महाकुंभ से ग्लैमर तक: इंफ्लूएंसर हर्षा रिछारिया ने धर्म प्रचार से दूरी बनाने का किया ऐलान

हर्षा ने कहा, “प्रयागराज महाकुंभ के दौरान मुझे बहुत विरोध का सामना करना पड़ा। मैं कोई गलत काम नहीं कर रही थी, लेकिन धर्म के रास्ते पर चलते हुए जो कुछ भी कर रही थी, उसे बार-बार रोका गया। लगातार सवाल उठाए गए और मेरा मनोबल तोड़ा गया।”

Update: 2026-01-15 06:40 GMT
प्रयागराज/जबलपुर। प्रयागराज महाकुंभ–2025 के दौरान सुर्खियों में आईं इंफ्लूएंसर हर्षा रिछारिया ने अब धर्म और सत्संग से दूरी बनाने का फैसला किया है। इस फैसले की जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक भावुक वीडियो के जरिए दी है। वीडियो में हर्षा ने खुलकर बताया कि किस तरह धर्म के रास्ते पर चलते हुए उन्हें लगातार विरोध, सवालों और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ा, जिसने उनका मनोबल तोड़ दिया। हर्षा रिछारिया महाकुंभ के दौरान निरंजनी अखाड़े की पेशवाई में नजर आने के बाद अचानक चर्चा में आ गई थीं। सोशल मीडिया पर उन्हें “सबसे सुंदर साध्वी” कहा जाने लगा, जिसके बाद उनके जीवन और आस्थाओं को लेकर बहस तेज हो गई।

नर्मदा स्नान के दौरान बोलीं: “अब धर्म प्रचार से दूरी”
महाकुंभ के बाद हर्षा हाल ही में मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित नर्मदा नदी के गौरीघाट पहुंचीं, जहां उन्होंने डुबकी लगाई। इसी दौरान उन्होंने मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म पर अपनी बात रखते हुए कहा कि अब वह धर्म के खुले प्रचार-प्रसार से दूरी बनाएंगी और दोबारा ग्लैमर और एंकरिंग की दुनिया में लौटने का मन बना चुकी हैं। हर्षा ने कहा, “प्रयागराज महाकुंभ के दौरान मुझे बहुत विरोध का सामना करना पड़ा। मैं कोई गलत काम नहीं कर रही थी, लेकिन धर्म के रास्ते पर चलते हुए जो कुछ भी कर रही थी, उसे बार-बार रोका गया। लगातार सवाल उठाए गए और मेरा मनोबल तोड़ा गया।”

“धर्म को धंधा बनाने के आरोप पूरी तरह गलत”
हर्षा रिछारिया ने अपने ऊपर लगे आरोपों पर भी खुलकर सफाई दी। उन्होंने कहा कि उन पर धर्म को धंधा बनाकर करोड़ों रुपये कमाने के आरोप लगाए गए, जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है। उनके मुताबिक, “जब मैं धर्म के रास्ते पर नहीं थी, तब मेरी एंकरिंग का काम काफी अच्छा चल रहा था। मैं विदेशों में काम करके अच्छा पैसा कमा रही थी। लेकिन पिछले एक साल में विवादों और विरोध की वजह से मेरी आर्थिक स्थिति खराब हो गई है।” उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर मिली पहचान ने जहां उन्हें प्रसिद्धि दी, वहीं दूसरी ओर उनके काम और आमदनी पर नकारात्मक असर भी डाला।

बचपन का सपना और संघर्ष की कहानी
हर्षा ने अपने बचपन के सपने और संघर्षों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वह बचपन से ही भारतीय वायुसेना में फाइटर प्लेन उड़ाना चाहती थीं, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण उन्हें कम उम्र में ही काम करना पड़ा। उन्होंने कहा, “मेरे सपने बहुत बड़े थे, लेकिन हालातों ने मुझे जल्दी जिम्मेदार बना दिया। अब मैं एक बार फिर अपने करियर और आत्मनिर्भरता पर ध्यान देना चाहती हूं।”

