीं चुकाया तो गाड़ी नहीं बेच पाएंगे: NOC और फिटनेस सर्टिफिकेट जारी नहीं होगा, नेशनल परमिट भी नहीं मिलेगा

सरकार का मानना है कि अब तक कई वाहन मालिक इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह (ईटीसी) प्रणाली में दर्ज टोल शुल्क का भुगतान नहीं करते थे, लेकिन इसके बावजूद वाहन से जुड़ी अन्य सेवाएं हासिल कर लेते थे। नए नियमों के लागू होने के बाद ऐसा संभव नहीं होगा।

Update: 2026-01-21 05:07 GMT
नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले वाहन मालिकों के लिए केंद्र सरकार ने टोल व्यवस्था को लेकर सख्त और निर्णायक कदम उठाया है। अब यदि किसी वाहन पर टोल टैक्स का बकाया है, तो न तो उसका अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी होगा और न ही फिटनेस सर्टिफिकेट का नवीनीकरण किया जा सकेगा। वाणिज्यिक वाहनों के मामले में नेशनल परमिट भी प्रभावित होगा। सरकार का यह फैसला टोल वसूली को पारदर्शी बनाने और इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

नए नियम अधिसूचित, 1989 के नियमों में संशोधन

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने ‘केंद्रीय मोटर वाहन (द्वितीय संशोधन) नियम, 2026’ को अधिसूचित कर दिया है। इसके जरिए केंद्रीय मोटर वाहन नियमावली, 1989 में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। मंत्रालय के अनुसार इन संशोधनों का मुख्य उद्देश्य टोल चोरी पर पूरी तरह लगाम लगाना, डिजिटल निगरानी को प्रभावी बनाना और राष्ट्रीय राजमार्गों पर निर्बाध यातायात को बढ़ावा देना है। सरकार का मानना है कि अब तक कई वाहन मालिक इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह (ईटीसी) प्रणाली में दर्ज टोल शुल्क का भुगतान नहीं करते थे, लेकिन इसके बावजूद वाहन से जुड़ी अन्य सेवाएं हासिल कर लेते थे। नए नियमों के लागू होने के बाद ऐसा संभव नहीं होगा।

टोल बकाया होने पर किन सेवाओं पर पड़ेगा असर

नए नियमों के तहत टोल भुगतान को सीधे वाहन से जुड़ी अनिवार्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जोड़ दिया गया है। इसके तहत—

अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी): यदि कोई वाहन मालिक अपना वाहन किसी अन्य व्यक्ति को बेचना चाहता है या एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानांतरित करना चाहता है, तो एनओसी आवश्यक होती है। अब तब तक एनओसी जारी नहीं की जाएगी, जब तक वाहन पर दर्ज सभी बकाया टोल शुल्क का भुगतान नहीं कर दिया जाता।

फिटनेस सर्टिफिकेट का नवीनीकरण: वाहन की सड़क पर चलने की योग्यता जांचने के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट अनिवार्य है। नए नियमों के अनुसार, यदि वाहन पर “अनपेड यूजर फी” दर्ज है, तो फिटनेस सर्टिफिकेट का नवीनीकरण रोक दिया जाएगा। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अनपेड यूजर फी वह टोल शुल्क है, जिसे इलेक्ट्रॉनिक टोल सिस्टम ने दर्ज किया है, लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 के तहत उसका भुगतान नहीं हुआ है।

नेशनल परमिट: 
मालवाहक और यात्री ढोने वाले वाणिज्यिक वाहनों के लिए नेशनल परमिट बेहद जरूरी होता है। अब ऐसे वाहनों के लिए यह शर्त अनिवार्य कर दी गई है कि उन पर कोई भी टोल बकाया न हो। बकाया रहने की स्थिति में न तो नया परमिट जारी होगा और न ही मौजूदा परमिट को बनाए रखा जा सकेगा।

मल्टी-लेन फ्री फ्लो सिस्टम की तैयारी


 सरकार का यह फैसला भविष्य में लागू होने वाले ‘मल्टी-लेन फ्री फ्लो’ (एमएलएफएफ) टोल सिस्टम की तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है। इस प्रणाली में राजमार्गों पर भौतिक टोल बैरियर नहीं होंगे। वाहन बिना रुके अपने आप गुजरेंगे और टोल स्वचालित रूप से काट लिया जाएगा। ऐसे में भुगतान न करने वालों पर सख्ती जरूरी मानी जा रही है, ताकि सिस्टम की विश्वसनीयता बनी रहे। मंत्रालय का कहना है कि जब बैरियर हटेंगे, तब टोल चोरी की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए वाहन से जुड़ी सेवाओं को टोल भुगतान से जोड़कर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी वाहन मालिक शुल्क चुकाने से बच न सके।

फार्म-28 में भी बदलाव, प्रक्रिया होगी डिजिटल

नियमों को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने फार्म-28 में भी संशोधन किया है, जो वाहन के ट्रांसफर या एनओसी से जुड़ा होता है। अब इस फार्म में वाहन मालिक को यह घोषणा करनी होगी कि उसके वाहन पर कोई टोल बकाया नहीं है। इसके अलावा फार्म-28 के कुछ हिस्सों को ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप से जारी करने की व्यवस्था भी की गई है, जिससे वाहन मालिकों को दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।

आम जनता और राजस्व दोनों को होगा लाभ

सरकार का दावा है कि इन कड़े प्रावधानों से न केवल टोल वसूली में पारदर्शिता आएगी, बल्कि सरकारी राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इसके साथ ही टोल प्लाजा पर लगने वाले जाम में कमी आएगी और राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर अधिक सुगम होगा। हालांकि, कुछ वाहन संगठनों का कहना है कि सिस्टम में किसी भी तरह की तकनीकी त्रुटि के कारण आम वाहन मालिकों को परेशानी न हो, इसके लिए मजबूत शिकायत निवारण व्यवस्था भी जरूरी है।

बड़ा बदलाव


कुल मिलाकर, केंद्र सरकार का यह कदम टोल व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। अब टोल बकाया रखना सीधे तौर पर वाहन मालिकों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। ऐसे में विशेषज्ञों की सलाह है कि वाहन मालिक समय-समय पर अपने फास्टैग और टोल रिकॉर्ड की जांच करते रहें और किसी भी बकाया राशि का तुरंत भुगतान करें, ताकि भविष्य में जरूरी दस्तावेजों और सेवाओं में कोई रुकावट न आए।

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