विधायकों के दबाव से मुक्त होने पर ही बहुमत परीक्षण होगा उपयुक्त: कमलनाथ
मध्य प्रदेश में तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोमवार को कांग्रेस के कई विधायकों को बंदी बनाये जाने का आरोप लगाया।
भोपाल। मध्य प्रदेश में तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोमवार को कांग्रेस के कई विधायकों को बंदी बनाये जाने का आरोप लगाया।
श्री कमलनाथ ने राज्यपाल लालजी टंडन को लिखे पत्र में यह आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कई विधायकों को बंदी बना लिया गया है और इस तरह की परिस्थिति में विधानसभा में बहुमत परीक्षण कराये जाने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने पत्र में जोर देकर कहा कि विधायकों के किसी तरह की बंदिश से बाहर रहने तथा पूरी तरह से दबाव मुक्त होने पर ही बहुमत परीक्षण कराना उचित होगा, अन्यथा यह सुनिश्चित रूप से अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक कदम होगा।
मुख्यमंत्री ने आज के पत्र में राज्यपाल को पूर्व में 13 मार्च को लिखे गये पत्र का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि कांग्रेस के कई विधायकों को बंदी बनाकर कर्नाटक ले जाया गया है और वहां की पुलिस के नियंत्रण में रखकर उनसे विभिन्न प्रकार के बयान लिखवाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कांग्रेस के विधायकों को रिश्वत और अन्य प्रलोभन देकर अपने पक्ष में करने का षडयंत्र रच रही है।
इससे पहले आज पूर्वाह्न करीब 11 बजे विधानसभा के बजट सत्र की शुरूआत हुई। राज्यपाल ने अभिभाषण पढ़ने की औपचारिकता के बाद सदन के सदस्यों से अपनी जिम्मेदारियों को निभाने की अपील की। इसके बाद वह सदन से चले गये।
राज्यपाल को विदा करने के बाद विधानसभा सभा अध्यक्ष एन पी प्रजापति ने जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू की वैसे ही हंगामा शुरू हो गया। हंगामे को देखते हुए अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही कुछ देर के लिए स्थगित कर दी। कार्यवाही फिर शुरू होने पर सत्ता और विपक्ष के सदस्यों ने फिर शोरशराबा शुरू कर दिया।
लगातार के हंगामे की स्थिति को देखते हुए श्री प्रजापति ने सदन की कार्यवाही 26 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी।