मोदी एक महिलाविरोधी इंसान पर ट्रंप से बेहतर - कन्हैया कुमार

कन्हैया कुमार का कहना है कि मोदी एक नारसेसिस्ट, महिलाविरोधी इंसान हैं पर ट्रंप से इस मामले में बेहतर हैं कि जनता के नज़र के सामने उसका हक और अधिकार छीन लेते हैं, और जनता को पता ही नहीं चलता

Update: 2017-01-30 14:19 GMT

नई दिल्ली, 29 जनवरी। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक नारसेसिस्ट, महिलाविरोधी इंसान हैं पर ट्रंप से इस मामले में बेहतर हैं कि जनता के नज़र के सामने उसका हक और अधिकार छीन लेते हैं, और जनता को पता ही नहीं चलता है।

देशबन्धु समाचार पत्र के समूह संपादक राजीव रंजन श्रीवास्तव के साथ वेब समाचार चैनल डीबी लाइव के खास कार्यक्रम “एक मुलाकात” में कन्हैया कुमार ने बड़ी बेबाकी से कई सवालों के जवाब दिए।

आजाद भारत में खासकर इस 21वीं सदी में आजादी शब्द कहते ही ध्यान आते हैं कन्हैया कुमार। जो आजादी का ऐसा सुर और तान छेड़ते हैं कि सुनने वाला जोश से भर उठता है। हालांकि उसे सुनकर खफा होने वाले लोगों की भी कमी नहीं है। 12 फरवरी 2016 से पहले देश के अधिकाँश लोग नहीं जानते थे कि कन्हैया कुमार कौन है? जेएनयू में पढ़ाई के साथ-साथ किस तरह की राजनैतिक, सामाजिक, वैचारिक हलचलें हो रही हैं? छात्रों की विचारधारा के आधार पर देशद्रोह और देशप्रेम की कौन सी नयी परिभाषाएं गढ़ी जा रही हैं और क्यों गढ़ी जा रही हैं। लेकिन अब कन्हैया कुमार देश के लिए जाना-पहचाना नाम है। पहले वे केवल अखिल भारतीय छात्र परिषद (एआईएसएफ) जो भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का स्टूडैंट विंग है, के नेता थे और 2015 में जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष पद के लिए चुने गए थे। लोकिन फरवरी 2016 को जब जेएनयू में मोहम्मद अफजल गुरु को फांसी के खिलाफ एक छात्र रैली में राष्ट्रविरोधी नारे लगाने के आरोप में उनपर देशद्रोह का मामला दर्ज हुआ और दिल्ली पुलिस द्वारा उन्हें गिरफ्तार किया गया तो लगातार 20 दिनों तक दिन और रात मीडिया के प्राइम टाइम की सुर्खियों में कन्हैया छाए रहे।

बेगूसराय से निकलकर दिल्ली तक का यह सफर कन्हैया के लिए कैसा रहा? वामपंथ की राजनीति की ओर झुकाव क्यों हुआ, जबकि उनकी उम्र के युवा अधिकतर पूंजीवादी संस्कृति के पोषक और प्रशंसक हो रहे हैं? सत्ता से सीधे टकराव में क्या उन्हें डर नहीं लगा? क्या उन्हें भविष्य की चिंता नहीं सताती कि एक गंभीर आरोप के बाद उन्हें रोजगार किस तरह मिलेगा?

इन तमाम सवालों के जवाब कन्हैया ने दिए।

उन्होंने कहा –

“सत्ता से डर जाते तो मोर्चा ही नहीं ले पाते। डर से हमेशा आगे बढ़ना होता है। जब आप जीवन के सचको जानते हैं तो आपके अंदर का घमंड भी टूटता है और आपके अंदर का डर भी कम होता है। अगर ज़िंदगी जीनी है तो बेहतरी के लिए जीनी है।“

कन्हैया ने कहा

 “जनता अगर अपने सवालों से नहीं उबर पा रही है, जो नीतियां लागू की जा रही हैं, उनसे उसे फायदा मिलने के बजाय नुकसान हो रहा है तो ये जनता का परम कर्तव्य है कि वो सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर जाए, और मैं उसी काम को करता हूँ।“

उन्होंने कहा

“मुझे उन मीडिया हाउस से कोई अपेक्षा ही नहीं है जो मीडिया के ईथिक्स को बेचकर सिर्फ और सिर्फ प्रधानमंत्री जी के साथ फोटो खिंचा करके राज्य सभा पहुंचना चाहते हैं। “

कन्हैया ने कहा

“मोदी जी ट्रंप से कई मामलों में बेहतर हैं। कि वो जनता के नज़र के सामने उसका हकऔर अधिकार छीन लेते हैं, और जनता को पता ही नहीं चलता है। जैसे मोदीजी भी महिला विरोधी हैं,लेकिन पता नहीं चलता। भाइयों बहनों कहते हैं तो लोगों को लगता है कि कितना महिला प्रेमी हैं। लेकिन वो इंसान अपनी पत्नी को कोई हक नहीं दिला पाया। नारसेसिस्ट वो इंसान है कि नब्बे साल की मां को लाइन में लगा दिया। अगर मेरी मां होती बूढ़ी तो मैं लाइन मेंजाकर लग जाता। उनका एक-एक एटीट्यूड महिला विरोधी है, लेकिन वो कभी पता नहीं चलता।“

पूरा साक्षात्कार देखते हैं -

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