मड़वा विद्युत संयंत्र निर्माण में भारी भ्रष्टाचार
रायपुर ! विद्युत कंपनी के उच्चअधिकारियों की लापरवाही से मड़वा में लगाया का 1000 मेगावाट का संयंत्र औचित्यहीन साबित हो रहा है। यहां 500-500 मेगावाट के दो संयंत्र लगाए गए है।;
रायपुर ! विद्युत कंपनी के उच्चअधिकारियों की लापरवाही से मड़वा में लगाया का 1000 मेगावाट का संयंत्र औचित्यहीन साबित हो रहा है। यहां 500-500 मेगावाट के दो संयंत्र लगाए गए है। जिनमें से एक जहां अब भी बंद है वही दुसरी इकाई 500 मेगवाट की जगह 300 से 350 मेगावाट बिजली ही दे रही है। वही अनुमाति लागत 6 हजार करोड़ रूपए की जगह कंपनी ने इस पर 9500 करोड़ रूपए खर्च किए है। इस प्रकार सीधे 3500 करोड़ की चपत कंपनी को लगी है इसका खामियाजा जनता को मंहगी बिजली खरीद कर चुकाना पड़ रहा है।
मड़वा में पावर कंपनी ने 1000 मेगावाट का विद्युत संयंत्र स्थातिपत किया है इसके निर्माण का ठेका हैदराबाद की एक कंपनी को 6000 करोड़ रूपए में दिया गया। पंाच-पंाच सौ मेगावाट के दो संयंत्रों में से एक इकाई का निर्माण मार्च 2015 एवं दुसरी यूनिट का निर्माण जून 2016 मेंं पूरा हुआ। पहली यूनिट विगत 6 माह से फुल रेटिंग की जगह 300 से 350 मेेगावाट बिजली ही उत्पादित कर रही है। चालू होने के बाद बंद हो गया। संयंत्र का कन्वेयर बेल्ट जल गया जिसमें लगभग 2500 करोड़ रूपए का खर्च आया इसका भुगतान हैदराबाद की ठेका कंपनी की जगह विद्युत मंडल ने किया और कंपनी के खराब काम के बदले उपकृत किया। विद्युत नियामक आयोग ने इसे कैसे मंजूरी दी यह समझ से परे है। मडवा प्रोजेक्ट को पूरा करने पावर कंपनी को 6 हजार करोड़ की जगह 9 हजार 5 सौ करौड़ रूपए लगे जो डेढ़ गुना से भी अधिक है। वही भुगतान मेंं 1000 मेगावट का यह संयंत्र केवल 300 से 350 मेगावाट बिजली ही उत्पादित कर रहा है। जिससे कंपनी को रोजाना लाखों रूपए का नुकसान हो रहा है। साथ ही लोगों को मंहगी बिजली के साथ अघोषित कटौत्ी से जूझना पड़ रहा है।