सिर्फ एक वीडियो से किसी अधिकारी की छवि खराब नहीं की जा सकती: पुलिस ज्यादती मामले में दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने 2025 में पुलिस ज्यादती से जुड़े मामले की जांच से पुलिस अधिकारी संदीप लांबा को हटाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। अदालत ने याचिकाकर्ता की मांग पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल एक वीडियो के आधार पर किसी पुलिस अधिकारी की पूरी छवि को खराब नहीं किया जा सकता।;

Update: 2026-07-28 15:23 GMT

नई दिल्ली दिल्ली हाईकोर्ट ने 2025 में पुलिस ज्यादती से जुड़े मामले की जांच से पुलिस अधिकारी संदीप लांबा को हटाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। अदालत ने याचिकाकर्ता की मांग पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल एक वीडियो के आधार पर किसी पुलिस अधिकारी की पूरी छवि को खराब नहीं किया जा सकता।

सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से सवाल किया कि क्या सिर्फ इसलिए कि अधिकारी जंतर-मंतर से जुड़े एक वीडियो में एक महिला को थप्पड़ मारते हुए दिखाई दिए, उनकी पूरी छवि को खत्म कर दिया जाए? अदालत ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ निष्कर्ष निकालने से पहले पूरे मामले और परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है।

हाईकोर्ट ने कहा कि क्या अदालत जमीनी हालात से अनजान रह सकती है? अगर बड़ी भीड़ संसद तक पहुंच जाती और वहां हिंसा या गोलीबारी जैसी स्थिति पैदा हो जाती तो स्थिति कितनी गंभीर हो सकती थी। अदालत ने टिप्पणी की कि भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान पुलिस की भूमिका और परिस्थितियों को भी समझना होगा।

अदालत ने कहा कि अगर किसी घटना में बल प्रयोग के आरोप लगे हैं, तो भी संबंधित अधिकारी को निष्पक्ष जांच और सुनवाई का अधिकार है। केवल किसी एक घटना या वीडियो के आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि अधिकारी हर मामले में पक्षपाती होंगे। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि किसी संस्था को इस तरह बदनाम नहीं किया जाना चाहिए।

दिल्ली पुलिस की ओर से अदालत को बताया गया कि इस मामले में जांच पहले ही पूरी हो चुकी है। पुलिस ने कहा कि याचिकाकर्ता के बयान भी दर्ज किए जा चुके हैं और अब जांच में कुछ भी लंबित नहीं है। इसी आधार पर पुलिस ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा।

याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि पुलिस अधिकारी संदीप लांबा को जांच प्रक्रिया से अलग किया जाए, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया और याचिका पर आगे सुनवाई करने से इनकार कर दिया।


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