मुंबई में जैश का 'स्लीपर एजेंट' गिरफ्तार, 6 माह से युवाओं की आईएसआईएस में कर रहा था भर्ती
महाराष्ट्र में आतंकी गतिविधियों से जुड़े ऑनलाइन नेटवर्क को लेकर महाराष्ट्र एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (एटीएस) की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं
मुंबई। महाराष्ट्र में आतंकी गतिविधियों से जुड़े ऑनलाइन नेटवर्क को लेकर महाराष्ट्र एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (एटीएस) की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। मुंबई में की गई छापेमारी के बाद एटीएस ने इंजीनियरिंग छात्र अयान शेख को गिरफ्तार किया है, जिस पर पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) से संबंध रखने का आरोप है।
एटीएस की प्रारंभिक जांच के मुताबिक अयान शेख पिछले करीब छह महीनों से मुंबई में रहकर जैश-ए-मोहम्मद के लिए स्लीपर एजेंट के तौर पर काम कर रहा था। एजेंसी का दावा है कि संगठन ने उसे युवाओं को कट्टरपंथ की ओर मोड़ने और नए लोगों की भर्ती करने की जिम्मेदारी दी थी। इसी काम के तहत वह अपने साथ पढ़ने वाले दो छात्रों और कई करीबी दोस्तों को आतंकी संगठन के लिए काम करने के लिए लगातार ब्रेनवॉश कर रहा था।
जांच में सामने आया है कि अयान शेख ने अपने दो दोस्तों को इस कदर प्रभावित कर दिया था कि वे देश छोड़कर बाहर जाने और आतंकी गतिविधियों में शामिल होने की योजना बनाने लगे थे। एटीएस ने दोनों छात्रों के बयान दर्ज कर लिए हैं। हालांकि जांच एजेंसी के अनुसार अभी तक यह सामने नहीं आया है कि वे किसी आतंकी गतिविधि में सक्रिय रूप से शामिल हुए थे।
एटीएस को यह भी पता चला है कि इस नेटवर्क को चलाने के लिए अयान को पाकिस्तान और सऊदी अरब से फंडिंग मिल रही थी। यह रकम क्रिप्टोकरेंसी के जरिए भेजी जा रही थी। एजेंसी अब उसके बैंक खातों और मनी ट्रेल की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसे कुल कितनी रकम मिली और वह किन-किन लोगों तक पहुंची।
जांच के दौरान अयान के मोबाइल फोन से कई अहम सबूत भी बरामद हुए हैं। एटीएस को उसके फोन में जैश-ए-मोहम्मद के सरगना अजहर मसूद और अन्य आतंकी प्रचार सामग्री से जुड़े कई ऑडियो और वीडियो मिले हैं। इसके अलावा, वह टेलीग्राम चैनलों और अन्य एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर भी सक्रिय था, जहां कट्टरपंथी सामग्री साझा की जाती थी।
एजेंसी को कई चैट रिकॉर्ड भी मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि आतंकी भर्ती को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही थी। अयान इन प्लेटफॉर्म्स पर युवाओं को जोड़ने और उन्हें आतंकी संगठनों के प्रचार वाले ग्रुप में शामिल कराने की कोशिश करता था।
एटीएस के मुताबिक इन एन्क्रिप्टेड ग्रुप्स में कई विदेशी नागरिक और संदिग्ध फैसिलिटेटर भी शामिल थे, जिन्हें आतंकी संगठनों के स्लीपर नेटवर्क और भर्ती सेल का हिस्सा माना जा रहा है। जांच में यह भी सामने आया है कि देश के अलग-अलग राज्यों के कई युवा इन ग्रुप्स के सदस्य थे।
एटीएस ने इस मामले से जुड़ी जानकारी अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ भी साझा की है। एजेंसी का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।