“सनातन धर्म से मोहभंग नहीं हुआ”
हर्षा रिछारिया ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका सनातन धर्म से मोहभंग नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि वह आस्था में विश्वास रखती हैं, लेकिन अब धर्म के सार्वजनिक प्रचार से खुद को अलग कर रही हैं। उनके शब्दों में, “मैं धर्म छोड़ नहीं रही हूं। मैं सिर्फ धर्म के खुले प्रचार-प्रसार से दूरी बना रही हूं।”

धर्म की विडंबना पर बयान
वीडियो में हर्षा भावुक भी नजर आईं। उन्होंने कहा कि धर्म की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जब धर्म की बात आती है, तो सबसे पहले संघर्ष अपने ही धर्म के लोगों से करना पड़ता है। उन्होंने कहा, “हमें पहले अपने ही धर्म के लोगों के सवालों के जवाब देने पड़ते हैं, उनके शक दूर करने पड़ते हैं। जब अपने ही लोग एकजुट नहीं हैं, तो दूसरों को क्या समझाएंगे?”

पुरुष प्रधान सोच पर सवाल
हर्षा ने समाज की सोच पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि यह देश आज भी पुरुष प्रधान मानसिकता से ग्रसित है, जहां किसी महिला का आगे बढ़ना कई लोगों को खटकता है। उन्होंने कहा, “यहां इतना क्लेश है कि कोई लड़की आगे कैसे बढ़ रही है, उसे कैसे रोका जाए, उसे कैसे नीचे गिराया जाए। अगर किसी स्त्री का मनोबल नहीं तोड़ पा रहे, तो उसके चरित्र पर सवाल उठा दो। तब वह टूट ही जाती है। यह पौराणिक काल से होता आया है और आज भी हो रहा है।”

कौन हैं हर्षा रिछारिया?
हर्षा रिछारिया मूल रूप से उत्तराखंड की रहने वाली हैं। उनके इंस्टाग्राम बायो में उन्हें एंकर, सामाजिक कार्यकर्ता और इंफ्लूएंसर के रूप में बताया गया है। प्रयागराज महाकुंभ–2025 के दौरान उन्हें सोशल मीडिया पर “सबसे सुंदर साध्वी” कहकर वायरल किया गया।उनके पिता दिनेश रिछारिया नौकरी छोड़ चुके हैं, जबकि उनकी मां घर से बुटीक चलाती हैं। पिता के अनुसार हर्षा ने बीबीए की पढ़ाई की है, उन्होंने भोपाल से एंकरिंग का कोर्स किया है, हर्षा ने संन्यास नहीं लिया है, उन्होंने सिर्फ गुरुदीक्षा ली है और वह एक सामान्य लड़की हैं।

ग्लैमर की दुनिया में वापसी के संकेत

हर्षा रिछारिया के बयान के बाद यह साफ हो गया है कि वह अब आध्यात्मिक पहचान से हटकर दोबारा अपने प्रोफेशनल करियर पर ध्यान केंद्रित करना चाहती हैं। उनका कहना है कि फिलहाल वह खुद को संभालना और आगे बढ़ना चाहती हैं।

नई शुरुआत का रास्ता
प्रयागराज महाकुंभ से सुर्खियों में आईं हर्षा रिछारिया की यह कहानी आस्था, पहचान और समाज की सोच के बीच चल रहे संघर्ष को उजागर करती है। धर्म के नाम पर मिली लोकप्रियता जहां एक ओर सम्मान लेकर आई, वहीं दूसरी ओर सवालों, विरोध और मानसिक दबाव का कारण भी बनी। अब हर्षा ने एक नई शुरुआत का रास्ता चुना है, आस्था को दिल में रखते हुए, लेकिन अपनी पहचान और भविष्य को खुद तय करने के संकल्प के साथ।

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