यूसीसी पर भाजपा का दो टूक रुख, संजय उपाध्याय बोले-पूरे देश में होना चाहिए लागू
भाजपा विधायक संजय उपाध्याय ने कहा कि पार्टी यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने का समर्थन करती है। उन्होंने टीएमसी के शासनकाल में हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का वादा किया;
मुंबई। भाजपा विधायक संजय उपाध्याय ने कहा कि पार्टी यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने का समर्थन करती है। उन्होंने टीएमसी के शासनकाल में हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का वादा किया और कहा कि राम मंदिर चढ़ावा मामले में दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने यूसीसी के मुद्दे पर कहा कि एक देश में दो विधान नहीं हो सकते।
भाजपा विधायक संजय उपाध्याय ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी और उससे पहले जनसंघ अपनी स्थापना से यूनीफॉर्म सिविल कोर्ट (यूसीसी) की वकालत करता आया है। देश के कई राज्यों में यूसीसी लागू किया गया है। महाराष्ट्र के सदन में जल्द ही यूसीसी लाने की बात कही गई है। वहीं पश्चिम बंगाल में इसकी शुरुआत होने वाली है। पूरे देश में यूसीसी लागू होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी के शासनकाल के दौरान भ्रष्टाचार से लोग त्रस्त थे और उसके कारण सत्ता परिवर्तन हुआ है। भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई होनी जरूरी है। मुझे पूरा विश्वास है कि सीएम सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भ्रष्टाचार की फाइलें खोलकर दोषियों से कालाधन निकालकर सलाखों के पीछे डालने का काम करेंगे।
भाजपा विधायक संजय उपाध्याय ने कहा कि राम मंदिर के चढ़ावे में भ्रष्टाचार और त्रुटियों को लेकर एसआईटी का गठन हुआ हैं। इस मामले में एफआईआर भी रजिस्टर हुआ है। भारतीय जनता पार्टी किसी भी दोषी को नहीं छोड़गी, अपराधी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
वहीं, बंगाल सरकार के सोमवार को विधानसभा में यूसीसी बिल पेश करने की संभावना पर भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने कहा, "एक देश में 'एक देश, दो विधान' नहीं हो सकते। डॉ. बीआर अंबेडकर भी यूनिफॉर्म सिविल कोड के समर्थक थे। पिछले 50-60 साल में कांग्रेस की सरकारों ने तुष्टीकरण की राजनीति के कारण यूसीसी एजेंडे को ठंडे बस्ते में रखा। आज देश के हर व्यक्ति की आशा और इच्छा है कि एक ही विधान हो।"
उन्होंने कहा कि बाबा साहेब अंबेडकर के मूल संविधान की आत्मा के विरोधी हैं और तुष्टीकरण की राजनीति का पोषण करते हैं। तुष्टीकरण की राजनीति को खत्म किया जाएगा और एक देश में दो विधान कभी नहीं हो सकते।