धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, छात्रों की मांग जायज; सरकार जवाबदेही से भाग रही है: प्रियंका चतुर्वेदी

शिवसेना (यूबीटी) की दिग्गज नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर तीखा हमला बोलते हुए उनके इस्तीफे की मांग की;

Update: 2026-07-22 22:10 GMT

मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) की दिग्गज नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर तीखा हमला बोलते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि नीट समेत विभिन्न परीक्षाओं में लगातार हुई कथित गड़बड़ियों और छात्रों के आंदोलन को संभालने में सरकार विफल रही है। सरकार छात्रों की आवाज सुनने के बजाय दमन का रास्ता अपना रही है और लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शनों को दबाने का प्रयास कर रही है।

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को लंबे-लंबे एक्स पोस्ट लिखने के बजाय अपनी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए। छात्रों की मांग पूरी तरह स्पष्ट है और वे किसी राजनीतिक एजेंडे के तहत प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं। छात्र न तो राजनीति कर रहे हैं और न ही कोई अनुचित मांग रख रहे हैं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा मंत्री अपने सोशल मीडिया पोस्ट के नीचे आए हजारों लोगों के कमेंट पढ़ लें, तो उन्हें यह समझ में आ जाएगा कि देश का जनमत क्या है। सरकार अपनी विफलताओं का दोष दूसरों पर मढ़ने की कोशिश कर रही है। छात्रों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर करने की जिम्मेदारी स्वयं सरकार की है।

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि देश का युवा आज पहले से कहीं अधिक जागरूक है और इसी कारण वह अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर हुआ है। केंद्र सरकार अहंकार से भरी हुई है और उसे तब तक कोई निर्णय लेना मंजूर नहीं होता, जब तक जनता आंदोलन न करे। सत्ता में बैठे लोगों को अपनी अंतरात्मा से सवाल करना चाहिए कि क्या वे अपनी नैतिक जिम्मेदारी निभा रहे हैं। नीट परीक्षा से जुड़ी अव्यवस्थाओं के कारण 22 से अधिक छात्रों ने आत्महत्या की और उनके परिजन आज जंतर-मंतर पर न्याय की मांग को लेकर बैठे हैं। विभिन्न आयु वर्ग के छात्रों और उनके परिवारों का दुख सरकार को समझना चाहिए, लेकिन इसके बजाय मंत्री सोशल मीडिया पर लंबी-लंबी बातें कर रहे हैं।

शिवसेना (यूबीटी) नेता ने आरोप लगाया कि सरकार लोकतंत्र और संविधान की भावना को कमजोर कर रही है। संसद में लगातार इस मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग की गई, लेकिन सरकार चर्चा से बचती रही। छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले दागे जाने और बड़ी संख्या में छात्रों को हिरासत में लिए जाने जैसी घटनाएं बेहद दुखद हैं। देश के इतिहास में अपने ही युवाओं के साथ इस प्रकार का व्यवहार बहुत कम देखने को मिला है।

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के नेतृत्व में शिक्षा व्यवस्था लगातार विफल रही है। नीट-यूजी परीक्षा और अन्य महत्वपूर्ण परीक्षाओं में पेपर लीक जैसी घटनाओं ने छात्रों का विश्वास कमजोर किया है। पेपर लीक माफिया और अधिक मजबूत हुआ है, इसलिए शिक्षा मंत्री का पद पर बने रहना उचित नहीं है। सरकार किसी भी कीमत पर इस विषय पर संसद में चर्चा नहीं होने देना चाहती।

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलनों और सोनम वांगचुक के विरोध-प्रदर्शन के बावजूद सरकार ने उनकी बात नहीं सुनी। इसी कारण कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेता प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे। विपक्ष के नेताओं को हिरासत में लेना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है। लोकसभा और राज्यसभा के विपक्ष के नेताओं को हिरासत में लेना सरकार के बढ़ते अहंकार का प्रमाण है और जनता लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देगी।

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि उद्धव ठाकरे लगातार छात्रों की आवाज उठा रहे हैं और मुंबई में भी छात्र आंदोलनों में शामिल हुए थे। आदित्य ठाकरे ने एक कानूनी टीम गठित की है, ताकि प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए छात्रों को हरसंभव कानूनी सहायता मिल सके। सोनम वांगचुक भी 'मातोश्री' जाकर अपनी मांगों पर चर्चा कर चुके हैं। दिल्ली और मुंबई में छात्रों के खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद उद्धव ठाकरे के निर्देश पर पार्टी नेताओं ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया। उन्होंने छात्र नेता अभिजीत दिपके के नेतृत्व की भी सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्र एकजुट हुए हैं और उन्हें उम्मीद है कि सरकार शिक्षा मंत्री के खिलाफ कार्रवाई करेगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष विपक्ष पर आरोप लगाने में व्यस्त है, जबकि जवाबदेही उसकी अपनी बनती है। उन्होंने कहा कि 900 से अधिक छात्रों को हिरासत में लिया गया और सरकार विपक्ष की आलोचना करने में लगी हुई है। विपक्ष केवल छात्रों के समर्थन में खड़ा है, जबकि सरकार छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल कर रही है।

नेपाल जैसी स्थिति पैदा करने अथवा विदेशी ताकतों की साजिश संबंधी आरोपों को प्रियंका चतुर्वेदी ने पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास के बाहर विरोध-प्रदर्शन कोई पहली बार नहीं हुआ है और इसे असाधारण घटना की तरह पेश करना गलत है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी जैसे नेताओं के पास उच्च स्तरीय सुरक्षा होने के बावजूद वे छात्रों के समर्थन में सड़क पर उतरे। भारत की युवा पीढ़ी लोकतंत्र और संविधान में विश्वास करती है और शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रही है। दिल्ली पुलिस की कार्रवाई ही सबसे अधिक चिंताजनक रही है।

सरकार द्वारा विदेशी हस्तक्षेप की आशंका जताने पर प्रियंका चतुर्वेदी ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में विदेशी ताकतें देश के भीतर अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रही हैं, तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की है। यदि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, तो गृह मंत्री और प्रधानमंत्री इस कथित विदेशी हस्तक्षेप को रोकने में सफल क्यों नहीं हुए। सरकार अपनी नाकामी छिपाने के लिए कभी पाकिस्तान, कभी चीन और अब विदेशी साजिश जैसे मुद्दे उठाती है। यह पूरी तरह जवाबदेही से बचने और छात्रों के वास्तविक मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाने का प्रयास है।

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