कांग्रेस ने समझौता तोड़ा, नतीजे बिगड़े : प्रकाश आंबेडकर

बीएमसी चुनाव संपन्न होने के बाद कांग्रेस पार्टी पर समझौता नहीं निभाने का आरोप वंचित बहुजन आघाड़ी के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर की ओर से लगाया गया है

Update: 2026-01-20 02:07 GMT

भाजपा का एजेंडा एनसीपी को खत्म करना: आंबेडकर का आरोप

  • 2000 करोड़ खर्च के बावजूद जनता ने दिया समर्थन: VBA प्रमुख
  • मुस्लिम वोट कांग्रेस से दूर, आंबेडकर ने साधा निशाना
  • मुंबई में समझौता निभाया जाता तो नतीजे होते बेहतर: प्रकाश आंबेडकर

पुणे। बीएमसी चुनाव संपन्न होने के बाद कांग्रेस पार्टी पर समझौता नहीं निभाने का आरोप वंचित बहुजन आघाड़ी के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर की ओर से लगाया गया है। उन्होंने कहा कि मुंबई में समझौता निभाया जाता तो शायद परिणाम कुछ बेहतर हो सकते थे।

वंचित बहुजन आघाड़ी के प्रमुख प्रकाश आंबेडकर ने आरोप लगाया कि भाजपा अजित पवार की एनसीपी को खत्म करना चाहती है। यही उनका मुख्य एजेंडा है। हमारी जानकारी के अनुसार, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस ने स्थानीय निकाय चुनाव के दौरान पूरे महाराष्ट्र में लगभग 2,000 करोड़ रुपये खर्च किए। इसके बावजूद, हमें जो सफलता मिली है, वह मतदाताओं की मेहनत और समर्थन की वजह से है। मैं सभी मतदाताओं का आभार व्यक्त करता हूं।

कांग्रेस पर तंज कसते हुए प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि औरंगाबाद में कांग्रेस सिर्फ एक सीट जीत पाई। जिस सीट पर हमारे साथ उनकी फाइट थी, वहां उनकी हालत बहुत खराब हो गई। अगर औरंगाबाद में कांग्रेस हमारे साथ हाथ मिला लेती, तो मेरा मानना है कि करीब 40-42 सीटें जीती जा सकती थीं, जिनमें से 19-20 हमारी और बाकी कांग्रेस की होती।

बीएमसी चुनाव को लेकर कहा कि हमने बार-बार कांग्रेस से कहा था कि मुसलमानों के वोट को अपनी जागीर मत समझिए। ये वोट आपसे टूट रहा है और जा रहा है। चुनाव के बाद वही दिखाई दिया, मुस्लिम वोट कांग्रेस से हट चुका है। हिंदू वोट तो पहले ही हट चुका था। जो कांग्रेस में चुनकर आए, वे अपनी व्यक्तिगत छवि के दम पर जीते हैं।

प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि कांग्रेस का हमारे साथ समझौता था, लेकिन मुंबई में कांग्रेस ने हमारे साथ समझौता नहीं निभाया।

उन्होंने कहा कि अभी जिला परिषद और पंचायत समिति के 12 जिलों में चुनाव हो रहे हैं, और हम बड़े पैमाने पर चुनाव लड़ रहे हैं। हमें उम्मीद थी कि कोई समझौता हो जाएगा और उस समझौते के हिसाब से हम साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे। अभी भी भाजपा की घुसपैठ हो रही है। यानी भाजपा अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों में घुस रही है और इस घुसपैठ की वजह से उन पार्टियों पर उनका असर और कंट्रोल भी है।

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