बंगाल में आरएन रवि को राज्यपाल बनाने से कानून-व्यवस्था में सुधार की उम्मीद : दिलीप घोष
पश्चिम बंगाल में सीवी आनंद बोस के इस्तीफे के बाद आरएन रवि को राज्यपाल नियुक्त किया गया है। इस पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता दिलीप घोष ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आरएन रवि को राज्यपाल बनाए जाने के बाद बंगाल की कानून-व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है।
मिदनापुर। पश्चिम बंगाल में सीवी आनंद बोस के इस्तीफे के बाद आरएन रवि को राज्यपाल नियुक्त किया गया है। इस पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता दिलीप घोष ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आरएन रवि को राज्यपाल बनाए जाने के बाद बंगाल की कानून-व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है।
भाजपा नेता दिलीप घोष ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में कहा, "नए राज्यपाल आ रहे हैं और हम उनका स्वागत करते हैं। हमें खुशी है कि एक आईपीएस अधिकारी बंगाल में राज्यपाल का पद संभाल रहे हैं। बंगाल में कानून और व्यवस्था की स्थिति बहुत खराब है। हमें उम्मीद है कि उनकी देखरेख में इसमें सुधार होगा।"
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार और राज्यपाल सीवी आनंद बोस के बीच लगातार टकराव रहे। खासकर कानून व्यवस्था के विषयों को लेकर सरकार और राज्यपाल में अक्सर विवाद देखे गए। राज्य में विधानसभा चुनावों से ठीक पहले राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने गुरुवार को अपना इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सीवी आनंद बोस का इस्तीफा स्वीकार करने के बाद उनकी जगह तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि को पश्चिम बंगाल की जिम्मेदारी सौंपी।
दिलीप घोष ने कहा, "बंगाल में लोग सही इलाज न मिलने की वजह से मर रहे हैं। यहां से कुछ ही मरीज इलाज के लिए ले जाए जाते हैं। सड़कों की हालत खराब है। अगर किसी बीमार व्यक्ति को अस्पताल ले जाया जाता है, तो हो सकता है कि वह रास्ते में ही मर जाए। यहां पूरी अव्यवस्था की वजह से लोग परेशान हैं।"
भाजपा नेता ने बंगाल में राष्ट्रपति शासन की चर्चाओं को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "अगर पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगना है, तो ममता बनर्जी इसे रोक नहीं सकतीं। लेकिन अगर राज्यपाल बदल जाते हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि राष्ट्रपति शासन लग गया है।"
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के कारण ही राष्ट्रपति शासन लग सकता है। जिस तरह से एसआईआर प्रक्रिया में गड़बड़ी और देरी हुई है। फाइनल मतदाता सूची जब तक नहीं आएगी, तब तक राज्य में चुनाव नहीं होंगे। अगर इसी तरह स्थिति बनी रही तो राष्ट्रपति शासन ही लगाना पड़ सकता है और इसके लिए सभी तैयार रहें।"