महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता की तैयारी तेज, रंजना देसाई समिति करेगी अध्ययन; शीतकालीन सत्र में आ सकता है UCC विधेयक

सरकार के अनुसार समिति को छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को सौंपनी होगी। रिपोर्ट में यह आकलन किया जाएगा कि महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए किन कानूनी बदलावों, प्रशासनिक व्यवस्थाओं और सामाजिक पहलुओं पर ध्यान देना आवश्यक होगा। इसके आधार पर सरकार आगे की विधायी प्रक्रिया तय करेगी।;

Update: 2026-07-10 04:55 GMT
मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) लागू करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए एक महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में घोषणा की कि यूसीसी से जुड़े कानूनी, सामाजिक और प्रशासनिक पहलुओं का व्यापक अध्ययन करने के लिए सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति की अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना देसाई करेंगी। सरकार का लक्ष्य समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद इस वर्ष के अंत में होने वाले नागपुर शीतकालीन सत्र में यूसीसी से संबंधित विधेयक पेश करना है।

छह महीने में रिपोर्ट सौंपेगी समिति

सरकार के अनुसार समिति को छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को सौंपनी होगी। रिपोर्ट में यह आकलन किया जाएगा कि महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए किन कानूनी बदलावों, प्रशासनिक व्यवस्थाओं और सामाजिक पहलुओं पर ध्यान देना आवश्यक होगा। इसके आधार पर सरकार आगे की विधायी प्रक्रिया तय करेगी।

समिति में शामिल हैं ये विशेषज्ञ

रंजना देसाई के नेतृत्व वाली समिति में न्यायपालिका, प्रशासन, कानून और शिक्षा क्षेत्र के अनुभवी विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। सदस्यों में उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश आर.सी. चव्हाण और न्यायमूर्ति एस.जी. मेहरे, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव डी.के. जैन, राज्य के पूर्व महाधिवक्ता वीरेंद्र श्राफ, संविधान विशेषज्ञ एवं वरिष्ठ विचारक रमेश पतंगे तथा शिक्षाविद डॉ. सुवर्णा रावल शामिल हैं। सरकार का मानना है कि विविध क्षेत्रों के विशेषज्ञों की भागीदारी से समिति संतुलित और व्यापक सुझाव दे सकेगी।

मुख्यमंत्री ने बताया सरकार का उद्देश्य

विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि राज्य सरकार संविधान और कानून के दायरे में रहते हुए समान नागरिक संहिता लागू करना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजना नागपुर में होने वाले शीतकालीन सत्र में यूसीसी विधेयक पेश करने और उसे विधानसभा तथा विधान परिषद दोनों सदनों से पारित कराने का प्रयास करने की है।मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल संविधान के नीति निदेशक तत्वों में शामिल अनुच्छेद 44 की भावना के अनुरूप है। उनके अनुसार समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करना, कानून के समक्ष समानता को मजबूत करना और महिलाओं को समान अधिकार उपलब्ध कराना है।

अनुच्छेद 44 का दिया गया हवाला

फडणवीस ने अपने वक्तव्य में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और समान अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। सरकार का तर्क है कि अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के बजाय एक समान नागरिक व्यवस्था नागरिकों के बीच समानता को बढ़ावा देगी।

राजनीतिक और सामाजिक बहस हुई तेज

सरकार की घोषणा के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में यूसीसी को लेकर बहस तेज हो गई है। सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन इसे राष्ट्रीय एकता, महिला सशक्तीकरण और सामाजिक समानता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बता रहा है। वहीं विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक संगठनों ने इसके समय, प्रक्रिया तथा धार्मिक और सांस्कृतिक विविधताओं पर संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठाए हैं। विशेष रूप से महाराष्ट्र की राजनीति में सक्रिय विभिन्न दलों के लिए यह मुद्दा राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यूसीसी पर अलग-अलग दलों का रुख आगामी चुनावी रणनीतियों को प्रभावित कर सकता है।

राष्ट्रीय राजनीति पर भी रहेगी नजर

देश की आर्थिक राजधानी और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य महाराष्ट्र में यूसीसी लागू करने की कवायद का असर केवल राज्य तक सीमित नहीं रह सकता। यदि समिति की रिपोर्ट के आधार पर सरकार विधेयक लाती है और उसे मंजूरी मिलती है, तो यह राष्ट्रीय स्तर पर भी समान नागरिक संहिता पर चल रही बहस को नई दिशा दे सकता है। फिलहाल सभी की नजरें समिति की रिपोर्ट और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।
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