महिलाओं की पहचान खुद से, हिंसा और भेदभाव पर कड़ा सवाल : राहुल गांधी

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में महिलाओं की आजादी और पितृसत्ता पर खुलकर बात की;

By :  Deshbandhu
Update: 2026-08-22 16:50 GMT

पुणे में राहुल गांधी बोले: महिलाओं की पहचान खुद से

  • पितृसत्ता और कंट्रोल पर खुली चर्चा
  • 60% लड़कियां अकेले बाहर नहीं जा सकतीं
  • ‘बी लाउड, बी प्राउड’ - छात्राओं से सीधी अपील

पुणे। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में महिलाओं की आजादी और पितृसत्ता पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि महिलाओं की पहचान उनके पिता, पति या बेटे से नहीं, बल्कि उनकी अपनी होती है।

महिलाओं पर तीन तरह की हिंसा

राहुल ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ तीन तरह की हिंसा होती है:-

  • पैदा होते ही हत्या
  • शारीरिक अत्याचार
  • आर्थिक बंदिशें

उन्होंने कहा कि महिलाओं को शिक्षा, नौकरी, संपत्ति और अपने फैसले लेने की पूरी आजादी मिलनी चाहिए।

पितृसत्ता और नियंत्रण पर चर्चा

राहुल ने छात्राओं से बातचीत करते हुए कहा कि समाज महिलाओं को नियंत्रित करने के लिए हिंसा, अपमान, समय और कंट्रोल जैसे तरीके अपनाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्यों लड़कियों को पढ़ाई और नौकरी से रोका जाता है, जबकि लड़कों को पूरी स्वतंत्रता दी जाती है।

महिलाओं की शिक्षा और रोजगार

राहुल ने आंकड़े साझा करते हुए कहा कि 60% लड़कियां अकेले घर से बाहर नहीं जा सकतीं, 45% शादी या घरेलू काम के कारण पढ़ाई छोड़ देती हैं और सिर्फ 8% महिलाओं के पास अपनी संपत्ति है। उन्होंने इसे “फिजिकल और फाइनेंशियल कंट्रोल” का उदाहरण बताया।

छात्राओं से सीधी अपील

राहुल ने कहा कि लड़कियों को डरना नहीं चाहिए। उनका संदेश था— “बी लाउड, बी प्राउड एंड फाइट फॉर योरसेल्फ”। उन्होंने कहा कि समाज के बनाए “पिंजरे” को तोड़ना होगा और अपनी आवाज बुलंद करनी होगी।

कार्यक्रम की खास बातें:-

  • राहुल ने मंच पर कई छात्राओं से बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं।
  • भोजपुरी गायिका नेहा राठौर ने भी मंच से अपने अनुभव साझा किए और कहा कि सरकार से सवाल करने पर उन्हें ट्रोलिंग और FIR का सामना करना पड़ता है।
  • राहुल ने मराठी में कहा- “पुणे मंजे प्रेम” और छात्राओं को भरोसा दिलाया कि उनकी आवाज़ को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाएगा।

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