NEET पेपर लीक केस में बड़ी कार्रवाई: लातूर के कोचिंग संचालक शिवराज मोटेगावकर गिरफ्तार
शिवराज मोटेगावकर महाराष्ट्र के लातूर में एक प्रसिद्ध कोचिंग नाम के तौर पर जाने जाते हैं। वे “रेणुकाई करियर सेंटर (RCC)” नाम से कोचिंग संस्थान चलाते हैं, जो लातूर और आसपास के क्षेत्रों में मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए एक बड़ा ब्रांड माना जाता है।;
लातूर: NEET Paper Leak: नीट यूजी पेपर लीक मामले की जांच में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र के लातूर से कोचिंग संचालक शिवराज मोटेगावकर को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह गिरफ्तारी उस कड़ी का अहम हिस्सा मानी जा रही है जिसमें पहले भी कई लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। शिवराज मोटेगावकर का नाम सामने आने के बाद मामले की जांच और तेज हो गई है। सीबीआई ने उन्हें उस समय रडार पर लिया जब एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें वह अपने संस्थान के छात्रों से यह पूछते नजर आए कि मॉक टेस्ट में पूछे गए कितने प्रश्न वास्तविक नीट परीक्षा में आए थे। जांच में दावा किया गया कि उनके संस्थान के मॉक टेस्ट के कई प्रश्न परीक्षा के प्रश्नों से मिलते-जुलते या हूबहू थे, जिनमें केमिस्ट्री के 42 सवालों का मेल सामने आने की बात कही गई।
कौन हैं शिवराज मोटेगावकर
शिवराज मोटेगावकर महाराष्ट्र के लातूर में एक प्रसिद्ध कोचिंग नाम के तौर पर जाने जाते हैं। वे “रेणुकाई करियर सेंटर (RCC)” नाम से कोचिंग संस्थान चलाते हैं, जो लातूर और आसपास के क्षेत्रों में मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए एक बड़ा ब्रांड माना जाता है। करीब दो दशक पहले शुरू हुआ RCC आज एक बड़े कोचिंग नेटवर्क में बदल चुका है। शुरुआत एक छोटे कमरे से हुई थी, लेकिन समय के साथ यह संस्थान महाराष्ट्र के कई शहरों जैसे पुणे, नासिक, छत्रपति संभाजीनगर, नांदेड़, सोलापुर और कोल्हापुर तक फैल गया।
‘M सर’ के नाम से लोकप्रिय
शिवराज मोटेगावकर को उनके छात्र और शिक्षा जगत में “M सर” के नाम से भी जाना जाता है। बताया जाता है कि उनके पढ़ाने का तरीका विशेष रूप से केमिस्ट्री को सरल भाषा में समझाने पर केंद्रित है, जिसकी वजह से वे छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय रहे हैं। RCC कोचिंग संस्थान का कारोबार भी समय के साथ तेजी से बढ़ा है। मौजूदा रिपोर्ट्स के अनुसार, संस्थान का टर्नओवर करीब 100 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। लातूर क्षेत्र में इसे शिक्षा आधारित अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ भी माना जाता है।
ट्यूशन से बना बड़ा संस्थान
शिवराज मोटेगावकर का शुरुआती जीवन बेहद साधारण था। वे एक किसान परिवार से आते हैं और उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक ट्यूशन शिक्षक के रूप में की थी। शुरुआती दिनों में वे साइकिल से छात्रों के घर जाकर साइंस पढ़ाते थे। 1999 में उन्होंने मात्र 10 छात्रों के साथ एक किराए के कमरे में कोचिंग की शुरुआत की थी। उस समय वे मुख्य रूप से 11वीं-12वीं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले छात्रों को केमिस्ट्री पढ़ाते थे। धीरे-धीरे छात्रों की संख्या बढ़ी और कोचिंग ने एक संस्थान का रूप ले लिया।
महाराष्ट्र में बड़ा नेटवर्क
आज RCC कोचिंग में 40 हजार से अधिक छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। संस्थान ने NEET, JEE और CET जैसी प्रमुख परीक्षाओं की तैयारी कराने में मजबूत पहचान बनाई है। महाराष्ट्र में यह कोचिंग नेटवर्क एक बड़े ब्रांड के रूप में स्थापित हो चुका है, जहां हर साल हजारों छात्र प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए दाखिला लेते हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के जरिए भी इसकी उपस्थिति मजबूत बताई जाती है।
जांच के घेरे में मॉक टेस्ट और पेपर पैटर्न
जांच एजेंसियों के अनुसार, वायरल वीडियो और मॉक टेस्ट पैटर्न ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है। दावा है कि संस्थान के मॉक टेस्ट में पूछे गए कई प्रश्न वास्तविक परीक्षा में शामिल प्रश्नों से मेल खाते थे, जिससे पेपर लीक या अनियमितता की आशंका को बल मिला। सीबीआई इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या प्रश्न पत्र किसी आंतरिक नेटवर्क या अन्य माध्यम से पहले से उपलब्ध कराया गया था। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस प्रक्रिया में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।
जांच जारी
फिलहाल शिवराज मोटेगावकर की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ा दिया गया है। सीबीआई इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में लगी हुई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि पेपर लीक की वास्तविक श्रृंखला कहां से शुरू हुई और किन स्तरों तक फैली हुई थी।