महाराष्ट्र में मुलाकातों से बढ़ी हलचल, शरद पवार-शिंदे बैठक और तावड़े-जयंत पाटिल की चर्चा पर NDA में शामिल होने की अटकलें तेज

बुधवार को महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद से जुड़े मुद्दों पर आयोजित बैठक में हिस्सा लेने के लिए शरद पवार विधानभवन पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि इस विषय पर आयोजित किसी आधिकारिक बैठक में वह लगभग 28 वर्षों बाद शामिल हुए। बैठक के दौरान उन्होंने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के केबिन में जाकर उनसे मुलाकात की।;

Update: 2026-07-10 05:04 GMT

मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में बुधवार को हुई कई अहम मुलाकातों ने सियासी अटकलों का दौर तेज कर दिया। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) के अध्यक्ष शरद पवार की विधानसभा परिसर में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात और इसके कुछ समय बाद भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े तथा एनसीपी (शरद पवार) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल की मुंबई के एक होटल में हुई बैठक ने राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों को लेकर चर्चाओं को हवा दे दी। हालांकि भाजपा, शिंदे गुट और शरद पवार की पार्टी ने इन अटकलों को पूरी तरह खारिज करते हुए इन्हें सामान्य राजनीतिक मुलाकातें बताया है।

सीमा विवाद की बैठक में पहुंचे थे शरद पवार

बुधवार को महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद से जुड़े मुद्दों पर आयोजित बैठक में हिस्सा लेने के लिए शरद पवार विधानभवन पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि इस विषय पर आयोजित किसी आधिकारिक बैठक में वह लगभग 28 वर्षों बाद शामिल हुए। बैठक के दौरान उन्होंने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के केबिन में जाकर उनसे मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने उसी परिसर में अपनी पार्टी के विधायकों के साथ भी बैठक की। शरद पवार और एकनाथ शिंदे की यह मुलाकात सामने आते ही राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। विपक्ष और सत्ता पक्ष के नेताओं ने इसे अलग-अलग नजरिए से देखा और संभावित राजनीतिक बदलावों को लेकर कयास लगाए जाने लगे।

दोनों पक्षों ने बताया औपचारिक संवाद

मुलाकात के बाद शिंदे गुट और एनसीपी (शरद पवार) की ओर से स्पष्ट किया गया कि यह पूरी तरह औपचारिक मुलाकात थी। दोनों पक्षों का कहना है कि विधानभवन में विभिन्न दलों के वरिष्ठ नेताओं के बीच इस प्रकार की मुलाकातें सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा होती हैं और इन्हें किसी नए राजनीतिक समीकरण से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। पार्टी नेताओं ने कहा कि बैठक का उद्देश्य किसी गठबंधन या राजनीतिक समझौते पर चर्चा करना नहीं था, बल्कि यह विधानसभा की कार्यवाही के दौरान हुई सामान्य बातचीत थी।

संजय राउत के बयान से बढ़ी सियासी गर्मी

इस घटनाक्रम के बाद शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत ने शरद पवार की भूमिका को लेकर सवाल उठाए और तंज कसते हुए कई राजनीतिक टिप्पणियां कीं। राउत के बयान के बाद राज्य की राजनीति में बयानबाजी और तेज हो गई। राउत की टिप्पणी का जवाब देते हुए एनसीपी (शरद पवार) के विधायक जितेंद्र आह्वाड ने कहा कि वरिष्ठ नेताओं की औपचारिक मुलाकातों का अनावश्यक राजनीतिक अर्थ निकालना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना तथ्यों के बयान देकर भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है। आह्वाड ने यह भी कहा कि राजनीतिक शिष्टाचार और संस्थागत संवाद को विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।

तावड़े और जयंत पाटिल की बैठक भी चर्चा में

इसी बीच भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े और एनसीपी (शरद पवार) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल की मुंबई के एक होटल में हुई मुलाकात की जानकारी भी सामने आई। इस बैठक ने राजनीतिक चर्चाओं को और गति दे दी। दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद यह अटकलें लगाई जाने लगीं कि महाराष्ट्र की राजनीति में भविष्य को लेकर किसी नई रणनीति पर विचार-विमर्श हो सकता है। 

एनडीए में शामिल होने की अटकलों पर विराम

शरद पवार, एकनाथ शिंदे और भाजपा नेताओं की इन मुलाकातों को जोड़ते हुए राजनीतिक हलकों में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या एनसीपी (शरद पवार) भविष्य में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का हिस्सा बन सकती है। इन अटकलों के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया। फडणवीस ने कहा कि फिलहाल एनडीए में किसी नए राजनीतिक दल को शामिल करने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा का पूरा ध्यान अपने संगठन को और मजबूत करने पर है तथा गठबंधन विस्तार को लेकर इस समय कोई विचार नहीं किया जा रहा है।

अटकलों के बीच राजनीतिक संकेतों पर नजर

हालांकि संबंधित सभी दलों ने इन मुलाकातों को सामान्य और औपचारिक बताया है, लेकिन महाराष्ट्र की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों में ऐसे घटनाक्रम स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन जाते हैं। आने वाले महीनों में स्थानीय निकाय चुनावों और अन्य राजनीतिक गतिविधियों के मद्देनजर राज्य में विभिन्न दलों की रणनीतियों पर नजर बनी रहेगी। फिलहाल इन मुलाकातों ने राजनीतिक हलकों में चर्चा जरूर तेज कर दी है, लेकिन किसी नए गठबंधन या राजनीतिक पुनर्संरचना की आधिकारिक पुष्टि अब तक सामने नहीं आई है।

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