CJP के संसद मार्च की गूंज दुनिया तक: न्यूयॉर्क टाइम्स, BBC, द गार्डियन और अल जजीरा ने प्रमुखता से किया कवरेज

अमेरिका, ब्रिटेन, कतर और पाकिस्तान के प्रमुख समाचार संगठनों ने इस आंदोलन को भारत के समकालीन युवा आंदोलनों में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में पेश किया।;

Update: 2026-07-22 07:48 GMT

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में दिल्ली के जंतर-मंतर से संसद तक निकाले गए मार्च और उसके दौरान हुई झड़पों ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया का भी ध्यान अपनी ओर खींचा है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव, आंसू गैस के गोले, पथराव और कई लोगों के घायल होने की घटनाओं को दुनिया के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों ने विस्तार से प्रकाशित किया। अमेरिका, ब्रिटेन, कतर और पाकिस्तान के प्रमुख समाचार संगठनों ने इस आंदोलन को भारत के समकालीन युवा आंदोलनों में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में पेश किया।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने क्‍या कहा

अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि शिक्षा व्यवस्था और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ हजारों युवा सड़कों पर उतरे और पुलिस कार्रवाई के बावजूद आंदोलन जारी रखा। रिपोर्ट के अनुसार, संसद मार्च के दौरान हुई झड़पों के अगले दिन भी बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी फिर से जंतर-मंतर पहुंचे और सरकार से जवाबदेही की मांग पर कायम रहे। अखबार ने उल्लेख किया कि मार्च के दौरान पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। वहीं, प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि उनकी मांगों पर सरकार की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी गई।

द गार्डियन ने क्‍या कहा 

ब्रिटेन के अखबार द गार्डियन ने लिखा कि पुलिस कार्रवाई के बावजूद प्रदर्शन कमजोर नहीं पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार की झड़पों के अगले दिन भी हजारों लोग जंतर-मंतर लौटे और आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया। अखबार ने दावा किया कि प्रदर्शन में 50 हजार से अधिक लोग शामिल हुए। रिपोर्ट के मुताबिक, जब प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़े तो पुलिस ने बैरिकेड लगाकर उन्हें रोक दिया। इसके बाद इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगाए जाने, आंसू गैस के गोले छोड़े जाने और लाठीचार्ज का भी उल्लेख किया गया। द गार्डियन ने यह भी लिखा कि आंदोलन अब केवल शिक्षा सुधार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बड़ी संख्या में युवा सरकार के प्रति असंतोष भी व्यक्त कर रहे हैं। वहीं, पुलिस का पक्ष भी प्रकाशित किया गया, जिसमें कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बताया गया।

अल जजीरा ने क्‍या कहा

कतर के समाचार चैनल अल जजीरा ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि पुलिस कार्रवाई के बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे हटने के लिए तैयार नहीं दिखे। रिपोर्ट के अनुसार, अगले ही दिन बड़ी संख्या में छात्र और युवा फिर जंतर-मंतर पहुंचे और आंदोलन जारी रखने की घोषणा की। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से आंदोलन पर तत्काल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई। वहीं, विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया। अल जजीरा ने विशेषज्ञों के हवाले से लिखा कि इस आंदोलन ने सरकार की जवाबदेही और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका को लेकर नई बहस को जन्म दिया है।

डॉन ने क्‍या कहा

पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन ने लिखा कि छात्र आंदोलन ने विपक्षी दलों को केंद्र सरकार पर हमला बोलने का नया अवसर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस कार्रवाई के बाद लगभग सभी प्रमुख विपक्षी दल प्रदर्शनकारियों के समर्थन में सामने आए। अखबार ने विश्लेषकों के हवाले से लिखा कि बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी और पुलिस कार्रवाई की तस्वीरों ने विपक्ष को युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाने का अवसर दिया है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि राजनीतिक बहस के बीच छात्रों की मूल मांगों के पीछे छूट जाने का जोखिम भी बना हुआ है। डॉन ने राहुल गांधी द्वारा छात्रों की मांगों का समर्थन करने और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग का भी उल्लेख किया।

बीबीसी ने क्‍या कहा

ब्रिटेन के सार्वजनिक प्रसारक BBC ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि पुलिस कार्रवाई के अगले दिन भी हजारों प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर एकत्र हुए और आंदोलन जारी रखा। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने प्रदर्शन स्थल पर बनाए गए अस्थायी मंच और टेंट भी हटाए। BBC ने कुछ प्रदर्शनकारियों के हवाले से लिखा कि कार्रवाई के दौरान महिलाओं के साथ भी बल प्रयोग किया गया। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पुलिस और केंद्र सरकार की ओर से लाठीचार्ज तथा आंसू गैस के इस्तेमाल पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई। रिपोर्ट में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान का भी उल्लेख किया गया। BBC के अनुसार, राहुल गांधी ने छात्रों की मांगों को उचित बताते हुए सरकार से जवाब मांगा और कांग्रेस सांसदों के साथ प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च किया।

वैश्विक मीडिया की निगाहों में भारतीय आंदोलन

दिल्ली में हुए इस प्रदर्शन को जिस तरह अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने व्यापक कवरेज दिया, उससे यह स्पष्ट होता है कि भारत में युवाओं से जुड़े आंदोलनों और लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों पर वैश्विक स्तर पर भी नजर रखी जा रही है। अलग-अलग मीडिया संस्थानों ने अपनी रिपोर्टों में प्रदर्शनकारियों, पुलिस और विपक्ष के बयानों को शामिल करते हुए घटनाक्रम के विभिन्न पहलुओं को सामने रखा। वहीं, आंदोलन से जुड़े दावों और आरोपों पर संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रियाओं का इंतजार भी बना हुआ है।

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